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Wednesday, January 2, 2013

जूस के बजाए ताजा फल - सब्जियों का सेवन अधिक फायदेमंद है

अगर आप फल - सब्जियों के डिब्बाबंद जूस का सेवन करते है तो सावधान हो जाइए क्योंकि आहार विशेषग्णों   का कहना है की बाजार में तरह - तरह के आकर्षक पैक्स में मिलने वाले जूस के इन पैक पर प्रोटीन , विटमिन , इत्यादि की जो मात्रा लिखी होती है ,कई बार वह सही नहीं दर्शाई जाती । ऐसे डिब्बाबंद जूस को कंपनियां बढ़ा - चाढ़कर इसके फायदे बताते हुए प्रायः ग्राहकों को  गुमराह करती है , इसलिए बेह्तार यही है की आप इस तरह के पैक्ड जूस के बजाय ताजा - फल सब्जियों का ही सेवन करें ।

उपरोक्त तथ्य जापान के कंज्यूमर इन्फार्मेशन सेंटर द्दारा किए एक सर्वेक्षण में सामने आया है । सर्वेक्षण में बताया गया है की डिब्बाबंद जूस बेचने वाली कंपनिया इसे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायेदेमंद बताते हुए लंबे - चोडे दावे करती है जबकी ये दावे कई बार हकीकत से कोसों दूर होते है । जेसी आईसी  द्वारा कहा गया है की जूस बनाने वाली कुछ कंपिनियाँ तो अपने पैक पर इस तरह की तिप्पिनीयां भी छाप देती है की उनके जूस के पैक में पूरे एक दिन में खाई जाने वाली सब्जियों की संतुलित मात्रा के बराबर विटमिन मोजूद है ।

vegitables

जेसी आईसी ने 14 ऐसी कंपनियों के उत्पादों की जांच की , जिन में से 10 कंपनियां जूस बनाने वाली थी जबकि 4 कंपनियां विटमिन के कैप्सूल व पाउडर बनाने वाली थी और इस जांच के दोरान बेहद चोकाने वाला तथ्य सामने आया ।

जांच के दोरान जेसी आईसी ने पाया की इनमे से किसी भी कंपनी के प्रोडक्ट में विटमिन सी , आयरन व अन्य पोषक तत्वों की उतनी मात्रा नहीं पाई गई , जितनी उन पर लिखी हुई थी । इस जांच के इन हैरत अंगेज नतीजों को देखकर अब डाक्टर भी मरीजों को डिब्बाबंद जूस का सेवन करने के बजाय ताजा - फल - सब्जियां का गूदा बेकार चला जाता है , जिस में काफी मात्रा में जरूरी पोषक तत्व होते है और इस तरह वे भी गूदे के साथ बेकार चला जाता है ,जिसमे काफी कम रह जाती है लेकिन यदि आप फिर भी जूस पीना चाहते है तो डिब्बाबंद जूस के मुकाबले आपके लिए कही ज्यादा फायदेमंद रहेगा ।

Tuesday, January 1, 2013

डाइनिंग टेबल की शान है खीरा

खीरे को आदमी जितना जानता है , इसका महत्व उससे काफी अधिक है । खीरा एक फल भी है और सलाद भी । इसे छिलके सहित खाना अधिक पोष्टिकता देता है । खीरा छीलकर खाने से इसकी काफी शक्ति का हास हो जाता है । सभी खीरे कडवे नहीं होते । मामूली कड़वापन होभी सकता है । यदि खीरे का कडवापन झेल लें , तो यह खून को साफ करता है । काटकर , घिसकर खीरे की कडवाहट दूर करने से खीरे की कडवाहट तो खत्म हो जाती है।

किन्तु इससे इसकी शक्ति का हास होता है , ताकत कम हो जाती है । कुछ लोग खीरे के कड़वेपन को दूर करने के लिए खीरे  के ऊपर सिरे को काटकर घिसने को  ' जहर निकालना ' कहते है । वास्तव में यह कोई जहर नहीं । इसलिए इसे जहर कहकर खीरे का अपमान न करें । आइए डाले खीरे के कुछ ख़ास गुणों पर एक नजर :

  • खीरे की तासीर ठंडी होती है। यही कारण हैकि लू ,गर्मी ,तापिश कम करने के लिए खीरे का सेवन हर कोई बड़े चाव से करता है ।

  • खीरा कब्ज को दूर कर पेट को साफ करता है । अतः इसका नियमित सेवन करना चाहिए ।

  • पेट में ,छाती में अथवा शरीर में कही भी गर्मी की जलन हो तो खीरा खाने से जलन शांत हो जाती है ।

  • खीरा पचने में हल्का होता है । अतः इसे बच्चे और वृद्द दोनों ही सुगमता से खा और पचा सकते है ।

  • खीरा डाइनिंग टेबले की शान है । ओषधीय गुणों की भी कोई कभी नहीं इसमें । खीरे का रस निकालकर नींबू , काली मिर्च , काला नमक डालकर खाते रहने से डायबिटीज के रोग में बहुत फ़ायदा होता है ।

  • खीरा आँखों के आस -पास की कालिमा हटाने का भी काम करता है । दो - तीन चम्मच खीरे का रस लें । रूई के फाहे को इस रस में डुबोकर बंद आँखों पर रखें । इस रस को आँखों के आस - पास मलें । कालिमा तो हटेगी ही , आँखों की गर्मी भी ख़त्म होगी ।

  • पेट में वायु बनी रहना बहुत परेशानी पैदा करती है । खीरे का सेवन वायु को निष्कासित करता है वायु बनने से भी रोकता है ।

  • यदि शरीर में पत्ति बढ़कर दुखी कर रहा हो , तो भी खीरा खाने से राहत मिलती है ।

  • यदि घुटनों में दर्द रहता हो , तो खीरा तथा लहसुन नियमित खाएं । हर प्रकार के जोड़ों के दर्द दूर होगें और उठने - बैठने , चलने - फिरने में भी आसानी होगी ।

  • खीरे का रस पथरी को कम करने में भी मददगार रहता है । पथरी के रोग से बचने के लिए दिन में तीन बार आधा - आधा कप खीरे का रस काली मिर्च और काला नमक डालकर लें । लाभ होने लगेगा ।

  • खीरा खाना तथा खीरे का रस पीना पेशाब में होने वाली सारी जलन को कम करता है । ऐसा रोगी तो इसे जरूर सेवन करें ।

  • खीरे को बेतैर फल ,सलाद तथा ओषधि तीनों प्रकार से लें सकते है । गर्मियों में तो इसका पहले से अधिक उपयोग कर लाभान्वित हुआ जा सकती है ।


 

Saturday, December 29, 2012

युवा दिखने के लिए

युवा दिखना भी एक कला है । अपनी उम्र से कम दिखना , चुस्त दिखना किसको अच्छा नहीं लगता , परंतु कुछ पाने के लिए कुछ खेना भी पड़ता है । इस प्रकार युवा दिखने के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि क्या करें और क्या न करें ।

  • tips for young lookचीनी और मैदे से बनी चीजों का प्रयोग बहुत कम करें ।

  • फास्ट फूड और डिब्बाबंद भोजन का प्रयोग मजबूरी में ही करें ।

  • प्रतिदिन ताजी सब्जियों या फलों का जूस पिएँ क्योंकी कच्ची सब्जियों और फलों में एंटी आक्सीडेट पाए जाते है ।

  • दिन में कच्ची सब्जी और फलों का सेवन करें । फलों और सब्जियों में एंटी आक्सीडेट होने के कारण शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है ।

  • अपने भोजन में कैल्शियम के प्रयोग का पूरा ध्यान रखे । कम फैट वाले दूध के दही , राजमां , सोयाबीन और चने का सेवन करते रहे । सोयाबीन और दही से आपकी हड्डिया मजबूत बनेगी । कम तेल से बना भोजन खाएं , क्योंकि अधिक तेल से शरीर में ' फ्री रेडिकल एक्टिविटीज ' को बढ़ावा मिलता है जो इंसान को जल्दी बूढा बना देता है ।

  • अपनी भूख से तीन - चोथाई खाएं । एक - चोथाई भूख बचा कर रखे जिससे पाचन क्रिया अच्छी तरह से अपना काम कर पाएगी ।

  • व्यायाम और रोज सेर करें । 30 से 40 मिनट की सैर शरीर को सुडोल और निरोग रखती है ।

  • सकारात्मक सोच रखे ।

  • स्वयं प्रसन्न रहे और आस - पास प्रसन्नता का वातावरण फैलाएं ।

  • परिवार और मित्रों से सम्पर्क में रहे । स्नेह और साथ से कई मानसिक आघातों को आसानी से सहने की शक्ति और हिम्मत मिलती है ।

  • जो स्वयं को अच्छा लगे वही करें । जो करें वह अर्थहीन न हो । ईमानदारी और लगन से किए काम से मानसिक शांती मिलती है ।

