Showing posts with label स्वास्थ्य सुझावों. Show all posts
Showing posts with label स्वास्थ्य सुझावों. Show all posts

Wednesday, January 2, 2013

जूस के बजाए ताजा फल - सब्जियों का सेवन अधिक फायदेमंद है

अगर आप फल - सब्जियों के डिब्बाबंद जूस का सेवन करते है तो सावधान हो जाइए क्योंकि आहार विशेषग्णों   का कहना है की बाजार में तरह - तरह के आकर्षक पैक्स में मिलने वाले जूस के इन पैक पर प्रोटीन , विटमिन , इत्यादि की जो मात्रा लिखी होती है ,कई बार वह सही नहीं दर्शाई जाती । ऐसे डिब्बाबंद जूस को कंपनियां बढ़ा - चाढ़कर इसके फायदे बताते हुए प्रायः ग्राहकों को  गुमराह करती है , इसलिए बेह्तार यही है की आप इस तरह के पैक्ड जूस के बजाय ताजा - फल सब्जियों का ही सेवन करें ।

उपरोक्त तथ्य जापान के कंज्यूमर इन्फार्मेशन सेंटर द्दारा किए एक सर्वेक्षण में सामने आया है । सर्वेक्षण में बताया गया है की डिब्बाबंद जूस बेचने वाली कंपनिया इसे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायेदेमंद बताते हुए लंबे - चोडे दावे करती है जबकी ये दावे कई बार हकीकत से कोसों दूर होते है । जेसी आईसी  द्वारा कहा गया है की जूस बनाने वाली कुछ कंपिनियाँ तो अपने पैक पर इस तरह की तिप्पिनीयां भी छाप देती है की उनके जूस के पैक में पूरे एक दिन में खाई जाने वाली सब्जियों की संतुलित मात्रा के बराबर विटमिन मोजूद है ।

vegitables

जेसी आईसी ने 14 ऐसी कंपनियों के उत्पादों की जांच की , जिन में से 10 कंपनियां जूस बनाने वाली थी जबकि 4 कंपनियां विटमिन के कैप्सूल व पाउडर बनाने वाली थी और इस जांच के दोरान बेहद चोकाने वाला तथ्य सामने आया ।

जांच के दोरान जेसी आईसी ने पाया की इनमे से किसी भी कंपनी के प्रोडक्ट में विटमिन सी , आयरन व अन्य पोषक तत्वों की उतनी मात्रा नहीं पाई गई , जितनी उन पर लिखी हुई थी । इस जांच के इन हैरत अंगेज नतीजों को देखकर अब डाक्टर भी मरीजों को डिब्बाबंद जूस का सेवन करने के बजाय ताजा - फल - सब्जियां का गूदा बेकार चला जाता है , जिस में काफी मात्रा में जरूरी पोषक तत्व होते है और इस तरह वे भी गूदे के साथ बेकार चला जाता है ,जिसमे काफी कम रह जाती है लेकिन यदि आप फिर भी जूस पीना चाहते है तो डिब्बाबंद जूस के मुकाबले आपके लिए कही ज्यादा फायदेमंद रहेगा ।

Tuesday, January 1, 2013

डाइनिंग टेबल की शान है खीरा

खीरे को आदमी जितना जानता है , इसका महत्व उससे काफी अधिक है । खीरा एक फल भी है और सलाद भी । इसे छिलके सहित खाना अधिक पोष्टिकता देता है । खीरा छीलकर खाने से इसकी काफी शक्ति का हास हो जाता है । सभी खीरे कडवे नहीं होते । मामूली कड़वापन होभी सकता है । यदि खीरे का कडवापन झेल लें , तो यह खून को साफ करता है । काटकर , घिसकर खीरे की कडवाहट दूर करने से खीरे की कडवाहट तो खत्म हो जाती है।

किन्तु इससे इसकी शक्ति का हास होता है , ताकत कम हो जाती है । कुछ लोग खीरे के कड़वेपन को दूर करने के लिए खीरे  के ऊपर सिरे को काटकर घिसने को  ' जहर निकालना ' कहते है । वास्तव में यह कोई जहर नहीं । इसलिए इसे जहर कहकर खीरे का अपमान न करें । आइए डाले खीरे के कुछ ख़ास गुणों पर एक नजर :

  • खीरे की तासीर ठंडी होती है। यही कारण हैकि लू ,गर्मी ,तापिश कम करने के लिए खीरे का सेवन हर कोई बड़े चाव से करता है ।

  • खीरा कब्ज को दूर कर पेट को साफ करता है । अतः इसका नियमित सेवन करना चाहिए ।

  • पेट में ,छाती में अथवा शरीर में कही भी गर्मी की जलन हो तो खीरा खाने से जलन शांत हो जाती है ।

  • खीरा पचने में हल्का होता है । अतः इसे बच्चे और वृद्द दोनों ही सुगमता से खा और पचा सकते है ।

  • खीरा डाइनिंग टेबले की शान है । ओषधीय गुणों की भी कोई कभी नहीं इसमें । खीरे का रस निकालकर नींबू , काली मिर्च , काला नमक डालकर खाते रहने से डायबिटीज के रोग में बहुत फ़ायदा होता है ।

  • खीरा आँखों के आस -पास की कालिमा हटाने का भी काम करता है । दो - तीन चम्मच खीरे का रस लें । रूई के फाहे को इस रस में डुबोकर बंद आँखों पर रखें । इस रस को आँखों के आस - पास मलें । कालिमा तो हटेगी ही , आँखों की गर्मी भी ख़त्म होगी ।

  • पेट में वायु बनी रहना बहुत परेशानी पैदा करती है । खीरे का सेवन वायु को निष्कासित करता है वायु बनने से भी रोकता है ।

  • यदि शरीर में पत्ति बढ़कर दुखी कर रहा हो , तो भी खीरा खाने से राहत मिलती है ।

  • यदि घुटनों में दर्द रहता हो , तो खीरा तथा लहसुन नियमित खाएं । हर प्रकार के जोड़ों के दर्द दूर होगें और उठने - बैठने , चलने - फिरने में भी आसानी होगी ।

  • खीरे का रस पथरी को कम करने में भी मददगार रहता है । पथरी के रोग से बचने के लिए दिन में तीन बार आधा - आधा कप खीरे का रस काली मिर्च और काला नमक डालकर लें । लाभ होने लगेगा ।

  • खीरा खाना तथा खीरे का रस पीना पेशाब में होने वाली सारी जलन को कम करता है । ऐसा रोगी तो इसे जरूर सेवन करें ।

  • खीरे को बेतैर फल ,सलाद तथा ओषधि तीनों प्रकार से लें सकते है । गर्मियों में तो इसका पहले से अधिक उपयोग कर लाभान्वित हुआ जा सकती है ।


 

Saturday, December 1, 2012

एक आदर्श टानिक 'अंगूर '

अंगूर सारे भारत में आसानी से उपलब्ध फल है । इसमें विटामिन - सी तथा ग्लूकोज पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है । यह शरीर में खून की वृद्दि करता है । यही कारण है की डाक्टर अक्सर मरीजों को फलों में अंगूर खाने की सलाह देते है ।

अंगूर को संस्कृति में द्राक्षा , बंगला में बेदाना या मनेका , गुजराती में धाराख , फारसी में अंगूर , अरबी में एनवजबीब , इंग्लीश में ग्रेप रेजिन्स तथा लैटिन में वितिस्विनिफेरा कहते है ।

अंगूर के ओषधीय गुण

प्रत्येक 100 ग्राम अंगूर में लगभग 85 .5 ग्राम पानी , 10 .2 ग्राम कार्बोहैद्रेट्स ,0 .8 ग्राम प्रोटीन , 0 .1 ग्राम वसा , 0 .0 3 ग्राम कैल्शियम , 0 .0 2 ग्राम फास्फेरस , 0 .4 मिलीग्राम आयरन , 50 मिलीग्राम विटामिन - बी , 10 मिलीग्राम विटामिन-सी , 8 . 4 मिलीग्राम विटामिन - पी ,15 यूनिट विटामिन - ए, 100 से 600 मिलीग्राम टैनिन , 0 .4 1 - 0 . 7 2 ग्राम टार्टरिक आम्ल पाया जाता है ।

इसके अतिरिक्त सोडियम क्लोराइड , पोटेशियम क्लोराइड ,पोटाशियम सल्फेट ,मैग्नीशियम तथा एल्युमिन जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी इसमें भरपूर मात्रा मोजूद होते है । अंगूर में पाई जाने वाली शर्करा पूरी तरह से ग्लूकोज से बनी होती है , जो कुछ किस्मों में 11 से 12 प्रतिशत तक होती है और कुछ में 50 प्रतिशत । यह शर्करा पूरी तरह से ग्लूकोज से बनी होती है ,जो कुछ किस्मों में पहुंचकर एनर्जी प्रदान करती है । इसीलिए इसे हम एक आदर्श टानिक की तरह प्रयोग में लाते है।अंगूर का सेवन थकान को दूर कर शरीर को चुस्त - फुर्त व मजबूत बनाता है ।

healthy grapesसभी बीमारियों में फायदेमंद अंगूर

अंगूर में क्षारीय तत्व बढाने की अच्छी क्षमता के कारण ही शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता ,मोटापा ,जोड़ों का दर्द , रक्त का थक्का जमना , दमा , नाडी की समस्या व त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना अदि स्थितियों  में इसका सेवन लाभकारी होता है ।

अंगूर का सेवन आंत ,लीवर व पाचन संबंधी एनी रोगों ,मुह में कडवापन रहना ,खून की उल्टी होना ,गुर्दे की काय क्षमता में कमी ,कब्जियत , मूत्र की बीमारी अतिसार कृमी रोग ,टीबी आदि रोगों में विशेष रूप से  लाभकारी होता है ।

  •  यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है ।

  • अंगूर मियादी बुखार , मानसिक परेशानी , पाचन की गड़बड़ी आदि में भी काफी लाभकारी है ।

  • अंगूर में एक विशेष गुण यह भी है की यह शरीर में मोजूद विशेले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है । यह एक अछा रक्तशोधक व रक्त विकारों को दूर करने वाला फल है ।

  • अंगूर रक्त की क्षारीयता को संतुलित करता है क्योंकि रक्त में अम्ल व क्षार का अनुपात 20 . 80 होना चाहिए । यदि किसी कारनावश शरीर में अम्लता बढ़ जाए तो वह हानिकारक साबित होता है । अंगूर बढ़ती अम्लता को आसानी से कंट्रोल करता है ।

  • अंगूर का 200 ग्राम रस शरीर को उतनी ही क्षारीयता प्रदान करता है , जितना की एक किलो 200 ग्राम बाइकार्बोनेट सोडा , हालांकि सोडा इतनी अधिक मात्रा में लिया नहीं जा सकता ।

  • अंगूर के रस को कलई के बर्तन में पकाकर गाढा करके सोते समय आँखों में लगाने से जाला ,फूला आदि नेत्र रोग दूर हो जाते है ।

