अंगूर को संस्कृति में द्राक्षा , बंगला में बेदाना या मनेका , गुजराती में धाराख , फारसी में अंगूर , अरबी में एनवजबीब , इंग्लीश में ग्रेप रेजिन्स तथा लैटिन में वितिस्विनिफेरा कहते है ।
अंगूर के ओषधीय गुण
प्रत्येक 100 ग्राम अंगूर में लगभग 85 .5 ग्राम पानी , 10 .2 ग्राम कार्बोहैद्रेट्स ,0 .8 ग्राम प्रोटीन , 0 .1 ग्राम वसा , 0 .0 3 ग्राम कैल्शियम , 0 .0 2 ग्राम फास्फेरस , 0 .4 मिलीग्राम आयरन , 50 मिलीग्राम विटामिन - बी , 10 मिलीग्राम विटामिन-सी , 8 . 4 मिलीग्राम विटामिन - पी ,15 यूनिट विटामिन - ए, 100 से 600 मिलीग्राम टैनिन , 0 .4 1 - 0 . 7 2 ग्राम टार्टरिक आम्ल पाया जाता है ।
इसके अतिरिक्त सोडियम क्लोराइड , पोटेशियम क्लोराइड ,पोटाशियम सल्फेट ,मैग्नीशियम तथा एल्युमिन जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी इसमें भरपूर मात्रा मोजूद होते है । अंगूर में पाई जाने वाली शर्करा पूरी तरह से ग्लूकोज से बनी होती है , जो कुछ किस्मों में 11 से 12 प्रतिशत तक होती है और कुछ में 50 प्रतिशत । यह शर्करा पूरी तरह से ग्लूकोज से बनी होती है ,जो कुछ किस्मों में पहुंचकर एनर्जी प्रदान करती है । इसीलिए इसे हम एक आदर्श टानिक की तरह प्रयोग में लाते है।अंगूर का सेवन थकान को दूर कर शरीर को चुस्त - फुर्त व मजबूत बनाता है ।
अंगूर में क्षारीय तत्व बढाने की अच्छी क्षमता के कारण ही शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता ,मोटापा ,जोड़ों का दर्द , रक्त का थक्का जमना , दमा , नाडी की समस्या व त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना अदि स्थितियों में इसका सेवन लाभकारी होता है ।
अंगूर का सेवन आंत ,लीवर व पाचन संबंधी एनी रोगों ,मुह में कडवापन रहना ,खून की उल्टी होना ,गुर्दे की काय क्षमता में कमी ,कब्जियत , मूत्र की बीमारी अतिसार कृमी रोग ,टीबी आदि रोगों में विशेष रूप से लाभकारी होता है ।
- यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है ।
- अंगूर मियादी बुखार , मानसिक परेशानी , पाचन की गड़बड़ी आदि में भी काफी लाभकारी है ।
- अंगूर में एक विशेष गुण यह भी है की यह शरीर में मोजूद विशेले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है । यह एक अछा रक्तशोधक व रक्त विकारों को दूर करने वाला फल है ।
- अंगूर रक्त की क्षारीयता को संतुलित करता है क्योंकि रक्त में अम्ल व क्षार का अनुपात 20 . 80 होना चाहिए । यदि किसी कारनावश शरीर में अम्लता बढ़ जाए तो वह हानिकारक साबित होता है । अंगूर बढ़ती अम्लता को आसानी से कंट्रोल करता है ।
- अंगूर का 200 ग्राम रस शरीर को उतनी ही क्षारीयता प्रदान करता है , जितना की एक किलो 200 ग्राम बाइकार्बोनेट सोडा , हालांकि सोडा इतनी अधिक मात्रा में लिया नहीं जा सकता ।
- अंगूर के रस को कलई के बर्तन में पकाकर गाढा करके सोते समय आँखों में लगाने से जाला ,फूला आदि नेत्र रोग दूर हो जाते है ।
- अंगूर की बेल काटने से जो रस निकलता है ,वह त्वचा रोगों में लाभकारी होता है ।
- अंगूर के पत्तों का अर्क एक्से तीन चम्मच तक्लेनेपर व बवासीर के मस्सों पर लगाने पर काफी लाभ्मिलता है ।500 मिलीग्राम से एक ग्राम तक पत्तों की भास्म्शाहद से लेने से भी बवासीर में लाभ मिलता है ।