Friday, December 14, 2012

आयुर्वेदिक ओषधे है घर का बना घी

ह्रदयरोग के साथ मोटापे और दिल के रोगियों का सबसे अधिक गुस्सा घी पर ही उतरता है। आयुर्वेद में घी को ओषधी माना गया है । इस सबसे प्राचीन सात्विक आहार से सर्वदेशों का निवारण होता है । वात और पित्त को शांत करने में सर्वश्रेष्ट है साथ ही कफ भी संतुलित होता है । इससे स्वस्थ वसा प्राप्त होती है , जो लीवर और रोग प्रतिरोधक प्रणाली को ठीक रखने के लिए जरूरी है । घर का बना हुआ घी बाजार के मिलावटी घी से कही बेहतार होता है । यह तो पूरा का पूरा सैचुरेटेड फैट है ,कहते हुए आप  इंकार में अपना सिर हिला रहे होगे । ज़रा धीरज रखे । घी में उतने अवगुण पाली अनासोचुरेतेड वसा को आग पर चढना अस्वास्थकर होता है ,क्योंकी ऐसा करने से पैराक्सैड्स और एनी फ्री रेडिकल्स निकलते है । इन पदार्थों की वजह से अनेक  बीमारिया और समस्याएँ पैदा होती है । इसका अर्थ यह भी है कि वनास्पतिजन्य सभी खाध्य तेल स्वास्थ केलिए कमोवेश हानिकारक  तो है ही ।

फायदेमंद है घी

घी का मामला थोड़ा जुदा है। वो इसलिए कि घी का स्मोकिंग पाइंट दूसरी वसा ओं की तुलना में बहुत अधिक है । यही वजह है कि पकाते समय आसानी से नहीं जलता । घी में स्थिर सैचुरेटेड बाँडस बहुत अधिक होते है जिससे फ्री रेडीकल्स निकलने की आशंका बहुत कम होती है । घी की छोटी फैटी एसिड की चेन को शरीर बहुत जल्दी पचा लेता है । अब तक तो सभी यही समझा रहे थे कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है ?

कोलेस्ट्राल कम होता है

घी पर हुए शोध बताते है कि इससे रक्त और आँतों में मोजूद कोलेस्ट्राल कम होता है । ऐसा इसलिए होता है , क्यों कि घी से बाइलारी लिपिड का स्राव बढ़ जाता है । घी नाही प्रणाली एवं मस्तिष्क की श्रेष्ट ओषधि माना गया है । इससे आँखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है , इसलिए ग्लूकोमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है । सकता है इस जानकारी ने आपको आश्चर्य में दाल दिया हो । घी पेट के एसिड्स के बहाव को बढाने में उत्प्रेरक का काम करता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है । दूसरे अन्य वसा में यह गुण नहीं है । मक्खन , तेल आदि पाचन क्रिया को धीमा कर देते है और पेट में निष्क्रिय होकर बैठ जाते है । जाहिर है कि आप ऐसा नहीं चाहेगे । घी में भरपूर एंटी आक्सीडेट्स होते है तथा यह अन्य खाध्य पदार्थों से प्राप्त विटामिन और खनिजों को जज्ब करने में मदद करता है ।

यह शरीर के सभी ऊतकों की प्रत्येक सतह का पोषण करता है तथा रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूती प्रदान करता है । इसमें ब्यूटिरिक एसिड नामक फैटी एसिड भी भरपूर होता हैजिसे एंटीवायरल माना जाता है । एंटीवायरल विशेषता ओं के कारण कैसर की गठान की वृद्दि रूक जाती है । जलने के कारण हुए फफोलों पर घी बहुत अच्छा काम करता है । घी याददाश्त को बढाने और सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने में मदद करता है । ध्यान देने योग्य सलाह यह है की कोलेस्ट्राल की मात्रा कम हो लेकिन जिनका कोलेस्ट्राल पहले से ही बढ़ा हुआ है उन्हें घी से परहेज रखना चाहिए ।

घी खाएं या नहीं ...

यदि आप स्वास्थ्य है, तो घी जरूर खाएं ,क्योंकी यह मक्खन से अधिक सुरक्षित है । इसमें तेल से अधिक पोषक तत्व है। आपने पंजाब और हरियाणा के निवासियों को देखा होगा । वे टनों घी खाते है ,लेकिन सबसे अधिक फिट और मेहनीत होते है ।यद्यपि घी पर अभी और शोधों के नतीजे आने शेष है , लेकिन प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में अल्सर , कब्ज , आँखों की बीमारियों के साथ त्वचा रोगों के इलाज के लिए घी का प्रयोग किया जाता है ।

क्या रखें सावधानियां ......

भैस के दूध के मुकाबले गाय के दूध में वसा की मात्रा कम होती है । इसलिए शुरू में निराश न हो । हमेशा इतना बनाएं की वह जल्दी ही ख़त्म हो जाए । अगले हफ्ते पुनः यही प्रक्रिया दोहराई जा सकती है । गाय के दूध में सामान्य दूध की ही तरह प्रदूषण का असर हो सकता है , मसलन कीटनाशक और कृत्रिम खाद के अंश चारे के साथ के पेट में जा सकते है । जैविक घी में इस तरह के प्रदूषण से बचने की कोशिश की जाती है । यदि संभव हो तो गाय के दूध में कीटनाशकों और रासायनिक खाद के अंश की जांच कराई जा सकती है । जिस तरह हर चीज की अति बुरी होती है इसी तरह घी का प्रयोग भी संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए ।

स्वस्थ रखें दांत के लिए 10 कदम

यह सही है कि दांत के दर्द का इलाज महँगा होता है लेकिन अगर थोड़ी सावधानी बरती जाए और कुछ आदतें डाल ली जाएं तो आप लंबे समय तक दांतों के डाक्टर के पास जानेसे बच सकते है क्योंकी डेंटिस्ट के पास लगातार जाना किसी सिरदर्द से कम नहीं है । यहाँ पेश है ऐसे ही 10 ख़ास तरीके जिन्हें अजमाकर आप चमकती मुस्कान पा सकते है ।

  1. दिन में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पिए । जितना पानी आप पिएंगे उतना ही आपके दांत साफ होंगे । इसके अलावा यह चाय ,काफी ,शराब ,सोडा आदि के दागों को भी दांतों से मिटाने में कारगर साबित होगा ।

  2. अपने खाने में फल और सब्जी शामिल करें । सेब , खीरा , गाजर आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते है । यह आपके दांतों में फंसे खाने को भी निकालते है और मसूड़ों की समस्या दूर होती है ।

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  4. शुगर फ्री च्यूइंगम खाने से सलाइवा का निर्माण होता है जो आपको दांतों से प्लाक एसिड को साफ करता है। साथ ही आपके दांतों के इनैमल को मजबूत बनता है ।

  5. जूस और सोडा पीने के बाद ब्रश नहीं करना चाहिए । हो सके तो काफी और वाइन स्ट्रा से पिएँ । इससे इनका सीधा संपर्क आपके दांतों सेनही हो पाएंगा और आपके दांत हमेशा चमकते रहेंगें ।

  6. हमेशा साफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करें । अगर आप सख्त ब्रश का इस्तेमाल करते है तो उसे कुछ देर गर्म पानीमे डुबोकर फिर ब्रेश करें ।

  7. चाकलेट व कैंडी बार भी आपके दांतों के लिए नुकसानदेह है । इन्की जगाह बादाम ,वेजमाईट क्रैंकर्स चीज के साथ दही  और ताजा फल आदि खाना चाहिए ।

  8. दांतों के साथ ही जीभ की सफाई भी जरूरी है । टंग क्लीनर का इस्तेमाल रोजाना करें । यह आपके दांतों को हाईजीनिक बनाएं रखता है , साथ ही मुंह से आने वाली बदबू को भी दूर करता है ।

  9. चीनी और स्टार्च का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए । यह बैक्टीरिया पैदा करते है जो आपको दांतों को नुक्सान पहुंचाते है ।

  10. खाने के बाद दांतों को हाइड्रोजन पेराक्साइड से साफ करना चाहिए ,ताकि आपके दांतों से बैक्टीरिया दूर हों और वे सुन्दर दिखें । मगर हमेशा एक बात का ध्यान रखें कि हाइड्रोजन पेराक्साइड को निगलना नहीं चाहिए । इससे सिर्फ्गारारे करने चाहिए ।

Saturday, November 17, 2012

हार्ट अटैक से बचने के दस उपाय


  1. अपने कोलेस्ट्रोल स्तर को 130 एमजी / डीएल तक रखिए :  कोलेस्ट्रोल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद है , जिनसे जितना अधिक हो , बचने की कोशिश करनी चाहिए । अगर आपको युक्त यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रोल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पडा सकता है ।

  2. अपना सारा भोजन बगैर तेल के बनाएं , लेकिन मसाले का प्रयोग बंद नहीं : मसाले हमें भोजन का स्वाद देते है , न की तेल का । हमारे ' जीरो आयल ' भोजन निर्माण विधि का प्रयोग करें और हजारों हजार जीरो आयल भोजन स्वाद के साथ समझोता किए बगैर तैयार करें । तेल ट्रिगलीराइडस होते है और रक्त स्तर 130 एमजी / डीएल के नीचे रखा जाना चाहिए ।

  3. अपने तनावों को लगभग 50 प्रतिशत तक कम करें :  इससे आपको ह्रदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी , क्योंकि मनोवेग्नानीक तनाव ह्रदय की बीमारियों की मुख्य वजह है । इससे आपको बेह्तार जीवन स्तर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी ।

  4. हमेशा ही रक्त दबाव को 120 / 80 एमएम एचजी के आस - पास रखे : बढ़ा हुआ रक्त दबाव विशेष रूप से 130 / 90 से ऊपर ब्लांकेज को दुगुनी  रफ्तार से बढ़ाएगा । तनाव में कमी , ध्यान , नमक में कमी तथा यहाँ तक की हल्की दवाएं लेकर भी एअक्त दबाव को कम करना चाहिए ।