  • अंगूर की बेल काटने से जो रस निकलता है ,वह त्वचा रोगों में लाभकारी होता है ।

  • अंगूर के पत्तों का अर्क एक्से तीन चम्मच तक्लेनेपर व बवासीर के मस्सों पर लगाने पर काफी लाभ्मिलता है ।500  मिलीग्राम से एक ग्राम तक पत्तों की भास्म्शाहद से लेने से भी बवासीर में लाभ मिलता है ।

Saturday, November 17, 2012

हार्ट अटैक से बचने के दस उपाय


  1. अपने कोलेस्ट्रोल स्तर को 130 एमजी / डीएल तक रखिए :  कोलेस्ट्रोल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद है , जिनसे जितना अधिक हो , बचने की कोशिश करनी चाहिए । अगर आपको युक्त यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रोल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पडा सकता है ।

  2. अपना सारा भोजन बगैर तेल के बनाएं , लेकिन मसाले का प्रयोग बंद नहीं : मसाले हमें भोजन का स्वाद देते है , न की तेल का । हमारे ' जीरो आयल ' भोजन निर्माण विधि का प्रयोग करें और हजारों हजार जीरो आयल भोजन स्वाद के साथ समझोता किए बगैर तैयार करें । तेल ट्रिगलीराइडस होते है और रक्त स्तर 130 एमजी / डीएल के नीचे रखा जाना चाहिए ।

  3. अपने तनावों को लगभग 50 प्रतिशत तक कम करें :  इससे आपको ह्रदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी , क्योंकि मनोवेग्नानीक तनाव ह्रदय की बीमारियों की मुख्य वजह है । इससे आपको बेह्तार जीवन स्तर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी ।

  4. हमेशा ही रक्त दबाव को 120 / 80 एमएम एचजी के आस - पास रखे : बढ़ा हुआ रक्त दबाव विशेष रूप से 130 / 90 से ऊपर ब्लांकेज को दुगुनी  रफ्तार से बढ़ाएगा । तनाव में कमी , ध्यान , नमक में कमी तथा यहाँ तक की हल्की दवाएं लेकर भी एअक्त दबाव को कम करना चाहिए ।

  5. अपने वजन को सामान्य रखे :  आपका बाडी मॉस इंडेक्स 25 से नीचे रहना चाहिए । इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्केयर के साथ घटाकर कर सकते है । तेल नहीं खाकर एवं निम्न रेशो वाले अनाजों तथा उब किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते है ।

  6. नियमित रूप से आधे घंटे तक टहलना जरूरी :  टहलने की स्फ्तार इतनी होनी चाहिए , जिससे सीने में दर्द नहीं हो ओर हांफे भी नहीं । यह आपके अछे कोलेस्ट्रोल को बढाने में आपकी मदद कर सकता है ।

  7. 15 मिनट तक ध्यान और हलके योगा व्यायाम रोज करें :  यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा । आपको ह्रदय रोग को कम नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा ।

  8. भोजन में रेशे और एंटी आक्सीदेट्स : भोजन में अधिक सलाद , सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें । ये आपको भोजन में रेशे और एंटी आक्सीदेट्स के स्रोत है और एचडीएल  या गुड कोलेस्ट्रोल को बढाने में सहायक होते है ।

  9. अगर आप मधुमेह से पीड़ित है , तो शक्कर को नियंत्रित रखे : ब्लड शुगर 100 एमजी / डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140  एमजी / डीएल से नीचे होना चाहिए । व्यायाम , वजन में कमी , भोजन में अधिक  रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए अधुमेह को खतरनाक न बनने  दें । अगर आवश्यक हो , तो हल्की दवाओं के सेवन से फायदा पहुँच सकता है ।

  10. हार्ट अटैक से पूरी तरह बचाव :  हार्ट अटैक से बचने का सबसे आसान सन्देश है और हार्ट में अधिक रूकवाटे न होने दें । यदि आप इन्हें घटा सकते है , तो हार्ट अटैक कभी नहीं होगा ।


दिल के रोगों के लिए लाभकारी सब्जियां  :

हमारे भोजन में अनेक ऐसी सब्जिया है , जिन्हें प्रतिदिन प्रयोग करके हार्ट की सभी बीमारियों से बचा जा सकता है । ये है -

प्याज -  इसका प्रयोग सलाद के रूप में कर सकती है । इसके प्रयोग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है । कमजोर ह्रदय होने पर जिनको घबराहट होती है या ह्रदय की धड़कन बढ़ जाती है , उनके लिए प्याज बहुत ही लाभादारक है ।

टमाटर -  इसमें विटामिन सी , बीताकेरोटिन , लाइकोपीन , विटामिन एक व पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है , जिससे दिल की बीमारी का ख़तरा कम हो जाता है ।

लोकी -  इसे घिया भी कहते है । इसके प्रयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर सामान्य अवस्था में आना शुरू हो जाता है । ताजी लोकी का रस निकालकर पोदीना पत्ती - 4 व तुलसी के 2 पत्ते डालकर दिन में दो बार पीना चाहिए ।

लहसुन - भोजन में इसका प्रयोग करें । खाली पेट सुबह के समय दो कलियाँ पानी के साथ भी निगलने से फायदा मिलता है ।

गाजर -  बड़ी हुई धड़कन को कम करने के लिए गाजर बहुत ही लाभदायक है । गाजर का रस पिएँ , सब्जी खाए व सलाद के रूप में प्रयोग करें ।

 

 

Tuesday, November 6, 2012

व्यस्त लोगों के लिए फिटनेस टिप्स

हमारी व्यस्तता उलझाव के इस स्तर तक बढ़ती जा रही है कि हमारे जीवन में संतुलन व संयम नहीं रह गया है। हमारे पास स्वयं अपने लिए ही समय नहीं रह गया है। यही कारण है कि हमारा शरीर असमय ही रोगों का भंडार और मन तनाव तथा अशांति का घर बनता जा रहा है।

हमारी यह यांत्रिक तथा अप्राकृतिक जीवन शैली ने आज नए-नए मनोकारिक रोगों को जन्म दिया है, जिनका आधुनिक चिकित्सा पद्धति के पास कोई स्थायी समाधान नहीं है। योग इसका सबसे बेहतर समाधान प्रस्तुत करता है। इसकी सरल-सहज क्रियाएं ऐसी है जिन्हे आप उठते-बैठते, चलते-फिरते, हर कार्य करते हुए भी कर सकते हैं। यहां हम व्यस्त दिनचर्या वाले व्यक्ति हेतु योग की ऐसी ही क्रियाओं का उल्लेख कर रहे हैं जिनका अभ्यास कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है।

आसन :  कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा करके बैठें। कुर्सी का ढांचा ऐसा होना चाहिए कि रीढ़ के पीछे किसी और चीज का सहारा न लेना पड़े। यदि कुर्सी पर लगातार ज्यादा देर तक बैठे रहने की आवश्यकता पड़ती हो तो प्रत्येक घंटे बाद दो-तीन मिनट के लिए उठ कर खड़े हो जाना चाहिए और दोनों हाथ की अंगुलियों को आपस में गूंथकर सिर के ऊपर ले जाकर तानना चाहिए। साथ में एड़ी भी ऊपर उठाएं। यह क्रिया दस बार दुहराएं। ऐसा करने से व्यक्ति आज की बहुचर्चित बीमारियों स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क और पीठ दर्द, आदि से बचा रह सकता है। यदि हम अपनी कुर्सी का ढांचा इस प्रकार बना लें कि उस पर पैर मोड़कर पद्मासन या सिद्धासन में बैठ सकें तो पेट बाहर निकलने, सायटिका, कमर दर्द, वेरीकोज वेन्स, मोटापा, थकान आने तथा पेट के कई और रोगों से भी बचा जा सकता है।

अगर आपको देर तक कंप्यूटर पर कार्य करना पड़ता हो तो आंखों की कमजोरी बढ़ जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए त्राटक क्रिया करे। कंप्यूटर पर ही कोई बिंदु लगभग एक से दो मिनट तक अपलक देखना चाहिए। यह समय को धीरे-धीरे बढ़ाते जाना चाहिए। साथ में उत्थित पद्मासन करने से हाथ की हथेलियों एवं उंगलियों की समस्या दूर हो जाती है।

सूक्ष्म व्यायाम:  यदि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस न हो तो गर्दन को दस बार घड़ी की सुई की दिशा में और इतनी ही बार विपरीत दिशा में घुमाएं। कंधे को भी दस-दस बार दोनों दिशाओं में घुमाएं। कभी-कभी तितली आसन का अभ्यास करें। कुर्सी पर बैठे ही बैठे टखनों को दोनों दिशाओं में घुमाएं।

श्वास क्रिया :  व्यस्त दिनचर्या वाले लोगों को श्वास-प्रश्वास गहरी करने का प्रयास करना चाहिए। यदि यह क्रिया कार्य को करते हुए करने का अभ्यास कर लिया जाए तो शारीरिक समस्याओं से शत-प्रतिशत बचा जा सकता है तथा मन को भी स्थिर करने में मदद मिलती है। यदि वह क्रिया न कर सकें तो प्रत्येक घंटे बाद दो-दो मिनट के लिए श्वसन क्रिया गहरी करे। साथ में यदि 5 से 10 मिनट के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास कर लिया जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।

ध्यान :  चिंता, फिक्र, निराशा, तनाव तथा अवसाद से आज हम सब पीड़ित हैं और ये समस्याएं हमारे आचार-विचार तथा व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव तो डालती ही हैं, कई तरह के रोगों को भी जन्म देती हैं। ध्यान एवं शिथिलीकरण के अभ्यास से इसका समाधान हो सकता है। यह क्रिया कुर्सी पर बैठकर आंख को ढीली बंद कर चेहरे को ढीला करके करनी चाहिए। तत्पश्चात् रीढ़, गला व सिर को सीधा कर पांच बार गहरी श्वास लीजिए। अब अपने मन को स्वाभाविक श्वास-प्रश्वास पर एकाग्र कीजिए। विचारों को बिल्कुल न रोकें। हां, उनकी उपेक्षा करते जाएं। कुछ देर ऐसा करते रहे। इससे मन, शांत, एकाग्र तथा विचारों से मुक्त हो जाता है। इसके अलावा चलते-फिरते ध्यान का मतलब है अपने हर कार्य को संपादित करते समय उस कार्य पर विशेष ध्यान रखें, जो कार्य आप कर रहे है। यह मन की एकाग्रता बढ़ाने में भी मददगार होता है।

Monday, November 5, 2012

खाद्य मौसम के अनुसार

एक ही खाने पर दो पीढि़यों की राय में धुर विरोधी अंतर ठीक वही है जो तासीर को लेकर आयुर्वेद व एलोपैथी में है। पारंपरिक रूप से खाने की तासीर को महत्व मिलता रहा है। आयुर्वेद के अनुसार तासीर दो तरह की होती है- ठंडी तासीर और गर्म तासीर।

