Showing posts with label tips for eye weakness in hindi. Show all posts
Showing posts with label tips for eye weakness in hindi. Show all posts

Tuesday, November 6, 2012

व्यस्त लोगों के लिए फिटनेस टिप्स

हमारी व्यस्तता उलझाव के इस स्तर तक बढ़ती जा रही है कि हमारे जीवन में संतुलन व संयम नहीं रह गया है। हमारे पास स्वयं अपने लिए ही समय नहीं रह गया है। यही कारण है कि हमारा शरीर असमय ही रोगों का भंडार और मन तनाव तथा अशांति का घर बनता जा रहा है।

हमारी यह यांत्रिक तथा अप्राकृतिक जीवन शैली ने आज नए-नए मनोकारिक रोगों को जन्म दिया है, जिनका आधुनिक चिकित्सा पद्धति के पास कोई स्थायी समाधान नहीं है। योग इसका सबसे बेहतर समाधान प्रस्तुत करता है। इसकी सरल-सहज क्रियाएं ऐसी है जिन्हे आप उठते-बैठते, चलते-फिरते, हर कार्य करते हुए भी कर सकते हैं। यहां हम व्यस्त दिनचर्या वाले व्यक्ति हेतु योग की ऐसी ही क्रियाओं का उल्लेख कर रहे हैं जिनका अभ्यास कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है।

आसन :  कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा करके बैठें। कुर्सी का ढांचा ऐसा होना चाहिए कि रीढ़ के पीछे किसी और चीज का सहारा न लेना पड़े। यदि कुर्सी पर लगातार ज्यादा देर तक बैठे रहने की आवश्यकता पड़ती हो तो प्रत्येक घंटे बाद दो-तीन मिनट के लिए उठ कर खड़े हो जाना चाहिए और दोनों हाथ की अंगुलियों को आपस में गूंथकर सिर के ऊपर ले जाकर तानना चाहिए। साथ में एड़ी भी ऊपर उठाएं। यह क्रिया दस बार दुहराएं। ऐसा करने से व्यक्ति आज की बहुचर्चित बीमारियों स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क और पीठ दर्द, आदि से बचा रह सकता है। यदि हम अपनी कुर्सी का ढांचा इस प्रकार बना लें कि उस पर पैर मोड़कर पद्मासन या सिद्धासन में बैठ सकें तो पेट बाहर निकलने, सायटिका, कमर दर्द, वेरीकोज वेन्स, मोटापा, थकान आने तथा पेट के कई और रोगों से भी बचा जा सकता है।

अगर आपको देर तक कंप्यूटर पर कार्य करना पड़ता हो तो आंखों की कमजोरी बढ़ जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए त्राटक क्रिया करे। कंप्यूटर पर ही कोई बिंदु लगभग एक से दो मिनट तक अपलक देखना चाहिए। यह समय को धीरे-धीरे बढ़ाते जाना चाहिए। साथ में उत्थित पद्मासन करने से हाथ की हथेलियों एवं उंगलियों की समस्या दूर हो जाती है।

सूक्ष्म व्यायाम:  यदि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस न हो तो गर्दन को दस बार घड़ी की सुई की दिशा में और इतनी ही बार विपरीत दिशा में घुमाएं। कंधे को भी दस-दस बार दोनों दिशाओं में घुमाएं। कभी-कभी तितली आसन का अभ्यास करें। कुर्सी पर बैठे ही बैठे टखनों को दोनों दिशाओं में घुमाएं।

श्वास क्रिया :  व्यस्त दिनचर्या वाले लोगों को श्वास-प्रश्वास गहरी करने का प्रयास करना चाहिए। यदि यह क्रिया कार्य को करते हुए करने का अभ्यास कर लिया जाए तो शारीरिक समस्याओं से शत-प्रतिशत बचा जा सकता है तथा मन को भी स्थिर करने में मदद मिलती है। यदि वह क्रिया न कर सकें तो प्रत्येक घंटे बाद दो-दो मिनट के लिए श्वसन क्रिया गहरी करे। साथ में यदि 5 से 10 मिनट के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास कर लिया जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।

ध्यान :  चिंता, फिक्र, निराशा, तनाव तथा अवसाद से आज हम सब पीड़ित हैं और ये समस्याएं हमारे आचार-विचार तथा व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव तो डालती ही हैं, कई तरह के रोगों को भी जन्म देती हैं। ध्यान एवं शिथिलीकरण के अभ्यास से इसका समाधान हो सकता है। यह क्रिया कुर्सी पर बैठकर आंख को ढीली बंद कर चेहरे को ढीला करके करनी चाहिए। तत्पश्चात् रीढ़, गला व सिर को सीधा कर पांच बार गहरी श्वास लीजिए। अब अपने मन को स्वाभाविक श्वास-प्रश्वास पर एकाग्र कीजिए। विचारों को बिल्कुल न रोकें। हां, उनकी उपेक्षा करते जाएं। कुछ देर ऐसा करते रहे। इससे मन, शांत, एकाग्र तथा विचारों से मुक्त हो जाता है। इसके अलावा चलते-फिरते ध्यान का मतलब है अपने हर कार्य को संपादित करते समय उस कार्य पर विशेष ध्यान रखें, जो कार्य आप कर रहे है। यह मन की एकाग्रता बढ़ाने में भी मददगार होता है।