  5. अपने वजन को सामान्य रखे :  आपका बाडी मॉस इंडेक्स 25 से नीचे रहना चाहिए । इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्केयर के साथ घटाकर कर सकते है । तेल नहीं खाकर एवं निम्न रेशो वाले अनाजों तथा उब किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते है ।

  6. नियमित रूप से आधे घंटे तक टहलना जरूरी :  टहलने की स्फ्तार इतनी होनी चाहिए , जिससे सीने में दर्द नहीं हो ओर हांफे भी नहीं । यह आपके अछे कोलेस्ट्रोल को बढाने में आपकी मदद कर सकता है ।

  7. 15 मिनट तक ध्यान और हलके योगा व्यायाम रोज करें :  यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा । आपको ह्रदय रोग को कम नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा ।

  8. भोजन में रेशे और एंटी आक्सीदेट्स : भोजन में अधिक सलाद , सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें । ये आपको भोजन में रेशे और एंटी आक्सीदेट्स के स्रोत है और एचडीएल  या गुड कोलेस्ट्रोल को बढाने में सहायक होते है ।

  9. अगर आप मधुमेह से पीड़ित है , तो शक्कर को नियंत्रित रखे : ब्लड शुगर 100 एमजी / डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140  एमजी / डीएल से नीचे होना चाहिए । व्यायाम , वजन में कमी , भोजन में अधिक  रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए अधुमेह को खतरनाक न बनने  दें । अगर आवश्यक हो , तो हल्की दवाओं के सेवन से फायदा पहुँच सकता है ।

  10. हार्ट अटैक से पूरी तरह बचाव :  हार्ट अटैक से बचने का सबसे आसान सन्देश है और हार्ट में अधिक रूकवाटे न होने दें । यदि आप इन्हें घटा सकते है , तो हार्ट अटैक कभी नहीं होगा ।


दिल के रोगों के लिए लाभकारी सब्जियां  :

हमारे भोजन में अनेक ऐसी सब्जिया है , जिन्हें प्रतिदिन प्रयोग करके हार्ट की सभी बीमारियों से बचा जा सकता है । ये है -

प्याज -  इसका प्रयोग सलाद के रूप में कर सकती है । इसके प्रयोग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है । कमजोर ह्रदय होने पर जिनको घबराहट होती है या ह्रदय की धड़कन बढ़ जाती है , उनके लिए प्याज बहुत ही लाभादारक है ।

टमाटर -  इसमें विटामिन सी , बीताकेरोटिन , लाइकोपीन , विटामिन एक व पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है , जिससे दिल की बीमारी का ख़तरा कम हो जाता है ।

लोकी -  इसे घिया भी कहते है । इसके प्रयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर सामान्य अवस्था में आना शुरू हो जाता है । ताजी लोकी का रस निकालकर पोदीना पत्ती - 4 व तुलसी के 2 पत्ते डालकर दिन में दो बार पीना चाहिए ।

लहसुन - भोजन में इसका प्रयोग करें । खाली पेट सुबह के समय दो कलियाँ पानी के साथ भी निगलने से फायदा मिलता है ।

गाजर -  बड़ी हुई धड़कन को कम करने के लिए गाजर बहुत ही लाभदायक है । गाजर का रस पिएँ , सब्जी खाए व सलाद के रूप में प्रयोग करें ।

 

 

Monday, November 5, 2012

खाद्य मौसम के अनुसार

एक ही खाने पर दो पीढि़यों की राय में धुर विरोधी अंतर ठीक वही है जो तासीर को लेकर आयुर्वेद व एलोपैथी में है। पारंपरिक रूप से खाने की तासीर को महत्व मिलता रहा है। आयुर्वेद के अनुसार तासीर दो तरह की होती है- ठंडी तासीर और गर्म तासीर।

मौसम के मुताबिक आहार

वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन सर्दियों के मौसम में किया जाना जाहिए। इसके विपरीत ठंडे खाद्य पदार्र्थो का dietसेवन गर्मियों के मौसम में करना चाहिए। वस्तुत: सर्दियों के मौसम में पेट में स्रावित होने वाले पाचक रसों की मात्रा बढ़ जाती है। भूख भी अच्छी लगती है। इस कारण सर्दियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन लाभप्रद रहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप फास्ट फूड्स का जमकर सेवन करें। वहीं गर्मियों में सर्दियों की तुलना में लोग पानी ज्यादा पीते हैं और भूख भी ज्यादा नहींलगती। इसलिए गर्मियों में ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन करना चाहिए।

विज्ञान की कसौटी पर

डॉ. सतीश चद्र शुक्ला के अनुसार हमारे यहा आयुर्वेद के आहार से सबधित जो नियम हैं, वे आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरे हैं। जैसे खाना तैयार करते समय हल्दी, लहसुन, प्याज, जीरा, धनिया, सौंफ व हींग आदि के प्रयोग से पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स व मिनरल्स प्राप्त होते हैं।

ये हैं ठंडी तासीर वाले

आवला और इससे बनने वाले उत्पाद जैसे मुरब्बा आदि, लौकी, परवल टिंडा, तरोई, अंगूर, सतरा, तरबूज और खरबूजा आदि की तासीर ठंडी होती है। इसी तरह शीतल पेयों की तासीर भी ठंडी होती है।

ये हैं गर्म तासीर वाले

फास्ट फूड्स और तले हुए खाद्य पदार्थ, अखरोट, काजू आदि ड्राई फ्रूट्स, खजूर, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द की दाल, राजमा, छोले आदि की तासीर गर्म होती है।

दूसरा पहलू यह भी

सीनियर डाइटीशियन डॉ. काजल पड्या के अनुसार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान विभिन्न खाद्य पदार्र्थो को ठंडे व गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो के रूप में विभाजित नहीं करता। बकौल काजल, आप गर्मियों में भी ड्राई फ्रूट्स ले सकते हैं, हा उतनी ही मात्रा में जितना आप पचा सकते हों। आप करेले के साथ दही खा सकते हैं, बशर्ते कि उसके खाने के बाद आपके हाजमे पर या शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बहरहाल, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान खान-पान में ठंडी व गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो पर जोर न देकर भोजन के छह प्रमुख तत्वों की सतुलित मात्रा पर जोर देता है। ये प्रमुख तत्व कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, विटांिमस, मिनरल्स और फाइबर हैं।

फिटनेस के लिए 6 स्टेप्स

आजकल लोगों में फिटनेस को लेकर काफी सजगता आ गई है। फिर भी कई बार जानकारी के अभाव में लोग कुछ ऐसी गलतिया कर जाते हैं, जिनकी वजह से उन्हें अपने फिटनेस प्लान में पूरी कामयाबी नहीं मिल पाती। अगर आप हमारी सलाह पर अमल करें तो अपने फिटनेस प्लान का भरपूर फायदा उठा सकती हैं..

अगर नियमित रूप से एक्सरसाइज करने के बावजूद आप खुद को पूरी तरह फिट महसूस नहीं करतीं तो आपको यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आपकी जीवनशैली में कुछ ऐसी गलत आदतें तो शामिल नहीं हैं, जो आपके फिटनेस प्लान की राह में रुकावट बन रही हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में

1. पर्याप्त नींद न लेना :  अध्ययनों में यह पाया गया है कि किसी भी इंसान को प्रतिदिन औसतन सात से आठ घटे की गहरी नींद की जरूरत होती है, लेकिन मात्र चार-पाच घटे की नींद लेने वाले जब सुबह उठकर वर्कआउट करते हैं तो उन्हें इस दौरान कभी-कभी झपकी भी आने लगती है। इससे एक्सरसाइज में गलतियां होती हैं और चोट लगने का भी खतरा रहता है। अगर नींद पूरी न हो तो इससे सुबह के समय शरीर में मेटाबॉल्जिम प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इस वजह से एक्सरसाइज करने के बावजूद वजन कम नहीं होता।

सलाह : अगर रात को आपकी नींद पूरी न हो तो अगली सुबह एक्सरसाइज के लिए जबरदस्ती न उठें।

2. डिनर न लेना : कुछ लोग वजन बढ़ने के डर से डिनर नहीं लेते। यह आदत सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है। सुबह वर्कआउट करने के लिए आपके शरीर को पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत होती है, लेकिन खाली पेट एक्सरसाइज या जॉगिंग करने से पेट में दर्द और एसिडिटी की समस्या हो सकती है।

सलाह : जॉगिंग पर या जिम जाने से कम से कम 45 मिनट पहले हल्का सा स्नैक्स जैसे चाय या कॉफी के साथ दो बिस्किट, एक कप दूध जरूर लें।

3. टीवी के साथ वर्कआउट : अगर आपको ट्रेडमिल पर चलते हुए या वेट लिफ्टिंग के दौरान टीवी देखने की आदत है तो इसे बदल डालें। इससे आपको चोट लग सकती है। अगर आप साइकल पर कॉर्डिओवैस्कुलर एक्सरराइज के दौरान या ट्रेडमिल पर चलते हुए टीवी देख रहे होते हैं तो इस दौरान एक्सरसाइज के तरीके के बजाय आपका सारा ध्यान टीवी पर होता है। इससे कई बार हैंडल पर पकड़ ढीली पड़ जाती है, जिससे शरीर को एक्सरसाइज का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