मौसम के मुताबिक आहार

वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन सर्दियों के मौसम में किया जाना जाहिए। इसके विपरीत ठंडे खाद्य पदार्र्थो का dietसेवन गर्मियों के मौसम में करना चाहिए। वस्तुत: सर्दियों के मौसम में पेट में स्रावित होने वाले पाचक रसों की मात्रा बढ़ जाती है। भूख भी अच्छी लगती है। इस कारण सर्दियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन लाभप्रद रहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप फास्ट फूड्स का जमकर सेवन करें। वहीं गर्मियों में सर्दियों की तुलना में लोग पानी ज्यादा पीते हैं और भूख भी ज्यादा नहींलगती। इसलिए गर्मियों में ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो का सेवन करना चाहिए।

विज्ञान की कसौटी पर

डॉ. सतीश चद्र शुक्ला के अनुसार हमारे यहा आयुर्वेद के आहार से सबधित जो नियम हैं, वे आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरे हैं। जैसे खाना तैयार करते समय हल्दी, लहसुन, प्याज, जीरा, धनिया, सौंफ व हींग आदि के प्रयोग से पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स व मिनरल्स प्राप्त होते हैं।

ये हैं ठंडी तासीर वाले

आवला और इससे बनने वाले उत्पाद जैसे मुरब्बा आदि, लौकी, परवल टिंडा, तरोई, अंगूर, सतरा, तरबूज और खरबूजा आदि की तासीर ठंडी होती है। इसी तरह शीतल पेयों की तासीर भी ठंडी होती है।

ये हैं गर्म तासीर वाले

फास्ट फूड्स और तले हुए खाद्य पदार्थ, अखरोट, काजू आदि ड्राई फ्रूट्स, खजूर, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द की दाल, राजमा, छोले आदि की तासीर गर्म होती है।

दूसरा पहलू यह भी

सीनियर डाइटीशियन डॉ. काजल पड्या के अनुसार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान विभिन्न खाद्य पदार्र्थो को ठंडे व गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो के रूप में विभाजित नहीं करता। बकौल काजल, आप गर्मियों में भी ड्राई फ्रूट्स ले सकते हैं, हा उतनी ही मात्रा में जितना आप पचा सकते हों। आप करेले के साथ दही खा सकते हैं, बशर्ते कि उसके खाने के बाद आपके हाजमे पर या शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बहरहाल, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान खान-पान में ठंडी व गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्र्थो पर जोर न देकर भोजन के छह प्रमुख तत्वों की सतुलित मात्रा पर जोर देता है। ये प्रमुख तत्व कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, विटांिमस, मिनरल्स और फाइबर हैं।

फिटनेस के लिए 6 स्टेप्स

आजकल लोगों में फिटनेस को लेकर काफी सजगता आ गई है। फिर भी कई बार जानकारी के अभाव में लोग कुछ ऐसी गलतिया कर जाते हैं, जिनकी वजह से उन्हें अपने फिटनेस प्लान में पूरी कामयाबी नहीं मिल पाती। अगर आप हमारी सलाह पर अमल करें तो अपने फिटनेस प्लान का भरपूर फायदा उठा सकती हैं..

अगर नियमित रूप से एक्सरसाइज करने के बावजूद आप खुद को पूरी तरह फिट महसूस नहीं करतीं तो आपको यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आपकी जीवनशैली में कुछ ऐसी गलत आदतें तो शामिल नहीं हैं, जो आपके फिटनेस प्लान की राह में रुकावट बन रही हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में

1. पर्याप्त नींद न लेना :  अध्ययनों में यह पाया गया है कि किसी भी इंसान को प्रतिदिन औसतन सात से आठ घटे की गहरी नींद की जरूरत होती है, लेकिन मात्र चार-पाच घटे की नींद लेने वाले जब सुबह उठकर वर्कआउट करते हैं तो उन्हें इस दौरान कभी-कभी झपकी भी आने लगती है। इससे एक्सरसाइज में गलतियां होती हैं और चोट लगने का भी खतरा रहता है। अगर नींद पूरी न हो तो इससे सुबह के समय शरीर में मेटाबॉल्जिम प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इस वजह से एक्सरसाइज करने के बावजूद वजन कम नहीं होता।

सलाह : अगर रात को आपकी नींद पूरी न हो तो अगली सुबह एक्सरसाइज के लिए जबरदस्ती न उठें।

2. डिनर न लेना : कुछ लोग वजन बढ़ने के डर से डिनर नहीं लेते। यह आदत सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है। सुबह वर्कआउट करने के लिए आपके शरीर को पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत होती है, लेकिन खाली पेट एक्सरसाइज या जॉगिंग करने से पेट में दर्द और एसिडिटी की समस्या हो सकती है।

सलाह : जॉगिंग पर या जिम जाने से कम से कम 45 मिनट पहले हल्का सा स्नैक्स जैसे चाय या कॉफी के साथ दो बिस्किट, एक कप दूध जरूर लें।

3. टीवी के साथ वर्कआउट : अगर आपको ट्रेडमिल पर चलते हुए या वेट लिफ्टिंग के दौरान टीवी देखने की आदत है तो इसे बदल डालें। इससे आपको चोट लग सकती है। अगर आप साइकल पर कॉर्डिओवैस्कुलर एक्सरराइज के दौरान या ट्रेडमिल पर चलते हुए टीवी देख रहे होते हैं तो इस दौरान एक्सरसाइज के तरीके के बजाय आपका सारा ध्यान टीवी पर होता है। इससे कई बार हैंडल पर पकड़ ढीली पड़ जाती है, जिससे शरीर को एक्सरसाइज का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

सलाह : एक्सरसाइज के दौरान टीवी देखने के बजाय अच्छा संगीत सुनें।

4. वार्मअप नहीं करना : कुछ लोग समय बचाने के लिए वार्मअप के बिना सीधे एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं, यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। यह आपके शरीर को एक्सरसाइज के अनुकूल बनाता है। इससे रक्त संचार समान रूप से होता है और शरीर का तापमान संतुलित हो जाता है। अगर वार्मअप किए बिना एक्सरसाइज की जाए तो इससे मासपेशियों में दर्द हो सकता है।

सलाह : अगर आप एरोबिक्स, जॉगिंग, साइक्लिंग या ब्रिस्क वॉक करती हैं तो इसके लिए कम से कम पाच मिनट के लिए वार्मअप जरूर करें।

5. फुटवेयर : कुछ लोग ट्रेडमिल एक्सरसाइज के दौरान बॉस्केट बॉल शूज पहनते हैं तो एरोबिक्स के दौरान वॉकिंग शूज पहनते हैं। इससे केवल पैरों के तलवों में ही नहीं, बल्कि घुटने, कूल्हे और पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है।

सलाह : हर एक्सरसाइज के लिए उसी के अनुकूल फुटवेयर का चुनाव करें।

6. बोरिंग : फिटनेस प्लान अगर आपके फिटनेस प्लान में रोचकता और विविधता न हो तो इससे बहुत जल्दी ही आपका मन ऊब जाएगा और कुछ ही दिनों में आपका यह प्लान ठप पड़ जाएगा। मिसाल के तौर पर कुछ सिर्फ मॉर्निग वॉक करते हैं तो कुछ लोग एरोबिक्स। इससे उनके फिटनेस रुटीन में बोरियत आ जाती है और उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

सलाह : एक सप्ताह के अंतराल पर जॉगिंग, एरोबिक्स, स्किपिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज को शामिल करें।

बसंत मौसम का व्यायाम

युवतियां फिट रहने के लिए कर रहीं है पार्को का रुख

सर्दी अलविदा कहने को है और बसंत ऋतु का आगाज हो चुका है। दिन भर काम में व्यस्त रहने वाली ग‌र्ल्स व युवतियां फिट रहने के लिए अब शामिल होने लगी है योग की टोली में। मोतीझील, विश्नोई पार्क गीता नगर, मॉडल टाउन, जे.के. मंदिर, संजय उपवन, नानाराव पार्क, सीएसए ग्राउंड व शहर के अन्य घूमने वाले ठिकानों में सुबह पांच बजे से ही गूंजने लगते है, युवतियों के ठहाके। योग महिलाओं के लिए संपूर्ण व्यायाम ही नहीं, सौंदर्य बरकरार रखने का अच्छा विकल्प भी है।

खूबसूरती रहेगी बरकरार

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही योग खूबसूरती को भी निखारता है। सौंदर्य उत्पादों के बिना यदि आप खूबसूरत दिखना चाहती हैं, तो योग अवश्य करें। रिंकल्स, डार्क सर्कल्स और डल स्किन से छुटकारा दिलाने का योग अच्छा माध्यम है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. योगेश द्विवेदी बताते है, ''रोजाना 15 मिनट योग करने से त्वचा में कसाव बना रहता है। हार्मोस और खून में ऑक्सीजन की मात्रा का संतुलन रखने के लिए हेल्दी डाइट जरूरी है। इसके साथ अगर योग को भी रुटीन में शामिल किया जाए तो आपको अधिक उम्र तक फिट रहने से कोई नहीं रोक सकता। बसंत का मौसम सर्दी और गर्मी के मध्य का मौसम होता है। इन दिनों शुरू किया गया योग या व्यायाम बहुत असरकारी होता है।''

तनाव से मुक्ति

योग कामकाजी लोगों के फिट और तनावमुक्त रहने के लिए बहुत कारगर है। एक कंपनी में कार्यरत महिमा द्विवेदी बताती है, ''सर्विस ऐसी है कि कस्टमर्स को डील करने और ऑफिस आने-जाने में थकान हो जाती थी। ऐसे में ऑफिस की टेशन घर पर निकलती थी। कड़ाके की ठंड होने के कारण घर पर ही योग करती थी। सवेरे जल्दी उठने और ध्यान व प्रणायाम करने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं काफी हद तक तनाव से बाहर आ गई हूं। मौसम अच्छा हुआ है, इसलिए जे. के. मंदिर जाकर योग और जॉगिंग करती हूं।''

जिम जाने की झंझट नहीं

योग केवल मन-मस्तिष्क को शांत ही नहीं रखता, बल्कि फिटनेस भी बरकरार रखता है। कई ऐसी महिलाएं है, जो फिट तो रहना चाहती हैं, लेकिन जिम में भारी-भरकम वजन नहीं उठाना चाहतीं या घर से बाहर जाने का आलस्य रहता है। योग उनके लिए फिटनेस का बेहतर विकल्प है। मोतीझील में पिछले डेढ़ साल से योग कर रही स्टूडेंट सोनाली सिंह कहती है, ''फिट रहना चाहती हूं, लेकिन फिटनेस सेंटर जाकर वजन उठाना और पसीना बहाना मुझसे नहीं हो पाता। मैं योग की शरण में हूं। इसने मुझे फिट रहने के साथ-साथ खुशमिजाज भी बना दिया है। जिम जाकर आप फिट तो रह सकते हैं, लेकिन योग फिटनेस के साथ तनाव मुक्त रहने के गुण भी बताता है।''

Sunday, November 4, 2012

सही पोषक तत्वों हो रही है

समुचित मात्रा में पोषण न मिलने से शरीर के सभी अंगों और उनकी कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस स्थिति में व्यक्ति कई रोगों से भी ग्रस्त हो सकता है, जैसे वह :

