बेरियैट्रिक सर्जरी अब मधुमेह की तरह ही बांझपन का भी प्रभावी इलाज साबित हो रहा है। 2 साल पहले जिन्होंने मां बनने के लिए यह सर्जरी कराई थी, वे अब गर्भवती हो रही हैं। हम सर्जरी के बाद 2 साल रुकने की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि सर्जरी के बाद मां के शरीर में बी कॉम्प्लेक्स की थोड़ी कमी हो जाती है। पेट में आने वाले बच्चे के विकास में कोई कमी न रह जाए, इसलिए एहतियात के तौर पर 2 साल इंतजार करने की सलाह देते हैं।
मोटापा महिलाओं के मां बनने के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा खड़ी कर रहा है। मोटी महिलाएं पहले तो बड़ी मुश्किल से गर्भवती हो पाती हैं। गर्भ ठहर भी गया तो कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि गर्भ धारण करने के बाद भी चर्बी न चढ़ जाए। मोटापा गर्भवती की जान भी ले सकता है। पेट में पल रहे बच्चे को भी हानि पहुंचाता है।
मैक्रोसोमा नामक एक स्थिति होती है जिसमें पेट में पल रहा बच्चा ही काफी मोटा हो जाता है। एक ताजा स्टडी में यह भी पाया गया है कि मोटी महिलाओं से जन्म लेने वाले 29 प्रतिशत बच्चे 4 साल की उम्र होते-होते मोटे हो जाते हैं।
शोध अध्ययनों से यह बात साफ हो गई है कि 70 प्रतिशत से अधिक मोटी महिलाओं को गर्भ धारण करने में समस्या पैदा होती है। महिलाओं में मोटापा उन्हें बांझपन की राह पर धकेल रहा है। कई शोधों से यह बात सामने आई है कि मोटापा गर्भ धारण करने के रास्ते में बड़ा अड़चन बन रहा है।