सलाह : एक्सरसाइज के दौरान टीवी देखने के बजाय अच्छा संगीत सुनें।

4. वार्मअप नहीं करना : कुछ लोग समय बचाने के लिए वार्मअप के बिना सीधे एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं, यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। यह आपके शरीर को एक्सरसाइज के अनुकूल बनाता है। इससे रक्त संचार समान रूप से होता है और शरीर का तापमान संतुलित हो जाता है। अगर वार्मअप किए बिना एक्सरसाइज की जाए तो इससे मासपेशियों में दर्द हो सकता है।

सलाह : अगर आप एरोबिक्स, जॉगिंग, साइक्लिंग या ब्रिस्क वॉक करती हैं तो इसके लिए कम से कम पाच मिनट के लिए वार्मअप जरूर करें।

5. फुटवेयर : कुछ लोग ट्रेडमिल एक्सरसाइज के दौरान बॉस्केट बॉल शूज पहनते हैं तो एरोबिक्स के दौरान वॉकिंग शूज पहनते हैं। इससे केवल पैरों के तलवों में ही नहीं, बल्कि घुटने, कूल्हे और पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है।

सलाह : हर एक्सरसाइज के लिए उसी के अनुकूल फुटवेयर का चुनाव करें।

6. बोरिंग : फिटनेस प्लान अगर आपके फिटनेस प्लान में रोचकता और विविधता न हो तो इससे बहुत जल्दी ही आपका मन ऊब जाएगा और कुछ ही दिनों में आपका यह प्लान ठप पड़ जाएगा। मिसाल के तौर पर कुछ सिर्फ मॉर्निग वॉक करते हैं तो कुछ लोग एरोबिक्स। इससे उनके फिटनेस रुटीन में बोरियत आ जाती है और उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

सलाह : एक सप्ताह के अंतराल पर जॉगिंग, एरोबिक्स, स्किपिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज को शामिल करें।

Sunday, November 4, 2012

सही पोषक तत्वों हो रही है

समुचित मात्रा में पोषण न मिलने से शरीर के सभी अंगों और उनकी कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस स्थिति में व्यक्ति कई रोगों से भी ग्रस्त हो सकता है, जैसे वह :

* रक्त की कमी [एनीमिया] और रतौंधी [नाइट ब्लाइंडनेस] आदि रोगों से ग्रस्त हो सकता है। आयरन की कमी से एनीमिया और विटामिन ए की कमी से नेत्र और उसकी ज्योति क्षीण होने लगती है।

nutrients* पोषक तत्वों, जैसे-कैल्शियम के अभाव में हड्डिया और जोड़ कमजोर होने लगते हैं। कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है। इस रोग में जरा सा आघात लगने पर हड्डी टूट जाती है।

* सही पोषण के अभाव में शरीर का रोग प्रतिरोधक तत्र [इम्यून सिस्टम] कमजोर हो जाता है। इस कारण व्यक्ति शीघ्र ही विभिन्न बीमारियों के सक्रमण का शिकार हो जाता है।

* हृदय की सेहत के लिए पोटैशियम लाभप्रद है। इस तत्व के अभाव में हृदय की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से कार्य नहीं करती।

* पोषक तत्वों के अभाव में गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु पर खराब असर पड़ता है।

* शरीर का स्नायु तत्र [नर्वस सिस्टम] कमजोर होने से हाथ व पैरों में कंपन आदि शिकायतें पकड़ सकती हैं।

* व्यक्ति की मानसिक क्षमता भी क्षीण होने लगती है।

सामान्य परिवार का पौष्टिक भोजन

आमतौर पर सामान्य परिवार के भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त आहार 62 से 65 प्रतिशत, प्रोटीन [10 से 15 प्रतिशत], वसा [10 से 15 प्रतिशत] और शेष भाग विटामिस और मिनरल्स से सबधित होना चाहिए। उम्र, शारीरिक श्रम, शारीरिक सरचना या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी के कारण पोषक तत्वों के उपर्युक्त प्रतिशत में परिवर्तन आ सकता है। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों को आहार के सदर्भ में इन बातों पर ध्यान देना चाहिए :

* कार्बोहाइड्रेट्स के लिए अनाज से बनी रोटियों व चावल को थाली में स्थान दें।

* अगर आप मासाहारी नहींहैं, तो प्रोटीन के लिए दोपहर के भोजन की थाली में दाल जरूर होनी चाहिए।

* ब्रेकफास्ट में दूध और इससे बने उत्पाद लिए जा सकते हैं।

* अंकुरित अनाजों [स्प्राउट्स] के रूप में चना, सोयाबीन और मूंग की दाल का सेवन अत्यत लाभप्रद है।

* भोजन में सलाद को शामिल करें।

* अलग-अलग रंगों के मौसमी फलों व सब्जियों का बदल-बदलकर प्रयोग करें।

* मौसम के अनुसार फलों के रस और सूप का सेवन करें।

कम खर्च में पौष्टिक आहार  : नई दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर डाइटीशिन रीतिका समद्दार के अनुसार यह धारणा बिल्कुल गलत है कि पौष्टिक आहार सिर्फ महंगे खाद्य पदार्र्थो, जैसे - बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता, मास व मछली आदि से ही प्राप्त होते हैं। एक आम आदमी पौष्टिक आहार को मौसमी फलों व सब्जियों [जो महंगी नही होतीं], दूध, सोयाबीन आदि से प्राप्त कर सकता है। मौसमी फल व सब्जिया विटामिस व मिनरल्स की अच्छी स्रोत हैं, जिनकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। केले में पाये जाने वाले पोषक तत्व सेब से जरा भी कम नहीं हैं। हालाकि दोनों ही फलों में पोषक तत्व अलग-अलग होते हैं।

प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोत दालें सोयाबीन, दूध, मूंगफली आदि भी महंगी कीमत वाले खाद्य पदार्थो के गुणों से किसी मायने में कम नहीं हैं। इसी तरह मिनरल्स व विटामिस को काफी हद तक सस्ती हरी सब्जियों [जैसे- पालक, लौकी, तरोई, सेम, बदगोभी, मूली, मेथी, बथुआ आदि] से प्राप्त कर सकते हैं।

अलसी का जवाब नहीं :  विश्व स्वास्थ्य सगठन ने अलसी [फ्लेक्स सीड] के गुणों के कारण इसे सर्वश्रेष्ठ पौष्टिक आहार 'सुपर फूड्स' की श्रेणी में शामिल किया है। अलसी में अनेक पोषक तत्व, जैसे- प्रोटीन, क्रोमियम, जिंक, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन सिलेनियम, विटामिन ए, विटामिन बी. आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। अलसी को हल्का भूनकर और फिर इसका चूर्ण बनाकर 5 से 10 ग्राम [एक से दो चम्मच] मात्रा में सुबह-शाम पानी या दूध के साथ सेवन करना चाहिए। अलसी महंगी भी नहींहै।

पोषक तत्वों का भडार सोयाबीन  :

सोयाबीन का प्रयोग अंकुरित बीज, दाल, दूध, दही और 'बड़ी' के रूप में किया जाता है। यह भी महंगी नहीं है और इसका प्रयोग सामान्य से लेकर खास व्यक्ति भी कर सकता है। सोयाबीन में मूलत: प्रोटीन, विटामिन ए, बी, ई और बी काप्लेक्स भी पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फास्फोरस सरीखे मिनरल्स भी पाये जाते हैं।

पोषण से सबधित मिथक  :

इस सदर्भ में व्याप्त मिथकों को तथ्यों की रोशनी में देखा जाना चाहिए। कुछ मिथ और उनसे सबधित तथ्य इस प्रकार हैं :

मिथक : भोजन करने के तुरंत बाद जमकर पानी पीना चाहिए।

तथ्य : खाने के तुरंत बाद आधा गिलास तक पानी पिया जा सकता है। खाने के तुरंत बाद जमकर यानी एक गिलास या इससे अधिक मात्रा में पानी पीने से पाचक रसों [डाइजेस्टिव एंजाइम्स] की सक्रियता कम हो जाती है। इस कारण पाचन प्रक्रिया मद पड़ जाती है। हा, खाने के 35 मिनट बाद पानी प्यास के अनुसार पिया जा सकता है।

मिथक : फलों के साथ दूध नहीं लिया जा सकता।

तथ्य : सिर्फ खट्टें फलों के साथ दूध नहीं लेना चाहिए। ऐसा करने से पाचन तत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, लेकिन शेष फलों के साथ दूध ले सकते हैं। वजन बढ़ाने के लिए केले के साथ दूध लेने का चलन पहले से ही है।

मिथक : दूध और दही को साथ नहीं ग्रहण करना चाहिए।

तथ्य : एक बार खाने के बाद जिन लोगों को हाजमे से सबधित कोई दिक्कत महसूस नहीं होती या फिर जो लोग इन दोनों को ही साथ में हजम कर सकते हैं, वे इन्हें साथ-साथ ग्रहण कर सकते हैं।

Saturday, November 3, 2012

टीनएजर्स के लिए नियमित आहार


  • सर्दी आते ही सब कुछ बदल जाता है। दिन छोटे हो जाते हैं, रातें बड़ी। धूप गुनगुनी हो उठती है। ठंडी हवा में दांत ऐसे किटकिटाते हैं, मानो टेबल याद कर रहे हों। इतना ही नहीं, इन दिनों में कुछ और भी बदलता है। वह है तुम्हारे हाजमे की ताकत। लेकिन दोस्तों, इसका मतलब यह नहीं कि कुछ भी खाते चले जाओ। जंक फूड या हैवी फूड लेने से तुम्हारा शरीर शेप में न रहकर बेडौल हो जाएगा, दूसरे बीमारियों से लड़ने की तुम्हारी ताकत [प्रतिरोधक क्षमता] कम हो जाएगी। इसलिए तुम्हें अपने टिफिन यानी खान-पान पर ध्यान देना होगा।