* रक्त की कमी [एनीमिया] और रतौंधी [नाइट ब्लाइंडनेस] आदि रोगों से ग्रस्त हो सकता है। आयरन की कमी से एनीमिया और विटामिन ए की कमी से नेत्र और उसकी ज्योति क्षीण होने लगती है।

nutrients* पोषक तत्वों, जैसे-कैल्शियम के अभाव में हड्डिया और जोड़ कमजोर होने लगते हैं। कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है। इस रोग में जरा सा आघात लगने पर हड्डी टूट जाती है।

* सही पोषण के अभाव में शरीर का रोग प्रतिरोधक तत्र [इम्यून सिस्टम] कमजोर हो जाता है। इस कारण व्यक्ति शीघ्र ही विभिन्न बीमारियों के सक्रमण का शिकार हो जाता है।

* हृदय की सेहत के लिए पोटैशियम लाभप्रद है। इस तत्व के अभाव में हृदय की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से कार्य नहीं करती।

* पोषक तत्वों के अभाव में गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु पर खराब असर पड़ता है।

* शरीर का स्नायु तत्र [नर्वस सिस्टम] कमजोर होने से हाथ व पैरों में कंपन आदि शिकायतें पकड़ सकती हैं।

* व्यक्ति की मानसिक क्षमता भी क्षीण होने लगती है।

सामान्य परिवार का पौष्टिक भोजन

आमतौर पर सामान्य परिवार के भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त आहार 62 से 65 प्रतिशत, प्रोटीन [10 से 15 प्रतिशत], वसा [10 से 15 प्रतिशत] और शेष भाग विटामिस और मिनरल्स से सबधित होना चाहिए। उम्र, शारीरिक श्रम, शारीरिक सरचना या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी के कारण पोषक तत्वों के उपर्युक्त प्रतिशत में परिवर्तन आ सकता है। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों को आहार के सदर्भ में इन बातों पर ध्यान देना चाहिए :

* कार्बोहाइड्रेट्स के लिए अनाज से बनी रोटियों व चावल को थाली में स्थान दें।

* अगर आप मासाहारी नहींहैं, तो प्रोटीन के लिए दोपहर के भोजन की थाली में दाल जरूर होनी चाहिए।

* ब्रेकफास्ट में दूध और इससे बने उत्पाद लिए जा सकते हैं।

* अंकुरित अनाजों [स्प्राउट्स] के रूप में चना, सोयाबीन और मूंग की दाल का सेवन अत्यत लाभप्रद है।

* भोजन में सलाद को शामिल करें।

* अलग-अलग रंगों के मौसमी फलों व सब्जियों का बदल-बदलकर प्रयोग करें।

* मौसम के अनुसार फलों के रस और सूप का सेवन करें।

कम खर्च में पौष्टिक आहार  : नई दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर डाइटीशिन रीतिका समद्दार के अनुसार यह धारणा बिल्कुल गलत है कि पौष्टिक आहार सिर्फ महंगे खाद्य पदार्र्थो, जैसे - बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता, मास व मछली आदि से ही प्राप्त होते हैं। एक आम आदमी पौष्टिक आहार को मौसमी फलों व सब्जियों [जो महंगी नही होतीं], दूध, सोयाबीन आदि से प्राप्त कर सकता है। मौसमी फल व सब्जिया विटामिस व मिनरल्स की अच्छी स्रोत हैं, जिनकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। केले में पाये जाने वाले पोषक तत्व सेब से जरा भी कम नहीं हैं। हालाकि दोनों ही फलों में पोषक तत्व अलग-अलग होते हैं।

प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोत दालें सोयाबीन, दूध, मूंगफली आदि भी महंगी कीमत वाले खाद्य पदार्थो के गुणों से किसी मायने में कम नहीं हैं। इसी तरह मिनरल्स व विटामिस को काफी हद तक सस्ती हरी सब्जियों [जैसे- पालक, लौकी, तरोई, सेम, बदगोभी, मूली, मेथी, बथुआ आदि] से प्राप्त कर सकते हैं।

अलसी का जवाब नहीं :  विश्व स्वास्थ्य सगठन ने अलसी [फ्लेक्स सीड] के गुणों के कारण इसे सर्वश्रेष्ठ पौष्टिक आहार 'सुपर फूड्स' की श्रेणी में शामिल किया है। अलसी में अनेक पोषक तत्व, जैसे- प्रोटीन, क्रोमियम, जिंक, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन सिलेनियम, विटामिन ए, विटामिन बी. आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। अलसी को हल्का भूनकर और फिर इसका चूर्ण बनाकर 5 से 10 ग्राम [एक से दो चम्मच] मात्रा में सुबह-शाम पानी या दूध के साथ सेवन करना चाहिए। अलसी महंगी भी नहींहै।

पोषक तत्वों का भडार सोयाबीन  :

सोयाबीन का प्रयोग अंकुरित बीज, दाल, दूध, दही और 'बड़ी' के रूप में किया जाता है। यह भी महंगी नहीं है और इसका प्रयोग सामान्य से लेकर खास व्यक्ति भी कर सकता है। सोयाबीन में मूलत: प्रोटीन, विटामिन ए, बी, ई और बी काप्लेक्स भी पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फास्फोरस सरीखे मिनरल्स भी पाये जाते हैं।

पोषण से सबधित मिथक  :

इस सदर्भ में व्याप्त मिथकों को तथ्यों की रोशनी में देखा जाना चाहिए। कुछ मिथ और उनसे सबधित तथ्य इस प्रकार हैं :

मिथक : भोजन करने के तुरंत बाद जमकर पानी पीना चाहिए।

तथ्य : खाने के तुरंत बाद आधा गिलास तक पानी पिया जा सकता है। खाने के तुरंत बाद जमकर यानी एक गिलास या इससे अधिक मात्रा में पानी पीने से पाचक रसों [डाइजेस्टिव एंजाइम्स] की सक्रियता कम हो जाती है। इस कारण पाचन प्रक्रिया मद पड़ जाती है। हा, खाने के 35 मिनट बाद पानी प्यास के अनुसार पिया जा सकता है।

मिथक : फलों के साथ दूध नहीं लिया जा सकता।

तथ्य : सिर्फ खट्टें फलों के साथ दूध नहीं लेना चाहिए। ऐसा करने से पाचन तत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, लेकिन शेष फलों के साथ दूध ले सकते हैं। वजन बढ़ाने के लिए केले के साथ दूध लेने का चलन पहले से ही है।

मिथक : दूध और दही को साथ नहीं ग्रहण करना चाहिए।

तथ्य : एक बार खाने के बाद जिन लोगों को हाजमे से सबधित कोई दिक्कत महसूस नहीं होती या फिर जो लोग इन दोनों को ही साथ में हजम कर सकते हैं, वे इन्हें साथ-साथ ग्रहण कर सकते हैं।

Saturday, November 3, 2012

मीठा मक्का


  • प्रोटीन और विटामिनों से भरपूर मक्का जहाँ शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं यह बेहद सुपाच्य भी है। इसकी ख़ासियत यह है कि हर रूप में इसमें पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं। कच्चे और पके रूप में तो यह फ़ायदेमंद होता ही है। जब इसमें विद्यमान तेल निकाल लिया जाता है और यह सूखे रूप में रह जाता है तब भी इसके अवशिष्ट में वसा को छोड़कर शेष पोषक तत्व विटामिन, प्रोटीन इत्यादि विद्यमान रहते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास में मक्के का प्रयोग सहायक होता है।

  • ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि आज से दस हज़ार वर्षों पूर्व सर्वप्रथम, मैक्सिको में भारतीयों द्वारा ही इसकी उपज पैदा की गई थी। भारत में गेहूँ के बाद मक्के का उत्पादन सर्वाधिक होता है। अमेरिका इसका सर्वाधिक निर्यात करने वाला देश है।

  • मक्का विभिन्न रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। सर्दियों में मक्के के आटे से रोटी बनाई जाती है। पंजाब की मक्के की रोटी और सरसों का साग केवल उत्तर भारतीयों द्वारा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवासियों द्वारा शौक से खाया जाता है। बड़े-बड़े होटलों और रेस्तरां में यह सर्दियों की ख़ास डिश बन जाती है। मक्के के आटे में मूली या मेथी गूँधकर बनाई गई रोटी मक्खन और दही के साथ अत्यंत स्वादिष्ट लगती है। मक्के के आटे से पावरोटी, बिस्कुट तथा टोस्ट भी बनाए जाते हैं।

  • कच्चे मक्के को सुखाकर उसे दरदरा पीसकर दलिया बनाया जाता है। यह दलिया दूध में पकाकर खाने से सुस्वादु होने के साथ पौष्टिक भी होता है।

  • बरसात के मौसम में भूना हुआ भुट्टा छोटे-बड़े सभी के मन को भाता है। लोग भुट्टे के अलावा पॉपकार्न, भुने हुए मकई के पक्के दाने के भी दीवाने होते हैं, जो साधारण से भड़भूजे से लेकर बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा बेचे जाते हैं। पका भुट्टा उबालकर इमली की चटनी के साथ खाने में अत्यंत स्वादिष्ट लगता है। मक्के का गरम-गरम सूप पीना हर मौसम में स्वास्थ्यवर्धक होता है और स्वीट कार्न सूप का तो जवाब नहीं!

  • मक्का शर्बत, मुरब्बा मिठाइयों और बनावटी मक्खन बनाने में प्रयुक्त होता है और इसके रेशे मिट्टी के बर्तन, दवाइयाँ, रंगरोगन, काग़ज़ की चीज़ें और कपड़े बनाने के काम आते हैं। पशुओं के लिए खली के रूप में भी यह प्रयुक्त होता है। हृदयरोग विशेषज्ञ मक्के के तेल को खाद्य-पदार्थों में प्रयुक्त करने की सलाह देते हैं। एक किस्म की शराब और बीयर बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

  • मक्के में विटामिन 'ए', 'बी-२', 'ई' फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, आग्जैनिक आम्ल, नारसिन, फैट और प्रोटीन पाया जाता है।

  • यह पेट के अल्सर और गैस्ट्रिक अल्सर के छुटकारा दिलाने में सहायक है साथ ही यह वज़न घटाने में भी सहायक होता है। कमज़ोरी में यह बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है और बच्चों के सूखे के रोग में अत्यंत फायदेमंद है। यह मूत्र प्रणाली पर नियंत्रण रखता है, दाँत मजबूत रखता है और कार्नफ्लेक्स के रूप में लेने से हृदयरोग में भी लाभदायक होता है।

  • भुट्टा या मक्का पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाने में सहायक है।

सेहत सदाबहार

कोई भी शख्स बढ़ती उम्र के बावजूद स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त रहकर अपनी जिंदगी जीने के सालों को बढ़ाकर सार्थक जीवन जी सकता है। आइए जानते हैं यह कैसे सभव है..

कारण क्या हैं  ..