  • डाइटीशियन ईशी खोसला का कहना है कि किशारोवस्था के दौरान फिजिकल, बायोकेमिकल और इमोशनल विकास होता है। शरीर में तमाम तरह के बदलाव की शुरुआत इसी उम्र में होती है। ऐसे में हेल्दी डाइट बहुत जरूरी है। टींस को कैलोरी और पोषक तत्वों खास तौर पर आयरन और कैल्शियम की सबसे अधिक जरूरत होती है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अहम हैं। डाइटीशियन ईशी खोसला 13-15 और 16-18 साल की उम्र में किशोरों को अपने आहार पर खास देने की जरूरत बताती है।

  • उनके अनुसार, यदि कहीं बाहर जाना हो, तो बाहर की चीजें खाने से अच्छा है कि घर से टिफिन पैक करके ले जाया जाए। इससे फायदा यह होता है कि किशोर अपने समय पर खाना खा सकते हैं, दूसरे उन्हें उनके शरीर के लिए उपयोगी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं। ये पोषक तत्व ही उनके ग्रोथ में सहायक बनते हैं। हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अनाज, दूध और दूध से बनी चीजों को निर्धारित मात्रा में अपने भोजन में शामिल करने से अच्छा विकास होता है।

  • डाइटीशियन के अनुसार, भले ही ब्रेकफास्ट हो, लंच हो या फिर डिनर, टिफिन पैक करने में किशोरों को इस बात का खयाल रखना चाहिए कि उनके भोजन से उन्हे कितनी एनर्जी मिल रही है और शारीरिक व मानसिक विकास के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक प्रोटीन और आयरन की सही मात्रा मिल रही है या नहीं।

  • टींस को अपने खाने को नियत समय पर ही लेना चाहिए। ईशी खोसला के अनुसार, खाने का समय तय होना चाहिए। ब्रेक-फास्ट, लंच, शाम के नाश्ते और डिनर में से हर एक के बीच चार घंटे से ज्यादा का गैप न हो। इसके साथ ही किशोर किसी डाइटीशियन से सलाह लेकर अपने टाइम के अनुसार एक डाइट चार्ट बनवा सकते हैं। इससे उनकी उम्र और शरीर के वजन के अनुसार आवश्यक एनर्जी तय की जाती है। लड़के और लड़कियों के लिए जरूरी एनर्जी में भी अंतर होता है। जैसे एक 13 से 15 साल के किशोर को 2450 किलो कैलोरी की जरूरत होती है, तो इसी उम्र की किशोरी को 2060 किलो कैलोरी की। इसी के अनुसार पोषक तत्वों की मात्रा में भी अंतर होता है।

  • आम तौर पर सर्दियों में प्यास कम लगती है और वे पानी पीने को नजरअंदाज करने लगते हैं। लेकिन यह आदत ठीक नहीं। खासतौर पर किशोरावस्था में पूरे दिन में आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इससे वे तरोताजा रहते हैं और टॉक्सिन्स ज्यादा असर नहीं दिखा पाते। इसके अलावा फैटी एसिड फूड, जैसे क्रीमरोल, पेस्ट्री, केक और कुकीज इत्यादि का कम ही सेवन करना चाहिए। वहीं सॉस व पैक्ड फूड, जिनमें प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है, उन्हें न खाने में ही भलाई है। यदि चटपटा खाने का मन है, तो बेहतर होगा कि उसे घर में ही तैयार किया जाए। आप मसालेदार फ्रूटचाट घर में भी बना सकते हैं। वह आपको जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। वह हाइजीनिक भी होगा और स्वादिष्ट भी। सर्दियों में वैसे तो कोल्डड्रिंक और ठंडी चीजें नहीं खाना-पीना चाहिए, क्योंकि उनसे टॉन्सिल्स की दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन फिर भी यदि पीना ही है, तो घर की बनी लस्सी या ताजे फलों का जूस पिएं।

  • खाने का समय डाइट* सुबह का नाश्ता 7 बजे 1 टी स्पून चीनी के साथ 150 मिली लीटर दूध + 2 पनीर या चीज सैंडविच/ 1 स्टफ्ड परांठा या 1 ऑमलेट* लंच के पहले 11 बजे ताजे फल* लंच 12 बजे 3-4 चपाती, 1 कटोरी दाल, हरी पत्तेदार सब्जी, मीठा दही, 1 पीस मिठाई* शाम का नाश्ता 3-4 बजे 1 ग्लास मिल्कशेक + भुनी हुई मूंगफली या भुना चना + बिस्किट* रात का खाना 8-9 बजे 3-4 चपाती [घी के साथ], 1 कटोरी दाल, चावल या 1 कटोरी दलिया, हरी सब्जी, ग्रीन सलाद* सोने से पहले 10 बजे शहद के साथ 150 मिली लीटर दूधइनका रखें ध्यान* दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए, ताकि टॉक्सिन शरीर से बाहर निकल जाएं।* दिनभर में 2-3 चम्मच तेल का सेवन किया जा सकता है।* दिनभर में 12 चम्मच घी से ज्यादा न हो।* फैटी एसिड फूड, जैसे पेस्ट्री, क्रीम बिस्किट, केक, कुकीज आदि से बचना जरूरी है।* प्रिजर्वेटिव फू ड जैसे सॉस, पैक्ड फूड और जूस से दूर रहो।

    * कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के बजाय ताजे फलों का जूस या लस्सी स्वादिष्ट भी होंगे और सेहतमंद भी।

    * मिक्स फ्रूट चाट या मिक्स वेजटेबल जूस लो। इनमें पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।

    घर से दूर हों तो क्या खाएं

    * टीनएजर्स ओनियन उत्तपम, पूरन पोली, इडली, स्टफ्ड परांठा या मिक्स्ड वेज खिचड़ी खा सकते हैं, ताकि पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन मिल सके।

    * टीनएजर आमतौर पर जंक फूड के क्रेजी होते हैं, लेकिन ऐसे फूड नुकसानदायक होते है। लेकिन कभी-कभी स्प्रिंग रोल्स, पिज्जा या पाव भाजी में से कोई एक चुन लेने में कोई बुराई नहीं। इनमें थोड़े पोषक तत्व होते हैं।

मीठा मक्का


  • प्रोटीन और विटामिनों से भरपूर मक्का जहाँ शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं यह बेहद सुपाच्य भी है। इसकी ख़ासियत यह है कि हर रूप में इसमें पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं। कच्चे और पके रूप में तो यह फ़ायदेमंद होता ही है। जब इसमें विद्यमान तेल निकाल लिया जाता है और यह सूखे रूप में रह जाता है तब भी इसके अवशिष्ट में वसा को छोड़कर शेष पोषक तत्व विटामिन, प्रोटीन इत्यादि विद्यमान रहते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास में मक्के का प्रयोग सहायक होता है।

  • ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि आज से दस हज़ार वर्षों पूर्व सर्वप्रथम, मैक्सिको में भारतीयों द्वारा ही इसकी उपज पैदा की गई थी। भारत में गेहूँ के बाद मक्के का उत्पादन सर्वाधिक होता है। अमेरिका इसका सर्वाधिक निर्यात करने वाला देश है।

  • मक्का विभिन्न रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। सर्दियों में मक्के के आटे से रोटी बनाई जाती है। पंजाब की मक्के की रोटी और सरसों का साग केवल उत्तर भारतीयों द्वारा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवासियों द्वारा शौक से खाया जाता है। बड़े-बड़े होटलों और रेस्तरां में यह सर्दियों की ख़ास डिश बन जाती है। मक्के के आटे में मूली या मेथी गूँधकर बनाई गई रोटी मक्खन और दही के साथ अत्यंत स्वादिष्ट लगती है। मक्के के आटे से पावरोटी, बिस्कुट तथा टोस्ट भी बनाए जाते हैं।

  • कच्चे मक्के को सुखाकर उसे दरदरा पीसकर दलिया बनाया जाता है। यह दलिया दूध में पकाकर खाने से सुस्वादु होने के साथ पौष्टिक भी होता है।

  • बरसात के मौसम में भूना हुआ भुट्टा छोटे-बड़े सभी के मन को भाता है। लोग भुट्टे के अलावा पॉपकार्न, भुने हुए मकई के पक्के दाने के भी दीवाने होते हैं, जो साधारण से भड़भूजे से लेकर बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा बेचे जाते हैं। पका भुट्टा उबालकर इमली की चटनी के साथ खाने में अत्यंत स्वादिष्ट लगता है। मक्के का गरम-गरम सूप पीना हर मौसम में स्वास्थ्यवर्धक होता है और स्वीट कार्न सूप का तो जवाब नहीं!

  • मक्का शर्बत, मुरब्बा मिठाइयों और बनावटी मक्खन बनाने में प्रयुक्त होता है और इसके रेशे मिट्टी के बर्तन, दवाइयाँ, रंगरोगन, काग़ज़ की चीज़ें और कपड़े बनाने के काम आते हैं। पशुओं के लिए खली के रूप में भी यह प्रयुक्त होता है। हृदयरोग विशेषज्ञ मक्के के तेल को खाद्य-पदार्थों में प्रयुक्त करने की सलाह देते हैं। एक किस्म की शराब और बीयर बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

  • मक्के में विटामिन 'ए', 'बी-२', 'ई' फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, आग्जैनिक आम्ल, नारसिन, फैट और प्रोटीन पाया जाता है।

  • यह पेट के अल्सर और गैस्ट्रिक अल्सर के छुटकारा दिलाने में सहायक है साथ ही यह वज़न घटाने में भी सहायक होता है। कमज़ोरी में यह बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है और बच्चों के सूखे के रोग में अत्यंत फायदेमंद है। यह मूत्र प्रणाली पर नियंत्रण रखता है, दाँत मजबूत रखता है और कार्नफ्लेक्स के रूप में लेने से हृदयरोग में भी लाभदायक होता है।

  • भुट्टा या मक्का पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाने में सहायक है।

सेहत सदाबहार

कोई भी शख्स बढ़ती उम्र के बावजूद स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त रहकर अपनी जिंदगी जीने के सालों को बढ़ाकर सार्थक जीवन जी सकता है। आइए जानते हैं यह कैसे सभव है..

कारण क्या हैं  ..

उम्र बढ़ने के कारण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण की सख्या कम होती जाती है। कोशिकाओं के क्षीण होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस कारण हमारी शारीरिक-मानसिक शक्ति कमजोर होने लगती है, त्वचा ढीली पड़ने लगती है, याददाश्त कम होने लगती है। इसके साथ ही हृदय की धमनियों में कड़ापन आने के कारण हृदय रोग और स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है। वहींशरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण व्यक्ति कई रोगों से ग्रस्त हो जाता है।

बदल सकती है यह तस्वीर :

अगर आप जीवन में समुचित खान-पान व व्यायाम और सात-आठ घटे की नींद लेते हैं, तो बढ़ती उम्र या उम्रदराज होने के बावजूद आप सक्रिय व स्वस्थ रहेंगे। बेहतर हो कि इस स्वास्थ्यकर जीवन-शैली पर अमल बाल्यावस्था से ही किया जाना चाहिए। 'सुपर फूड्स' पर दें ध्यान रोगों से बचाव,अच्छी याददाश्त, सुंदर त्वचा और मजबूत हड्डियों का राज आपके फ्रिज में या घर में रखी जाने वाली सब्जियों व फलों में छिपा है। आपके खानपान में जितने अधिक रंगीन खाद्य पदार्र्थो का समावेश होगा, उतनी ही मात्रा में आपके शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स की प्राप्ति होती है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्र्थो को 'सुपर फूड्स' कहा जाता है।

रीतिका समद्दार, डाइटीशियन, मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली रंगीन को करे शामिल जब आप सुपर फूड्स के बारे में सोच रहे हों, तब अपने दिमाग में रंगों के बारे में भी सोचें। जैसे चटख नीला, बैंगनी, लाल, हरा या नारंगी आदि। इन रंगीन फलों व सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपका हृदय व कैंसर रोगों से बचाव करने के अलावा उम्र बढ़ने (एजिंग) की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं।

चटख हरा: हरी प8ेदार सब्जिया और ब्रोकोली आदि। लाल : लाल टमाटर आदि।

नारंगी/ पीला: पपीता, आम, गाजर और रैस्पबैरीज आदि।

चटख नीला/बैंगनी : बैंगन, प्लम, ब्लूबेरी, स्ट्राबेरी और चेरी आदि।

पर्याप्त पानी शारीरिक श्रम और मौसम के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से नुकसानदेह पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और टिश्यूज सक्रिय रहते हैं।

महत्व फाइबर का खानपान में फाइबरयुक्त खाद्य पदार्र्थो जैसे सेब, जौ, बीन्स, मौसमी फल व सब्जिया, ओटमील, ब्राउन राइस आदि को ग्रहण करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर और शरीर में शुगर का स्तर नियत्रित रहता है। ये खाद्य पदार्थ वजन कम करने में भी सहायक हैं।

Thursday, November 1, 2012

स्ट्रेस रिलीफ फ़ूड

काम के बढ़ते बोझ और स्ट्रेस से आपका खानपान भी प्रभावित होता है। क्योंकि जब आप लंच, ब्रेकफस्ट या फिर डिनर मिस कर जाती हैं तो जंक फूड ले लेती हैं। जंक फूड, बेकरी फूड, कप केक्स और शुगरी चीजें कुछ देर आपको राहत तो जरूर देते हैं, लेकिन कमर का साइज भी बढ़ा देते हैं। ऐसे में स्ट्रेस बढ़ना जाहिर है। अगर आप स्ट्रेस से दूर और यंग दिखना चाहती है तो हेल्दी फूड ट्राई करें। डाइटीशियन शचि सोहल बता रही हैं ऐसे ही कुछ स्ट्रेस बस्टर फूड। इन्हें अपनाइए और स्ट्रेस को दूर भगाइए।

डार्क चॉकलेट :  हालांकि यह चॉकलेट हर कोई पसंद नहीं करता लेकिन यह स्ट्रेस दूर करने में मदद करती है। इसमें पाया जाने वाला फिनाइलेथाइलामाइन तत्व मस्तिष्क को आराम देता है। इसमें हाई फ्लेवेनॉल कंटेंट होने के कारण यह सौंदर्य बढ़ाता है और त्वचा को हाइड्रेट भी रखता है। लेकिन सीमित मात्रा में खाना ही फायदेमंद है। 20 ग्राम चॉकलेट में 150 कैलरी होती है। ओटमील : इसमें पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे हमारा शरीर सेरोटिन प्रोड्यूस करता है। सेरोटिन मूड अच्छा करने का काम करता है और मन को शांति और आराम का एहसास कराता है। इसमें मौजूद फाइबर स्लिम फिट रखते हैं। साथ ही बिना कैलरी बढ़ाए यह पेट भरने का काम करता है। केले के साथ इसे ब्रेकफस्ट में जरूर लें।

 चिकेन सूप :  एक शोध से पता चला है कि चिकेन हर प्रकार के स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। यह एंटीइन्फ्लामेटरी होता है, जो सांस संबंधी समस्या, घबराहट, तनाव और थकान को दूर करता है। वजन भी नियंत्रित रखता है। खाने से पहले चिकेन सूप लेने से आपके खाने से मिलने वाली कैलरी कम हो जाती है। इस तरह आपका वजन बढ़ने नहीं पाता।

सालमन :  हफ्ते में कुछ दिन सालमन खाने से मन शांत रहता है। इसमें मौजूद आमेगा 3 फैटी एसिड तनाव से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। यह त्वचा को नर्म-मुलायम बनाने में मदद करता है। इन्फ्लामेशन को दूर करता है। इस तरह त्वचा रूखी नहीं होने पाती।

ग्रीन टी :  इसमें थियानाइन एक प्रकार का अमीनो एसिड होता है जो शरीर और दिमाग दोनों को आराम देता है। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मेटाबॉलिज्म सिस्टम को दुरुस्त रखता है और त्वचा को धूप से होने वाले नुकसान से बचाता है। इसमें एक चम्मच शहद मिलाने से यह तरोताजा कर देती है।

अखरोट :  अगर गुस्सा और लड़ाई-झगड़े के मूड में हों, तो उस दौरान अखरोट खाने से आपका क्रोध भाग जाएगा। अखरोट में एल-आर्जिनाइन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्तवाहिनियों को रिलैक्स रखने में मदद करता है। रक्त संचार को बढ़ाता है और त्वचा के कोश में पोषक तत्वों को पहुंचाता है, जिससे वह लंबे समय तक युवा रहती है। अखरोट में ओमेगा 3 एस और ओमेगा फैट पाया जाता है जो त्वचा को कांतिमय व सुंदर बनाने के लिए बेहद जरूरी होता है।

दही :  एक कप सादा लो-फैट दही तकरीबन 450 मिली ग्राम कैल्शियम प्रदान करता है, जो महत्वपूर्ण ब्यूटी मिनरल्स का काम करता है। हड्डियों को मजबूत बनाता है। शोध से यह साबित हो चुका है कि अधिक कैल्शियम लेने से पीएमएस की आशंका कम हो जाती है। एक ग्लास लस्सी तनाव से तुरंत राहत देती है।

ब्ल्यूबेरी : अब जब भी आपका मन मीठा खाने का करे तो ब्ल्यूबेरी जरूर खाएं। इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा में कोलेजन को बरकरार रखते हैं। इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। यह आसानी से स्ट्रेस रिलीज करता है। तनाव और डिप्रेशन में इसे दही के साथ मिलाकर खाने से काफी राहत मिलती है।

10 चिल्ड्रेन के लिए उत्तम आहार युक्तियाँ

अपने किचन में आप जो कुछ भी पकाती हैं, उसका तरीका कितना सही और स्वास्थ्यवर्धक है? कुकिंग से जुड़े आपके हर तरह के संशय का समाधान ....