उम्र बढ़ने के कारण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण की सख्या कम होती जाती है। कोशिकाओं के क्षीण होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस कारण हमारी शारीरिक-मानसिक शक्ति कमजोर होने लगती है, त्वचा ढीली पड़ने लगती है, याददाश्त कम होने लगती है। इसके साथ ही हृदय की धमनियों में कड़ापन आने के कारण हृदय रोग और स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है। वहींशरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण व्यक्ति कई रोगों से ग्रस्त हो जाता है।

बदल सकती है यह तस्वीर :

अगर आप जीवन में समुचित खान-पान व व्यायाम और सात-आठ घटे की नींद लेते हैं, तो बढ़ती उम्र या उम्रदराज होने के बावजूद आप सक्रिय व स्वस्थ रहेंगे। बेहतर हो कि इस स्वास्थ्यकर जीवन-शैली पर अमल बाल्यावस्था से ही किया जाना चाहिए। 'सुपर फूड्स' पर दें ध्यान रोगों से बचाव,अच्छी याददाश्त, सुंदर त्वचा और मजबूत हड्डियों का राज आपके फ्रिज में या घर में रखी जाने वाली सब्जियों व फलों में छिपा है। आपके खानपान में जितने अधिक रंगीन खाद्य पदार्र्थो का समावेश होगा, उतनी ही मात्रा में आपके शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स की प्राप्ति होती है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्र्थो को 'सुपर फूड्स' कहा जाता है।

रीतिका समद्दार, डाइटीशियन, मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली रंगीन को करे शामिल जब आप सुपर फूड्स के बारे में सोच रहे हों, तब अपने दिमाग में रंगों के बारे में भी सोचें। जैसे चटख नीला, बैंगनी, लाल, हरा या नारंगी आदि। इन रंगीन फलों व सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपका हृदय व कैंसर रोगों से बचाव करने के अलावा उम्र बढ़ने (एजिंग) की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं।

चटख हरा: हरी प8ेदार सब्जिया और ब्रोकोली आदि। लाल : लाल टमाटर आदि।

नारंगी/ पीला: पपीता, आम, गाजर और रैस्पबैरीज आदि।

चटख नीला/बैंगनी : बैंगन, प्लम, ब्लूबेरी, स्ट्राबेरी और चेरी आदि।

पर्याप्त पानी शारीरिक श्रम और मौसम के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से नुकसानदेह पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और टिश्यूज सक्रिय रहते हैं।

महत्व फाइबर का खानपान में फाइबरयुक्त खाद्य पदार्र्थो जैसे सेब, जौ, बीन्स, मौसमी फल व सब्जिया, ओटमील, ब्राउन राइस आदि को ग्रहण करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर और शरीर में शुगर का स्तर नियत्रित रहता है। ये खाद्य पदार्थ वजन कम करने में भी सहायक हैं।

Thursday, November 1, 2012

स्ट्रेस रिलीफ फ़ूड

काम के बढ़ते बोझ और स्ट्रेस से आपका खानपान भी प्रभावित होता है। क्योंकि जब आप लंच, ब्रेकफस्ट या फिर डिनर मिस कर जाती हैं तो जंक फूड ले लेती हैं। जंक फूड, बेकरी फूड, कप केक्स और शुगरी चीजें कुछ देर आपको राहत तो जरूर देते हैं, लेकिन कमर का साइज भी बढ़ा देते हैं। ऐसे में स्ट्रेस बढ़ना जाहिर है। अगर आप स्ट्रेस से दूर और यंग दिखना चाहती है तो हेल्दी फूड ट्राई करें। डाइटीशियन शचि सोहल बता रही हैं ऐसे ही कुछ स्ट्रेस बस्टर फूड। इन्हें अपनाइए और स्ट्रेस को दूर भगाइए।

डार्क चॉकलेट :  हालांकि यह चॉकलेट हर कोई पसंद नहीं करता लेकिन यह स्ट्रेस दूर करने में मदद करती है। इसमें पाया जाने वाला फिनाइलेथाइलामाइन तत्व मस्तिष्क को आराम देता है। इसमें हाई फ्लेवेनॉल कंटेंट होने के कारण यह सौंदर्य बढ़ाता है और त्वचा को हाइड्रेट भी रखता है। लेकिन सीमित मात्रा में खाना ही फायदेमंद है। 20 ग्राम चॉकलेट में 150 कैलरी होती है। ओटमील : इसमें पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे हमारा शरीर सेरोटिन प्रोड्यूस करता है। सेरोटिन मूड अच्छा करने का काम करता है और मन को शांति और आराम का एहसास कराता है। इसमें मौजूद फाइबर स्लिम फिट रखते हैं। साथ ही बिना कैलरी बढ़ाए यह पेट भरने का काम करता है। केले के साथ इसे ब्रेकफस्ट में जरूर लें।

 चिकेन सूप :  एक शोध से पता चला है कि चिकेन हर प्रकार के स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। यह एंटीइन्फ्लामेटरी होता है, जो सांस संबंधी समस्या, घबराहट, तनाव और थकान को दूर करता है। वजन भी नियंत्रित रखता है। खाने से पहले चिकेन सूप लेने से आपके खाने से मिलने वाली कैलरी कम हो जाती है। इस तरह आपका वजन बढ़ने नहीं पाता।

सालमन :  हफ्ते में कुछ दिन सालमन खाने से मन शांत रहता है। इसमें मौजूद आमेगा 3 फैटी एसिड तनाव से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। यह त्वचा को नर्म-मुलायम बनाने में मदद करता है। इन्फ्लामेशन को दूर करता है। इस तरह त्वचा रूखी नहीं होने पाती।

ग्रीन टी :  इसमें थियानाइन एक प्रकार का अमीनो एसिड होता है जो शरीर और दिमाग दोनों को आराम देता है। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मेटाबॉलिज्म सिस्टम को दुरुस्त रखता है और त्वचा को धूप से होने वाले नुकसान से बचाता है। इसमें एक चम्मच शहद मिलाने से यह तरोताजा कर देती है।

अखरोट :  अगर गुस्सा और लड़ाई-झगड़े के मूड में हों, तो उस दौरान अखरोट खाने से आपका क्रोध भाग जाएगा। अखरोट में एल-आर्जिनाइन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्तवाहिनियों को रिलैक्स रखने में मदद करता है। रक्त संचार को बढ़ाता है और त्वचा के कोश में पोषक तत्वों को पहुंचाता है, जिससे वह लंबे समय तक युवा रहती है। अखरोट में ओमेगा 3 एस और ओमेगा फैट पाया जाता है जो त्वचा को कांतिमय व सुंदर बनाने के लिए बेहद जरूरी होता है।

दही :  एक कप सादा लो-फैट दही तकरीबन 450 मिली ग्राम कैल्शियम प्रदान करता है, जो महत्वपूर्ण ब्यूटी मिनरल्स का काम करता है। हड्डियों को मजबूत बनाता है। शोध से यह साबित हो चुका है कि अधिक कैल्शियम लेने से पीएमएस की आशंका कम हो जाती है। एक ग्लास लस्सी तनाव से तुरंत राहत देती है।

ब्ल्यूबेरी : अब जब भी आपका मन मीठा खाने का करे तो ब्ल्यूबेरी जरूर खाएं। इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा में कोलेजन को बरकरार रखते हैं। इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। यह आसानी से स्ट्रेस रिलीज करता है। तनाव और डिप्रेशन में इसे दही के साथ मिलाकर खाने से काफी राहत मिलती है।

7 टिप्स टु गेन ए फिट बाडी

पनाइए, आपको प्रेरणा मिलेगी नये ढंग से जीवन जीने और फिट रहने की। सही लक्ष्य निर्धारित करें |

यह दैनिक, साप्ताहिक या मासिक भले ही हो सकता है, लेकिन जब से कार्यक्रम अपनाएं, नियम बना लें कि उसी के अनुरूप आप कार्य करेंगी।

  1. दोस्तों को भी शामिल करें :  इसके लिए सबसे पहले ट्रेनिंग एक्सपर्ट को तलाशें और ध्यान दें कि आपके लिए किस प्रकार का वर्कआउट या एक्सरसाइज सही रहेगा। फिर अपने दोस्तों को भी बताएं कि फिटनेस के लिए एक्सरसाइज बेहद उपयोगी है इसलिए वे भी आपके साथ जिम, क्लब या योग क्लासेज जॉएन करें। सबके साथ में मिलकर ऐसा करने से आपको अच्छा भी लगेगा और ऐसा करने वाले सभी एक दूसरे को प्रेरणा देने के साथ एनर्जी से भरे रहेंगे।

  2. खुद को सराहें :  अगर अपना कोई भी लक्ष्य या उद्देश्य पूरा कर लेती हैं तो खुद को सराहें जरूर। ऐसा करने से आपको अपने अन्य लक्ष्य पूरे करने में सहायता मिलेगी। जब आपके लगने लगेगा कि आपने हफ्ते भर में एक किलो वजन घटा लिया है तो वह आतरिक खुशी आपको अगले हफ्ते भी वजन घटाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

  3. इसे चुनौती समझें : वजन घटाने का लक्ष्य कभी-कभी आपको तनाव या कुंठा में डाल देता है। जब आप दूसरे से ये सुनती हैं कि उसने कितनी जल्दी अपने वजन पर काबू पा लिया तो आपको भी चिंता हो जाती है। वजन पर नियंत्रण करने के लक्ष्य को एक चुनौती की तरह स्वीकारें। यह चुनौती आपको शारीरिक रूप से फिट होने के लिए प्रेरित करेगी।

  4. विभिन्नता लाएं : एक ही प्रकार की एक्सरसाइज और डाइट रुटीन से बोर न हों। अलग-अलग प्रकार की एक्सरसाइज अपनी जरूरत के मुताबिक करें। जैसे एक सप्ताह 30-40 मिनट तक टहलें या ब्रिस्क वाक करें तो दूसरे सप्ताह में कार्डियोवैसकुलर या वेट ट्रेनिंग करें। सिर्फ वजन घटाने वाली ही एक्सरसाइज न करें, जिससे आपको अच्छा लगे, आराम मिले और आपका स्वास्थ्य भी उ8म रहे, वह करें। इस तरह आप एक ही जैसी एक्सरसाइज से बोर नहीं होने पाएंगी। आप चाहें तो हर महीने एक नई एक्टिविटी कर सकती हैं।

  5. परिणाम का विश्लेषण करें : अपनी प्रगति पर ध्यान दें। देखें कि पहले सप्ताह में आपने वजन जितना कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, वह पूरा हुआ या नहीं। अगर हो गया तो बहुत अच्छी बात है, आगे भी इसी तरह आपका लक्ष्य पूरा होता रहे इसके लिए प्रयत्नशील रहें, लेकिन अगर आपका लक्ष्य पूरा नहीं पाया है तो ध्यान दें कि किन कारणों से ऐसा हुआ और दोबारा न ऐसा हो, इसकी योजना बनाएं। अपना वजन चेक करें, लेकिन हर रोज अपना वजन जाचने की कोई आवश्यकता नहीं है। महीने में एक बार जरूर वजन देखें। इससे आपको अपना लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी।

  6. सेहत का भी रखें खयाल :   हम सभी परफेक्ट बॉडी तो बनाना चाहते हैं, लेकिन ये भूल जाते हैं कि ऐसा बरसों तक रहे तभी आपको लाभ मिलेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि जब वजन कम करने का एक बार लक्ष्य पूरा हो जाता है तो अकसर आप सुस्त हो जाती हैं। सोचती हैं कि अब तो वजन संतुलित हो गया, अब नियमित व्यायाम करने की कोई जरूरत नहीं है। यह सोचना गलत है। आपका वजन हमेशा संतुलित और नियंत्रण में रहे, इसके लिए आवश्यक है कि आप नियमित वर्कआउट करें। घटों और बेहद कठिन एक्सरसाइज करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस, आपको यह ध्यान रखना है कि एक बार वजन पर काबू पा लिया तो वह आगे न बढ़ने पाए। अगर आपका स्वास्थ्य खराब है तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के एक्सरसाइज न करें। जब डॉक्टर आपको एक्सरसाइज करने की अनुमति दे, तभी करें।

  7. मौज-मस्ती भी है जरूरी : अगर आप किसी काम को खुश होकर पूरा नहीं करती हैं तो उसमें रुचि लें और मौज-मस्ती के साथ उसको संपन्न करें। बहुत सारी ऐसी एक्सरसाइज हैं जिसे करके आप खुश हो सकती हैं और इंजॉय भी कर सकती हैं। मसलन स्किपिंग, जंपिंग, एरोबिक्स आदि। आपको जो भी पसंद हो करें। नृत्य भी एक अच्छी एक्सरसाइज है।

10 चिल्ड्रेन के लिए उत्तम आहार युक्तियाँ

अपने किचन में आप जो कुछ भी पकाती हैं, उसका तरीका कितना सही और स्वास्थ्यवर्धक है? कुकिंग से जुड़े आपके हर तरह के संशय का समाधान ....

पास्ता, नूडल्स या मैकरॉनी :  बच्चों की पसंद की वजह से अकसर घरों में नाश्ते के समय इनका इस्तेमाल होता है। अच्छी सेहत के लिए मल्टीग्रेन या होल व्हीट पास्ता, नूडल्स या सूजी की मैकरॉनी का इस्तेमाल करें। बाजार में मिलने वाले सेमी कुक्ड नूडल्स का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनके जल्दी खराब होने का डर रहता है। ऐसे चीजें हमेशा घर में उबालें। अकसर लोग नूडल्स या पास्ता को थोड़ा कम उबालते हैं, ताकि ये देखने में सुंदर लगें, पर यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इन्हें उबालने का सही तरीका यह है कि पानी में एक टेबल स्पून रिफाइंड ऑयल, एक टीस्पून नमक और एक टीस्पून विनेगर डालकर इन्हें अच्छी तरह पकाएं और छलनी में छानकर ठंडे पानी से धो लें। इससे ये चीजें आपस में नहीं चिपकेंगी।
हेल्दी टिप :   इन चीजों की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इनमें ढेर सारी हरी सब्जिया मिलाएं। 
अंडा : यह प्रोटीन का बेहतर स्त्रोत है। इसे उबालकर खाना सबसे अच्छा रहता है। वैसे इसका वाटर पोच भी तैयार किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक गहरे बर्तन में पानी उबलने के लिए रखें। फिर एक नॉनस्टिक करछी के भीतरी हिस्से में जरा सा कुकिंग ऑयल लगाकर उसमें अंडा तोड़कर डालें, उसके ऊपर नमक और काली मिर्च पाउडर छिड़ककर, करछी को बर्तन में इस तरह रखें कि वह पानी में पूरी तरह न डूबे। पाच मिनट के बाद जब अंडा पक जाए तो इसे लो फैट क्रीम और टोस्ट के साथ सर्व करें।
  हेल्दी टिप :अंडे की जर्दी मे बहुत अधिक मात्रा में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है, जो हार्ट के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए ओवर वेट या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को केवल अंडे का सफेद हिस्सा ही खाना चाहिए।
पराठे :  इसके लिए हमेशा नर्म आटा गूंधें। चाहें तो उसमें एक टीस्पून रिफाइंड ऑयल का मोयन भी मिला सकती हैं। हरी सब्जियों का स्टफ्ड पराठा पूरे परिवार की सेहत के लिए अच्छा रहता है। इसके लिए आप मौसम के अनुकूल सब्जियों का चुनाव कर सकती हैं।
हेल्दी टिप :अगर बच्चे सब्जियों वाला स्टफ्ड पराठा नहीं खाते तो इस समस्या से बचने के लिए हरी सब्जियों को उबालकर पेस्ट बना लें और उसी से आटा गूंधकर पराठे बनाएं।
 स्प्राउट्स :  यह प्रोटीन और विटमिन सी का संतुलित मिश्रण है। आजकल बाजार में पैकेटबंद स्प्राउट्स भी मिलते हैं, पर सेहत की दृष्टि से इन्हें सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप घर में खुद स्प्राउट्स तैयार करें। इसके लिए 12 घटे तक चना, साबुत मूंग आदि भिगो दें। फिर उसका पानी निकाल कर किसी छलनी पर रखकर ढककर रख दें, अगले आठ घटे के बाद उसमें अंकुर निकल आएंगे। स्प्राउट्स उतनी ही मात्रा में तैयार करें कि 12 घटे में खत्म हो जाए। कच्चा अंकुरित अनाज खाने से कुछ लोगों को गैस की समस्या हो जाती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि स्प्राउट्स को हलका स्टीम करके खाया जाए।
हेल्दी टिप :अगर आपको डायबिटीज है तो स्प्राउट्स के लिए चना या मूंग भिगोते समय आप उसी में मुट्ठी भर मेथी के दाने भी मिला दें। इससे आपका शुगर लेवल नियंत्रित रहेगा।
रोटी :  अगर आप पैकेटबंद आटा खरीदती हैं तो उसके पैकेट पर लिखा विवरण ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें चोकर की मात्रा कम है तो आटे में चोकर, सोयाबीन, बाजरे या चने का आटा स्वादानुसार मिलाएं। आटा गूंधने के बाद उसे दस मिनट तक ढककर रखें, इससे रोटिया नर्म और फूली-फूली बनेंगी। अगर घर में लोगों को मिश्रित आटे का स्वाद पसंद नहीं आता तो सप्ताह में एक दिन आटे में बेसन, प्याज, हरा धनिया, नमक और अजवाइन मिलाकर मिस्सी रोटी बना लें।
 हेल्दी टिप :रोटी बनाने के लिए हमेशा चोकरयुक्त आटे का इस्तेमाल करें। इससे पाचनतंत्र दुरुस्त रहेगा।
चावल :चावल के बारे में लोगों में बहुत भ्रम है कि उबालकर पानी निकाल देने से उसका सारा स्टार्च निकल जाता है। ऐसा करने से चावल का सिर्फ एक या दो प्रतिशत स्टार्च निकल पाता है। इसलिए यह आपकी पसंद पर निर्भर है कि आपको चावल कैसे पकाना है? चावल खाते समय केवल यह ध्यान रखें कि इसके साथ हरी सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें। क्योंकि सब्जियों में पाया जाने वाला फाइबर चावल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च को आसानी से पचाने में सहायक होता है।
 हेल्दी टिप : ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
 इडली :  आमतौर पर स्त्रिया समय बचाने के लिए बाजार में बिकने वाली इंस्टैंट इडली मिक्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इसमें मौजूद प्रिजर्वेटिव सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं। इसलिए इडली हमेशा घर में ही बनाएं। अगर आपके पास समय कम हो तो सूजी में दही या ईनो पाउडर मिलाकर आप घर में ही इंस्टैंट इडली तैयार कर सकती हैं। अगर आप कैलरी कॉन्शस हैं तो आपके लिए राइस के बजाय रवा इडली ज्यादा अच्छी रहेगी।
 हेल्दी टिप :अकसर लोग साबर के बजाय नारियल की चटनी के साथ इडली खाते हैं, पर चटनी में साबर की तुलना में ज्यादा कैलरी होती है। इसलिए इडली के साथ साबर जरूर बनाएं।
सब्जिया और फल : हमें सिर्फ मौसम में मिलने वाली सब्जिया ही खानी चाहिए। जहा तक संभव हो सब्जिया और फल छिलके सहित खाने की कोशिश करें, क्योंकि इनमें मौजूद फाइबर कब्ज दूर करने में सहायक होता है। हालाकि आजकल सब्जियों पर कई तरह की हानिकारक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव होता है। इसलिए काटने से पहले उन्हें गर्म पानी में पाच मिनट तक डुबोकर अच्छी तरह धो लें, क्योंकि सब्जिया काटकर धोने से उनमें मौजूद विटमिंस नष्ट हो जाते हैं। हरी सब्जियों को बहुत ज्यादा देर तक न पकाएं।
हेल्दी टिप : सब्जियों और फलों के रंगों में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसलिए हमेशा अपने भोजन में हर रंग की सब्जियों और फलों को शामिल करने की कोशिश करें।
दालें : हर तरह की दाल में मौजूद सभी पौष्टिक तत्व आपको समान रूप से मिल सकें, इसके लिए आप रोजाना अलग तरह की दालों का इस्तेमाल करें या चना, मूंग, उड़द और मसूर की दालों को समान मात्रा में मिलाकर मिश्रित दाल भी तैयार कर सकती हैं। छौंक लगाते समय सीमित मात्रा में देसी घी का इस्तेमाल करें। दालों में मौजूद प्रोटीन की वजह से कुछ लोगों को इनके सेवन के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है। अगर ऐसी समस्या हो तो डिनर के बजाय लंच में साथ दाल का सेवन करें।
 हेल्दी टिप : छिलके वाली दालों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए धुली दालों के बजाय छिलके वाली दालें जैसे-काली मसूर, काली उड़द और हरी मूंग की दाल का सेवन करें।
 सैलेड :   सैलेड बनाने के लिए खीरा, ककड़ी, टमाटर, गाजर, मूली, प्याज, बंदगोभी और लेट्यूस के पत्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं। कुछ स्त्रिया समय बचाने के लिए खाना तैयार होने से पहले ही सैलेड काटकर रख देती हैं, इससे सैलेड का स्वाद और पौष्टिक तत्व दोनों नष्ट हो जाते हैं। इसलिए टेबल पर खाना लगाने के दस मिनट पहले सैलेड तैयार करें। सैलेड काटने से तुरंत पहले सब्जिया फ्रिज से निकालें। इससे सैलेड क्रिस्पी बनेगा और उसे काटना भी आसान होगा। ड्रेसिंग के लिए ऑलिव ऑयल या व्हाइट क्रीम के बजाय नींबू, ऑरिगेनो, बेसिल और हंग कर्ड जैसी चीजों का इस्तेमाल करें क्योंकि ऑलिव ऑयल और व्हाइट क्रीम में कैलरी ज्यादा होती है। अकसर एक प्लेट सैलेड में चार-पाच लोग शेयर करते हैं, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होता। घर में हर व्यक्ति के लिए अलग से एक बोल सैलेड की सर्विंग होनी चाहिए।
 हेल्दी टिप :सैलेड हमेशा मेनकोर्स से पहले लेना चाहिए। इसमें मौजूद फाइबर बढ़ते वजन को नियंत्रित रखता है।

 

 

 

 

 

 