पास्ता, नूडल्स या मैकरॉनी :  बच्चों की पसंद की वजह से अकसर घरों में नाश्ते के समय इनका इस्तेमाल होता है। अच्छी सेहत के लिए मल्टीग्रेन या होल व्हीट पास्ता, नूडल्स या सूजी की मैकरॉनी का इस्तेमाल करें। बाजार में मिलने वाले सेमी कुक्ड नूडल्स का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनके जल्दी खराब होने का डर रहता है। ऐसे चीजें हमेशा घर में उबालें। अकसर लोग नूडल्स या पास्ता को थोड़ा कम उबालते हैं, ताकि ये देखने में सुंदर लगें, पर यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इन्हें उबालने का सही तरीका यह है कि पानी में एक टेबल स्पून रिफाइंड ऑयल, एक टीस्पून नमक और एक टीस्पून विनेगर डालकर इन्हें अच्छी तरह पकाएं और छलनी में छानकर ठंडे पानी से धो लें। इससे ये चीजें आपस में नहीं चिपकेंगी।
हेल्दी टिप :   इन चीजों की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इनमें ढेर सारी हरी सब्जिया मिलाएं। 
अंडा : यह प्रोटीन का बेहतर स्त्रोत है। इसे उबालकर खाना सबसे अच्छा रहता है। वैसे इसका वाटर पोच भी तैयार किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक गहरे बर्तन में पानी उबलने के लिए रखें। फिर एक नॉनस्टिक करछी के भीतरी हिस्से में जरा सा कुकिंग ऑयल लगाकर उसमें अंडा तोड़कर डालें, उसके ऊपर नमक और काली मिर्च पाउडर छिड़ककर, करछी को बर्तन में इस तरह रखें कि वह पानी में पूरी तरह न डूबे। पाच मिनट के बाद जब अंडा पक जाए तो इसे लो फैट क्रीम और टोस्ट के साथ सर्व करें।
  हेल्दी टिप :अंडे की जर्दी मे बहुत अधिक मात्रा में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है, जो हार्ट के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए ओवर वेट या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को केवल अंडे का सफेद हिस्सा ही खाना चाहिए।
पराठे :  इसके लिए हमेशा नर्म आटा गूंधें। चाहें तो उसमें एक टीस्पून रिफाइंड ऑयल का मोयन भी मिला सकती हैं। हरी सब्जियों का स्टफ्ड पराठा पूरे परिवार की सेहत के लिए अच्छा रहता है। इसके लिए आप मौसम के अनुकूल सब्जियों का चुनाव कर सकती हैं।
हेल्दी टिप :अगर बच्चे सब्जियों वाला स्टफ्ड पराठा नहीं खाते तो इस समस्या से बचने के लिए हरी सब्जियों को उबालकर पेस्ट बना लें और उसी से आटा गूंधकर पराठे बनाएं।
 स्प्राउट्स :  यह प्रोटीन और विटमिन सी का संतुलित मिश्रण है। आजकल बाजार में पैकेटबंद स्प्राउट्स भी मिलते हैं, पर सेहत की दृष्टि से इन्हें सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप घर में खुद स्प्राउट्स तैयार करें। इसके लिए 12 घटे तक चना, साबुत मूंग आदि भिगो दें। फिर उसका पानी निकाल कर किसी छलनी पर रखकर ढककर रख दें, अगले आठ घटे के बाद उसमें अंकुर निकल आएंगे। स्प्राउट्स उतनी ही मात्रा में तैयार करें कि 12 घटे में खत्म हो जाए। कच्चा अंकुरित अनाज खाने से कुछ लोगों को गैस की समस्या हो जाती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि स्प्राउट्स को हलका स्टीम करके खाया जाए।
हेल्दी टिप :अगर आपको डायबिटीज है तो स्प्राउट्स के लिए चना या मूंग भिगोते समय आप उसी में मुट्ठी भर मेथी के दाने भी मिला दें। इससे आपका शुगर लेवल नियंत्रित रहेगा।
रोटी :  अगर आप पैकेटबंद आटा खरीदती हैं तो उसके पैकेट पर लिखा विवरण ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें चोकर की मात्रा कम है तो आटे में चोकर, सोयाबीन, बाजरे या चने का आटा स्वादानुसार मिलाएं। आटा गूंधने के बाद उसे दस मिनट तक ढककर रखें, इससे रोटिया नर्म और फूली-फूली बनेंगी। अगर घर में लोगों को मिश्रित आटे का स्वाद पसंद नहीं आता तो सप्ताह में एक दिन आटे में बेसन, प्याज, हरा धनिया, नमक और अजवाइन मिलाकर मिस्सी रोटी बना लें।
 हेल्दी टिप :रोटी बनाने के लिए हमेशा चोकरयुक्त आटे का इस्तेमाल करें। इससे पाचनतंत्र दुरुस्त रहेगा।
चावल :चावल के बारे में लोगों में बहुत भ्रम है कि उबालकर पानी निकाल देने से उसका सारा स्टार्च निकल जाता है। ऐसा करने से चावल का सिर्फ एक या दो प्रतिशत स्टार्च निकल पाता है। इसलिए यह आपकी पसंद पर निर्भर है कि आपको चावल कैसे पकाना है? चावल खाते समय केवल यह ध्यान रखें कि इसके साथ हरी सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें। क्योंकि सब्जियों में पाया जाने वाला फाइबर चावल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च को आसानी से पचाने में सहायक होता है।
 हेल्दी टिप : ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
 इडली :  आमतौर पर स्त्रिया समय बचाने के लिए बाजार में बिकने वाली इंस्टैंट इडली मिक्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इसमें मौजूद प्रिजर्वेटिव सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं। इसलिए इडली हमेशा घर में ही बनाएं। अगर आपके पास समय कम हो तो सूजी में दही या ईनो पाउडर मिलाकर आप घर में ही इंस्टैंट इडली तैयार कर सकती हैं। अगर आप कैलरी कॉन्शस हैं तो आपके लिए राइस के बजाय रवा इडली ज्यादा अच्छी रहेगी।
 हेल्दी टिप :अकसर लोग साबर के बजाय नारियल की चटनी के साथ इडली खाते हैं, पर चटनी में साबर की तुलना में ज्यादा कैलरी होती है। इसलिए इडली के साथ साबर जरूर बनाएं।
सब्जिया और फल : हमें सिर्फ मौसम में मिलने वाली सब्जिया ही खानी चाहिए। जहा तक संभव हो सब्जिया और फल छिलके सहित खाने की कोशिश करें, क्योंकि इनमें मौजूद फाइबर कब्ज दूर करने में सहायक होता है। हालाकि आजकल सब्जियों पर कई तरह की हानिकारक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव होता है। इसलिए काटने से पहले उन्हें गर्म पानी में पाच मिनट तक डुबोकर अच्छी तरह धो लें, क्योंकि सब्जिया काटकर धोने से उनमें मौजूद विटमिंस नष्ट हो जाते हैं। हरी सब्जियों को बहुत ज्यादा देर तक न पकाएं।
हेल्दी टिप : सब्जियों और फलों के रंगों में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसलिए हमेशा अपने भोजन में हर रंग की सब्जियों और फलों को शामिल करने की कोशिश करें।
दालें : हर तरह की दाल में मौजूद सभी पौष्टिक तत्व आपको समान रूप से मिल सकें, इसके लिए आप रोजाना अलग तरह की दालों का इस्तेमाल करें या चना, मूंग, उड़द और मसूर की दालों को समान मात्रा में मिलाकर मिश्रित दाल भी तैयार कर सकती हैं। छौंक लगाते समय सीमित मात्रा में देसी घी का इस्तेमाल करें। दालों में मौजूद प्रोटीन की वजह से कुछ लोगों को इनके सेवन के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है। अगर ऐसी समस्या हो तो डिनर के बजाय लंच में साथ दाल का सेवन करें।
 हेल्दी टिप : छिलके वाली दालों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए धुली दालों के बजाय छिलके वाली दालें जैसे-काली मसूर, काली उड़द और हरी मूंग की दाल का सेवन करें।
 सैलेड :   सैलेड बनाने के लिए खीरा, ककड़ी, टमाटर, गाजर, मूली, प्याज, बंदगोभी और लेट्यूस के पत्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं। कुछ स्त्रिया समय बचाने के लिए खाना तैयार होने से पहले ही सैलेड काटकर रख देती हैं, इससे सैलेड का स्वाद और पौष्टिक तत्व दोनों नष्ट हो जाते हैं। इसलिए टेबल पर खाना लगाने के दस मिनट पहले सैलेड तैयार करें। सैलेड काटने से तुरंत पहले सब्जिया फ्रिज से निकालें। इससे सैलेड क्रिस्पी बनेगा और उसे काटना भी आसान होगा। ड्रेसिंग के लिए ऑलिव ऑयल या व्हाइट क्रीम के बजाय नींबू, ऑरिगेनो, बेसिल और हंग कर्ड जैसी चीजों का इस्तेमाल करें क्योंकि ऑलिव ऑयल और व्हाइट क्रीम में कैलरी ज्यादा होती है। अकसर एक प्लेट सैलेड में चार-पाच लोग शेयर करते हैं, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होता। घर में हर व्यक्ति के लिए अलग से एक बोल सैलेड की सर्विंग होनी चाहिए।
 हेल्दी टिप :सैलेड हमेशा मेनकोर्स से पहले लेना चाहिए। इसमें मौजूद फाइबर बढ़ते वजन को नियंत्रित रखता है।

 

 

 

 

 

 

Monday, October 29, 2012

आहार और पोषण के देखभाल


  • वजन कम करने के लिए सबसे पहले अपने खाने में नमक और शक्कर की मात्रा तुरंत घटा दें . नमक में सोडियम होता है , जो शरीर में वाटर रेतेशन को बढ़ता है और शक्कर से शरीर में भरी मात्रा में फैट जमा होता है .