Monday, October 29, 2012

शादी होने वाले लड़कियों केलिए डाईट प्लान

फिट रहना हर किसी के लिए जरूरी है । लेकिन होने वाली दुल्हन के लिए अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देने अनिवार्य है ।दौड़भाग , शादी की तैयारियां और तनाव के चलते डाईट पर कंट्रोल करना मुश्किल होता है ।यहाँ फोत्रिस हास्पिटल की चीफ दाइटीशियन किरण दलाल और क्लिनिकल न्यूत्रीशानिस्ट निधि सरीन बता रही है ,भावी दुल्हन अपनी डाईट का प्लान कैसे करें की वजन नियंत्रित रहे ।

आमतौर पर लड़कियों का वजन शादी से पहले तीन कारण से बढ़ता है - भागदौड तनाव और लगातार पार्टी ।इसी तरह शादी के बाद वजन बढ़ने के तीन मुख्य कारण है - प्रेगनेंसी , शादी के बाद परिवार , घर और एनी जिम्मेदारयों में इतना व्यस्त हो जाना की खानपान पर ध्यान न दे पाना , अपने पाती के साथ उनकी तरह ही पोर्शन लेना , जाने -अनजाने वे एक्स्ट्रा कैलरी ले लेती है । एक बार फैट शरीर पर चढ़ने लगता है तो उसे रोकना काफी मुश्किल होता । बेहतर होगा अगर पहले से ही खान पान की कुछ आदतों पर अमल किया जाए और डाईट प्लान बनाया जाए ।तो अगर आप शादी से पहले और बाद में अतिरिक्त वजन को हटाना चाहिती है तो यहाँ दी गई बातों पर गौर फरमाएं ।

शादी से पहले :

  • अपने दिन की शुरूआत नींबू मिले गर्म पानी से करें । इसमें क्रश किए हुए पुदीने के पत्ते भी मिला सकती है ।

  • जब भूख लगे सूप या जूस पाई ।

  • अगर आप कैलरी में कटौती करना चाहती है तो सबसे पहले चीनी , आईसक्रीम , केक , पस्ती और प्रोसेस्ड फूड को अपने आहार से हटाएं ।

  • रोजाना के हिसाब से अपना लक्ष्य बनाएं । प्रतिदिन आपको 1 ,600 कैलरी मिलनी चाहिए , लेकिन इससे कम करने की कोशिश करें । यह ध्यान रखे की दिनभर में आपको कम तीन मील्सऔर दो स्नैक्स मसलन फल या रोस्टेड नट्स या फिर स्टीम्ड फर्मेंटेड फूड लेने है ।

  • दिन की शुरूआत के लिए ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी है । इसमें मीठे से बचे । लो फैट मिल्क प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें । 1-2 सर्विंग मल्तीग्रेन सीरियल , स्प्राउट्स या बींस और कटे हुए फल लें ।इससे आपको ब्रेकफास्ट से लगभग 300 कैलरी मिलेगी ।बाकी कैलरी आपको लंच और डिनर से मिलनी चाहिए ।

  • लंच / डिनर में होल्ग्रेन सीरियल , दालों या ग्रिल्ड फिश या चिकेन के एक तुकडे के साथ लो फैट प्रोबयूटिक दही , सैलेड और एक बोल स्टीम्ड रंगीन सब्जियां ले ।

  • शादी से एक महीने पहले अचानक 5 किलो वजन घटाना भी ठीक नहीं है । अगर एसा चाहिती है तो इसके लिए आपको शादी से छह महीने पहले अपने आहार पर ध्यान देना होगा । इसका सीधा असर आपके बाल और त्वचा पर पडेगा ।

  • अच्छी त्वचा के लिए गाजर , एप्रिकांट , पीले और नारंगी रंग के फल व सब्जियां खाएं ।पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों को प्राथमिकता दें । टमाटर खाएं , उसमें लाइकोपीन पाया जाता है ।

  • अखरोट खाएं । इसमें ओमेगा फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है , जो बालों को चमकदार और त्वचा को बेहतर बनाता है ।

  • दिनभर में 4 - 5 कप ग्रीन टी पिएँ ।

  • इस दौरान एल्कोहाल व धूमपान से दूर रहे ।

  • सैलेड , सूप और फलों का सेवन करने से फैटी एसिड मिलेगा , जिससे आपको एनर्जी भी मिलेगी ।

  • त्वचा में पानी की कमी न होने दें । दिनभर में पर्याप्त पेय पदार्थ , जूस , सूप , पानी खूब पिए ।


शादी के बाद :

  • जो कुछ भी खाएं धीरे - धीरे और खुश होकर खाएं । टीवी के सामने या बात करते हुए न खाएं । धीमी गाति से खाने से आपको से आपको जल्दी ही पेट भरा हुआ महसूस होगा ।

  • ब्रेकफास्ट एकसाथ करें । जिसमे एक बोल फ्रूट्स म्यूजली या फिर ओटमील हो ।

  • लंच में हरी सब्जियों वाला सूप जरूर ले । नान वेजिटेरियन है तो प्रान्स को प्राथमिकता दें ।

  • लंच में हरी सब्जियों वाला सूप जरूर लें । नान वेजिटेरियन है तो प्रान्स को प्राथमिकता दें ।

  • उस समय कतई न खाएं जब आप तनाव या गुस्से में हो

  • ब्लैक काफी , जंक फुड , चाय से जहां तक हो सके दूर रहें । रिफैंड प्रोडक्ट से बचे ।

  • पार्टनर के साथ एक्स्र्सैज जरूर करें । फिजिकल एक्टिविटी बढाने से दिल की सेहत अच्छी रहती है ।

  • कोलेस्ट्राल और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है । डिनर के बाद रोजाना एक घंटा टहलने का लक्ष्य बनाएं .

  • एक - दूसरे के पोर्शन को मैच न करें , क्योंकी पुरुषों को दिनभर में अलग कैलरी और स्त्रियों को भिन्न कैलरी की जरूरत होती है |

  • जो भी खाएं पौष्टिक हो , लेकिन खाने की मात्रा हमेशा ध्यान में रखे ।

  • सब कुछ खाएं , लेकिन सीमित मात्रा में ताकि आप फिट और स्वस्थ रहे । संतुलित डाईट लें । खाने पर नियंत्रण का यह मतलब नहीं की आप एक्सरसाइज करना छोड़ दें ।साथ - साथ वह भी जरूरी है ।


 

Tuesday, October 23, 2012

कम पेट के लिए खाद्य नियंत्रण

अकसर लोग वजन कम करने में लगे रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं वजन कम करने से भी ज्यादा जरूरी होता है, आपका कमर और पेट को कम करना। एकबारगी आप अपना वजन तो आसानी से कम कर सकते हैं लेकिन सबसे अधिक जो समस्या आती है वो है कमर ओर पेट के आसपास की चर्बी को हटाना। क्या आप जानते हैं कुछ लोग मोटे नहीं होते लेकिन उनके पेट के आसपास काफी चर्बी जमा हो जाती है जिससे वे परेशान रहने लगते हैं और अपने आपको मोटा समझने लगते हैं। वैसे भी खासकर लड़किया कमर और पेट के आसपास जमी चर्बी के कारण टाइट फिटिंग के कपड़े नहीं पहन पातीं, यदि वे ऐसा करती भी हैं तो ये लुक उनकी पर्सनैलिटी को सूट नहीं करता। यदि आप चाहते है कि आपके पेट और कमर आसानी से कम हो जाएं तो आप आसानी से कुछ टिप्स अपना सकते हैं। आइए जानें कमर और पेट कम करने के तरीके।

  • सप्ताह में एक दिन उपवास करें- यदि आप खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं और अपनी इस आदत से भी परेशान हैं तो आपको चाहिए कि आप सप्ताह में कम से कम एक बार उपवास जरूर करें। आप चाहे तो सप्ताह में एक दिन तरल पदाथरें पर भी रह सकते हैं। इसमें आप पानी, नींबू पानी, दूध, जूस, सूप इत्यादि चीजों को प्राथमिकता देंगे। आप चाहे तो एक दिन सलाद या फलाहार को भी दे सकते हैं। जिसमें आप सिर्फ फल या सलाद ही खाएंगे। सलाद खाकर वजन घटाने में आपको मदद मिलगी।

  • योगासन है जरूरी- कमर और पेट कम करने के लिए आपको नियमित रूप से सुबह उठकर योग करना चाहिए, ऐसे में आपको कुछ ऐसे आसनों को शामिल करना होगा जिनसे आपके पेट और कमर को कम करने में मदद मिलें। वैसे भी आप योग से निरोग रह सकते है, आपको रोजाना सूर्य नमस्कार की सभी क्त्रियाएं, सर्वागासन, भुजंगासन, वज्रासन, पदमासन, शलभासन इत्यादि को करना चाहिए।

  • खान-पान संतुलित रखें - यदि आप जंकफूड खूब खाते हैं या फिर आपको तैलीय खाना बहुत पसंद है तो आपको चाहिए आप ऐसे खाने से बिल्कुल परहेज करें। सामान्य आटे के बजाय जौ और चने के आटे को मिलाकर चपाती खाएं, इससे आप जल्द ही स्लिम ट्रिम होंगे।

  • शहद है फायदेमंद- शहद के कई गुण है। यह ना सिर्फ मोटापा बढ़ाने बल्कि मोटापा कम करने में भी कारगार है। आपको चाहिए कि आप रोजाना सुबह पानी के साथ शहद का सेवन करें। इससे आप जल्द ही कमर और पेट को कम करेंगे।

  • ग्रीन टी भी है मददगार- आप चाय पीने के बहुत शौकीन हैं और आप चाहते हैं कि आप जल्द् ही अपना वजन घटाएं तो आपको चाहिए कि आप दूध की चाय पीने के बजाय एंटीऑक्सीडेंट भरपूर ग्रीन टी, लेमन टी या फिर ब्लैक टी लें। दरअसल, दूध की चाय पीने से आपके मोटापा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

  • सुबह-शाम करें सैर- आपको कमर और पेट के आसपास की चर्बी को दूर करने के लिए चाहिए कि रोजाना सुबह उठकर कुछ देर सैर पर जाएं और रात के खाने के बाद भी सैर करना ना भूलें। इससे आप अतिरिक्त कैलोरी को आसानी से कम कर पाएंगे और पेट-कमर की अतिरिक्त चर्बी को कम करें।

प्रेगनेंसी में यह फल न खाएं

गर्भावस्था में सेहतमंद रहने के लिए उचित आहार लेना बेहद जरूरी होता है। सही आहार से महिला का स्वास्थ्य तो अच्छा रहता ही है साथ ही साथ गर्भस्थ्य शिशु का भी शारीरिक और मानसिक विकास सही तरीके से होता है। गर्भावस्था में क्या खाए जाए से जरूरी यह जानना है कि क्या न खाया जाए। घर-परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यह राय देती रहती हैं। चलिए जानते हैं कि गर्भावस्था में कौन सी सब्जियों और फलों से परहेज करना चाहिए।