  • अमेरिकन नॅशनल वेट कंट्रोल राजस्त्री के अनुसार , लंबे समय तक पतले रहने या वजन को नियंत्रण में रखने के लिए ब्रेकफास्ट याने सुबह का नाश्ता बहुत जरूरी है . ऐसा देखा गया     है की जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते उनका वजन ब्रेकफास्ट करनेवालों से ज्यादा होता है . सुबह का हेल्दी  ब्रेकफास्ट आपके शुगर लेवल व हारमोंस को कंट्रोल में रखता है  और मेटाबालिज्म को भी बढ़ता है ,जो कैलोरीज बर्न करने में आपकी मदद करता है .

  • अपने डाईट में कैल्शियम की मात्रा बढाएं . दिन में तीन बार कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स लेने से आपका शरीर वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज कर देता है । इसके अलावा यह आपकी हड्डियों को मजबूत बनाता है व आस्त्रियोपोरोसिस से भी बचाता है .

  • खाना खाने के आधा घंटा पहले एक सेब खाने से आप खाने में 187 कैलोरीज कम खाते है . आप जितनी कम करने में आपको उतनी ही आसानी होगी .

  • प्रोसेस्ड फूड से जितनी ज्यादा हो , दूर ही रहे . इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में शक्कर होता है , जिसके कारण फैट बनाता है . इसकी बजाय आप खाने में फल , सब्जियां , साबूत , अनाज , मछली और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स ले सकते है .

  • नाश्ते में विटामिन से भरपूर तरबूज लें और उसके बाद प्रोटीनयुक्त अंडे खाएं . प्रोटीन और विटामिनयुक्त ये पदार्थ आपके स्लिमिंग प्रोग्राम के लिए परफेक्ट है .

  • दही खाने से भी आप अपना वजन कम कर सकते है .दही में भरपूर प्रोटीन , कैल्शियम ,आयरन, लैक्टोज , फास्फोरस आदि कई तत्व होते है .

  • शारीरिक प्रक्रिया को सुचारू ढंग से चलाने के लिए शरीर को अच्छे फैट की बहुत जरूरत होती है , इसलिए आप रेग्युलर चीज की बजाय लो फैट चीज को अपने डायट में शामिल करें इसमें बाकी चीज के मुकाबलें कम कैलोरीज होती है .

  • जिम ट्रेनिंग से दो घंटे पहले एक बौल मूसली खाने से ट्रेनिंग के दोरान आप ज्यादा तेजी से फैट बर्न करते है . मूसली स्लो डाइजेस्तिंग कार्बोहायड्रेट है , जो शरीर में कम फैट बनाता है . इसमें एनर्जी भी काफी बढ़ती है .

  • द्रैफ्रूट्स में जरूरी फाइबर , प्रोटीन और फैट होता है .इससे पेट तो भरता ही है ,साथ ही आपको भूख लगे , तब कोई स्नैक्स खाने की बजाय  ड्राइफ्रूट्स खाएं .

  • फ्रूट जूस लेने की बजाय फल खाएं , क्योंकी फ्रूट जूस में अधिक मात्रा में शक्कर होती है , जिससे आपका वजन बढ़ सकता है , जबकि फल खाने से वजन घटता है .

शादी होने वाले लड़कियों केलिए डाईट प्लान

फिट रहना हर किसी के लिए जरूरी है । लेकिन होने वाली दुल्हन के लिए अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देने अनिवार्य है ।दौड़भाग , शादी की तैयारियां और तनाव के चलते डाईट पर कंट्रोल करना मुश्किल होता है ।यहाँ फोत्रिस हास्पिटल की चीफ दाइटीशियन किरण दलाल और क्लिनिकल न्यूत्रीशानिस्ट निधि सरीन बता रही है ,भावी दुल्हन अपनी डाईट का प्लान कैसे करें की वजन नियंत्रित रहे ।

आमतौर पर लड़कियों का वजन शादी से पहले तीन कारण से बढ़ता है - भागदौड तनाव और लगातार पार्टी ।इसी तरह शादी के बाद वजन बढ़ने के तीन मुख्य कारण है - प्रेगनेंसी , शादी के बाद परिवार , घर और एनी जिम्मेदारयों में इतना व्यस्त हो जाना की खानपान पर ध्यान न दे पाना , अपने पाती के साथ उनकी तरह ही पोर्शन लेना , जाने -अनजाने वे एक्स्ट्रा कैलरी ले लेती है । एक बार फैट शरीर पर चढ़ने लगता है तो उसे रोकना काफी मुश्किल होता । बेहतर होगा अगर पहले से ही खान पान की कुछ आदतों पर अमल किया जाए और डाईट प्लान बनाया जाए ।तो अगर आप शादी से पहले और बाद में अतिरिक्त वजन को हटाना चाहिती है तो यहाँ दी गई बातों पर गौर फरमाएं ।

शादी से पहले :

  • अपने दिन की शुरूआत नींबू मिले गर्म पानी से करें । इसमें क्रश किए हुए पुदीने के पत्ते भी मिला सकती है ।

  • जब भूख लगे सूप या जूस पाई ।

  • अगर आप कैलरी में कटौती करना चाहती है तो सबसे पहले चीनी , आईसक्रीम , केक , पस्ती और प्रोसेस्ड फूड को अपने आहार से हटाएं ।

  • रोजाना के हिसाब से अपना लक्ष्य बनाएं । प्रतिदिन आपको 1 ,600 कैलरी मिलनी चाहिए , लेकिन इससे कम करने की कोशिश करें । यह ध्यान रखे की दिनभर में आपको कम तीन मील्सऔर दो स्नैक्स मसलन फल या रोस्टेड नट्स या फिर स्टीम्ड फर्मेंटेड फूड लेने है ।

  • दिन की शुरूआत के लिए ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी है । इसमें मीठे से बचे । लो फैट मिल्क प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें । 1-2 सर्विंग मल्तीग्रेन सीरियल , स्प्राउट्स या बींस और कटे हुए फल लें ।इससे आपको ब्रेकफास्ट से लगभग 300 कैलरी मिलेगी ।बाकी कैलरी आपको लंच और डिनर से मिलनी चाहिए ।

  • लंच / डिनर में होल्ग्रेन सीरियल , दालों या ग्रिल्ड फिश या चिकेन के एक तुकडे के साथ लो फैट प्रोबयूटिक दही , सैलेड और एक बोल स्टीम्ड रंगीन सब्जियां ले ।

  • शादी से एक महीने पहले अचानक 5 किलो वजन घटाना भी ठीक नहीं है । अगर एसा चाहिती है तो इसके लिए आपको शादी से छह महीने पहले अपने आहार पर ध्यान देना होगा । इसका सीधा असर आपके बाल और त्वचा पर पडेगा ।

  • अच्छी त्वचा के लिए गाजर , एप्रिकांट , पीले और नारंगी रंग के फल व सब्जियां खाएं ।पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों को प्राथमिकता दें । टमाटर खाएं , उसमें लाइकोपीन पाया जाता है ।

  • अखरोट खाएं । इसमें ओमेगा फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है , जो बालों को चमकदार और त्वचा को बेहतर बनाता है ।

  • दिनभर में 4 - 5 कप ग्रीन टी पिएँ ।

  • इस दौरान एल्कोहाल व धूमपान से दूर रहे ।

  • सैलेड , सूप और फलों का सेवन करने से फैटी एसिड मिलेगा , जिससे आपको एनर्जी भी मिलेगी ।

  • त्वचा में पानी की कमी न होने दें । दिनभर में पर्याप्त पेय पदार्थ , जूस , सूप , पानी खूब पिए ।


शादी के बाद :

  • जो कुछ भी खाएं धीरे - धीरे और खुश होकर खाएं । टीवी के सामने या बात करते हुए न खाएं । धीमी गाति से खाने से आपको से आपको जल्दी ही पेट भरा हुआ महसूस होगा ।

  • ब्रेकफास्ट एकसाथ करें । जिसमे एक बोल फ्रूट्स म्यूजली या फिर ओटमील हो ।

  • लंच में हरी सब्जियों वाला सूप जरूर ले । नान वेजिटेरियन है तो प्रान्स को प्राथमिकता दें ।

  • लंच में हरी सब्जियों वाला सूप जरूर लें । नान वेजिटेरियन है तो प्रान्स को प्राथमिकता दें ।

  • उस समय कतई न खाएं जब आप तनाव या गुस्से में हो

  • ब्लैक काफी , जंक फुड , चाय से जहां तक हो सके दूर रहें । रिफैंड प्रोडक्ट से बचे ।

  • पार्टनर के साथ एक्स्र्सैज जरूर करें । फिजिकल एक्टिविटी बढाने से दिल की सेहत अच्छी रहती है ।

  • कोलेस्ट्राल और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है । डिनर के बाद रोजाना एक घंटा टहलने का लक्ष्य बनाएं .

  • एक - दूसरे के पोर्शन को मैच न करें , क्योंकी पुरुषों को दिनभर में अलग कैलरी और स्त्रियों को भिन्न कैलरी की जरूरत होती है |

  • जो भी खाएं पौष्टिक हो , लेकिन खाने की मात्रा हमेशा ध्यान में रखे ।

  • सब कुछ खाएं , लेकिन सीमित मात्रा में ताकि आप फिट और स्वस्थ रहे । संतुलित डाईट लें । खाने पर नियंत्रण का यह मतलब नहीं की आप एक्सरसाइज करना छोड़ दें ।साथ - साथ वह भी जरूरी है ।