आइये जानें, गर्भवस्था के दौरान कौन-कौन से फल और सब्जिया ना खाएं-

गर्भावस्था के दौरान इन फलों के सेवन बचें-

पपीता खाने से बचें :   कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान पपीता ना खाए। पपीता खाने से प्रसव जल्दी होने की संभावना बनती है। पपीता, विशेष रूप से अपरिपक्व और अर्द्ध परिपक्व लेटेक्स जो गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए जाना जाता है को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था के तीसरे और अंतिम तिमाही के दौरान पका हुआ पपीता खाना अच्छा होता हैं। पके हुए पपीते में विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों की प्रचुरता होती है, जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों जैसे कब्ज को रोकने में मदद करता है। शहद और दूध के साथ मिश्रित पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए और विशेष रूप से स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक होता है।

अनानस से बचें :

गर्भावस्था के दौरान अनानस खाना गर्भवति महिला के स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। अनानास में प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो गर्भाशय ग्रीवा की नरमी का कारण बन सकती हैं, जिसके कारण जल्दी प्रसव होने की सभावना बढ़ जाती है। हालाकि, एक गर्भवती महिला अगर दस्त होने पर थोड़ी मात्रा में अनानास का रस पीती है तो इससे उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वैसे पहली तिमाही के दौरान इसका सेवन ना करना ही सही रहेगा, इससे किसी भी प्रकार के गर्भाशय के अप्रत्याशित घटना से बचा जा सकता है।

अंगूर से बचें : डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को उसके गर्भवस्था के अंतिम तिमाही में अंगूर खाने से मना करते है। क्योंकि इसकी तासिर गरम होती है। इसलिए बहुत ज्यादा अंगूर खाने से असमय प्रसव हो सकता हैं। कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान अंगूर ना खाए।

गर्भावस्था के दौरान इन सब्जियों से बचें : गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह ये होती है कि वो कच्चा या पाश्चरीकृत नहीं की हुई सब्जी और फल ना खाए। साथ? ही ये भी महत्वपूर्ण है कि आप जो भी खाए वो अच्छे से धुला हुआ और साफ हो। ये गर्भावस्था के दौरान आपको संक्त्रमण से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

फलों और सब्जियों को गर्भावस्था आहार का एक अभिन्न अंग माना जाता है। इसलिए जम कर खाए लेकिन साथ ही इन कुछ बातों का ध्यान भी जरूर रखें, और बचे रहे गर्भावस्था के जटिलओं से।

Monday, October 22, 2012

गर्भावस्था में घातक है सेलफोन

मोटापा कम करने की बेरियैट्रिक सर्जरी अब मधुमेह के बाद बांझपन का इलाज भी साबित हुई है। प्रजनन केंद्रों में बांझपन का इलाज कराने आई महिलाओं को अब मां बनने के पहले छरहरी बनने के लिए बेरियैट्रिक सर्जरी की सलाह भी दी जाने लगी है। बेरियैट्रिक सर्जरी से बांझपन दूर तो हो रहा है लेकिन सर्जरी के बाद कम से कम 2 साल इंतजार करना पड़ता है। 

बेरियैट्रिक सर्जरी अब मधुमेह की तरह ही बांझपन का भी प्रभावी इलाज साबित हो रहा है। 2 साल पहले जिन्होंने मां बनने के लिए यह सर्जरी कराई थी, वे अब गर्भवती हो रही हैं। हम सर्जरी के बाद 2 साल रुकने की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि सर्जरी के बाद मां के शरीर में बी कॉम्प्लेक्स की थोड़ी कमी हो जाती है। पेट में आने वाले बच्चे के विकास में कोई कमी न रह जाए, इसलिए एहतियात के तौर पर 2 साल इंतजार करने की सलाह देते हैं। 
मोटापा महिलाओं के मां बनने के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा खड़ी कर रहा है। मोटी महिलाएं पहले तो बड़ी मुश्किल से गर्भवती हो पाती हैं। गर्भ ठहर भी गया तो कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि गर्भ धारण करने के बाद भी चर्बी न चढ़ जाए। मोटापा गर्भवती की जान भी ले सकता है। पेट में पल रहे बच्चे को भी हानि पहुंचाता है।

मैक्रोसोमा नामक एक स्थिति होती है जिसमें पेट में पल रहा बच्चा ही काफी मोटा हो जाता है। एक ताजा स्टडी में यह भी पाया गया है कि मोटी महिलाओं से जन्म लेने वाले 29 प्रतिशत बच्चे 4 साल की उम्र होते-होते मोटे हो जाते हैं। 

शोध अध्ययनों से यह बात साफ हो गई है कि 70 प्रतिशत से अधिक मोटी महिलाओं को गर्भ धारण करने में समस्या पैदा होती है। महिलाओं में मोटापा उन्हें बांझपन की राह पर धकेल रहा है। कई शोधों से यह बात सामने आई है कि मोटापा गर्भ धारण करने के रास्ते में बड़ा अड़चन बन रहा है।

नवजात शिशु का देखभाल

नवजात शिशुओं में लगभग 90 प्रतिशत की मृत्यु ऐसे कारणों से होती है, जिनसे बच्चे को बचाया जा सकता है।

जन्म के समय वज़न कम होना।
समय पूर्व जन्म।
जन्म के समय बच्चे का सांस न लेना।
संक्रमण, पीलिया।

नवजात शिशु की देखभाल का सबसे महत्वपूर्ण समय मां के गर्भ के दौरान होता है। गर्भ के दौरान यदि मां स्वस्थ है, उसका खानपान उचित हो और गर्भ से संबंधित कोई विकार न हो तो बच्चा जन्म के समय स्वस्थ रहता है। चीनी लोगों का मानना है कि जन्म के समय बच्चे की उम्र 9 महीने की होती है, जबकि हम जन्मदिन बच्चे के पैदा होने के वक्त मनाते हैं। 

इसका मतलब यह है कि कंसेप्शन के पहले दिन से ही बच्चे का जीवन शुरू हो जाता है और तभी से उसका पूरा-पूरा ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस दौरान की गई देखभाल से ही शिशु जन्म के समय स्वस्थ होगा। इसी तरह इस दौरान बरती गई लापरवाही का नतीजा भी जन्म के समय पेश आने वाली जटिलताओं के रूप में सामने आता है।

नवजात शिशु की देखभाल के लिए मां को समुचित जानकारी मेडिकल व पेरामेडिकल स्टाफ द्वारा दी जानी चाहिए। जहां तक संभव हो सके, प्रसव हमेशा अच्छे अस्पताल में ही होना चाहिए, ताकि चिकित्सक और नर्स की सेवाएं मिल सकें। इससे जटिलताओं की आशंका कम हो जाती है। किसी भी प्रकार की जटिलता पेश आने पर हॉस्पिटल में तुरंत उससे निपटने की व्यवस्था की जा सकती है। 

जन्म के आधे घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध मिलना चाहिए। जीवन के पहले 6 महीनों तक बच्चे के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। इस दौरान मां के दूध के अलावा कोई भी चीज न दें। कई लोग बच्चे को पानी, घुट्टी, शहद, नारियल पानी, चाय या गंगा जल पिलाने की गलती करते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। 

शुरुआती 6 महीनों तक माता का दूध पीने वाले बच्चे अच्छी तरह विकसित होते हैं। संक्रमण से उनका बचाव होता है। साथ ही उनमें अपने माता-पिता के प्रति भावनात्मक लगाव लंबे समय तक बना रहता है। 6 महीने की उम्र के बाद बच्चे को माता के दूध के अलावा ऊपरी आहार भी देना चाहिए।

जन्म के तुरंत बाद शिशु को पोलियो की दवा, बीसीजी और हिपेटाइटिस का टीका देना चाहिए। शिशु को ठंड से बचाने के लिए उसे पूरे कपड़े पहनाने चाहिए। कपड़ों के साथ ही उसे टोपी, ग्लवज और मोजे पहनाकर रखना चाहिए। बच्चे को मां के समीप रखना चाहिए, क्योंकि मां के शरीर से बच्चे को गर्मी मिलती है। 

स्वच्छता...
मां को स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना चाहिए ताकि बच्चा गंदगी व संक्रमण की चपेट में न आ सके। गद्दे और चादर साफ होने चाहिए। मां और बच्चे दोनों के कपड़े साफ धुले हुए होने चाहिए। बच्चे और मां को रोज नहाना चाहिए। मां के नाखूनों में मैल जमा नहीं होना चाहिए।

मालिश... 
बच्चे की मालिश करना फायदेमंद होता है, यह वैज्ञानिक रूप सही माना जाता है। मालिश हल्के हाथ से करना चाहिए। मालिश दोपहर के समय करना चाहिए, ताकि बच्चे को ठंड न लगे।क्या पहनाएं... 
गर्मी का मौसम हो तो नवजात को कॉटन के ढीले कपड़े पहनाने चाहिए। बच्चे का शरीर पूरी तरह ढंका होना चाहिए, ताकि उसे ठंड न लग पाए और मच्छरों से बचाव हो सके। गर्मी में बच्चे को ऊनी कपड़े पहनाने की आवश्यकता नहीं होती है। मौसम में ठंडक होने पर ही ऊनी कपड़े पहनाएं। ठंड के मौसम में ऊनी कपड़े पहनाएं, लेकिन अंदर पतला, नर्म कॉटन कपड़ा जरूर पहनाएं। भ्रांति और तथ्य... 
भ्रांति : बच्चों की आंखों में काजल लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि काजल लगाने से बच्चों की आंखें बड़ी होती हैं। तथ्य : बच्चों को आंखों में काजल नहीं लगाना चाहिए यह नुकसानदायक होता है।



गर्भवती महिलाओं लीजिए मछली का तेल

जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में मछली का तेल लेती हैं उनके बच्चों को एक्जिमा नहीं होता। यह बात एक ताजा अध्ययन में सामने आई है। एडिलेड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ओमेगा-3 की अतिरिक्त खुराक लेती हैं उनके बच्चों की त्वचा रूखी नहीं होती।

इसके अलावा इन बच्चों में जन्म दिन से पहले एक्जिमा को नहीं पनपने देने के लिए 50 प्रतिशत तक क्षमता ज्यादा हो जाती है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ओमेगा-3 मां से बच्चे में प्लेसेंटा के माध्यम से होता है। यह बच्चों में इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है जो एक्जिमा से बच्चों को बाद में बचाता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 706 ऐसी प्रेग्नेंट महिलाओं पर अध्ययन किया जिनका पारिवारिक इतिहास एलर्जी से युक्त था। इनमें से आधी महिलाओं को बच्चा होने तक मछली के तेल का सप्लीमेंट दिया गया जबकि आधी महिलाओं को वनस्पति तेल दिया गया।

अध्ययन में देखा गया कि जिन महिलाओं को मछली के तेल का सप्लीमेंट दिया गया उनके बच्चों में एक्जिमा नहीं था जबकि जिन्हें वनस्पति तेल दिया गया उनमें ज्यादातर बच्चों को एक्जिमा था। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी इस संबंध में और अध्ययन की जरूरत है जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान मछली के तेल लेने से बच्चे अस्थमा और हेफीवर से भी बचे रह सकते हैं।