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Sunday, November 4, 2012

सही पोषक तत्वों हो रही है

समुचित मात्रा में पोषण न मिलने से शरीर के सभी अंगों और उनकी कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस स्थिति में व्यक्ति कई रोगों से भी ग्रस्त हो सकता है, जैसे वह :

* रक्त की कमी [एनीमिया] और रतौंधी [नाइट ब्लाइंडनेस] आदि रोगों से ग्रस्त हो सकता है। आयरन की कमी से एनीमिया और विटामिन ए की कमी से नेत्र और उसकी ज्योति क्षीण होने लगती है।

nutrients* पोषक तत्वों, जैसे-कैल्शियम के अभाव में हड्डिया और जोड़ कमजोर होने लगते हैं। कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है। इस रोग में जरा सा आघात लगने पर हड्डी टूट जाती है।

* सही पोषण के अभाव में शरीर का रोग प्रतिरोधक तत्र [इम्यून सिस्टम] कमजोर हो जाता है। इस कारण व्यक्ति शीघ्र ही विभिन्न बीमारियों के सक्रमण का शिकार हो जाता है।

* हृदय की सेहत के लिए पोटैशियम लाभप्रद है। इस तत्व के अभाव में हृदय की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से कार्य नहीं करती।

* पोषक तत्वों के अभाव में गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु पर खराब असर पड़ता है।

* शरीर का स्नायु तत्र [नर्वस सिस्टम] कमजोर होने से हाथ व पैरों में कंपन आदि शिकायतें पकड़ सकती हैं।

* व्यक्ति की मानसिक क्षमता भी क्षीण होने लगती है।

सामान्य परिवार का पौष्टिक भोजन

आमतौर पर सामान्य परिवार के भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त आहार 62 से 65 प्रतिशत, प्रोटीन [10 से 15 प्रतिशत], वसा [10 से 15 प्रतिशत] और शेष भाग विटामिस और मिनरल्स से सबधित होना चाहिए। उम्र, शारीरिक श्रम, शारीरिक सरचना या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी के कारण पोषक तत्वों के उपर्युक्त प्रतिशत में परिवर्तन आ सकता है। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों को आहार के सदर्भ में इन बातों पर ध्यान देना चाहिए :

* कार्बोहाइड्रेट्स के लिए अनाज से बनी रोटियों व चावल को थाली में स्थान दें।

* अगर आप मासाहारी नहींहैं, तो प्रोटीन के लिए दोपहर के भोजन की थाली में दाल जरूर होनी चाहिए।

* ब्रेकफास्ट में दूध और इससे बने उत्पाद लिए जा सकते हैं।

* अंकुरित अनाजों [स्प्राउट्स] के रूप में चना, सोयाबीन और मूंग की दाल का सेवन अत्यत लाभप्रद है।

* भोजन में सलाद को शामिल करें।

* अलग-अलग रंगों के मौसमी फलों व सब्जियों का बदल-बदलकर प्रयोग करें।

* मौसम के अनुसार फलों के रस और सूप का सेवन करें।

कम खर्च में पौष्टिक आहार  : नई दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर डाइटीशिन रीतिका समद्दार के अनुसार यह धारणा बिल्कुल गलत है कि पौष्टिक आहार सिर्फ महंगे खाद्य पदार्र्थो, जैसे - बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता, मास व मछली आदि से ही प्राप्त होते हैं। एक आम आदमी पौष्टिक आहार को मौसमी फलों व सब्जियों [जो महंगी नही होतीं], दूध, सोयाबीन आदि से प्राप्त कर सकता है। मौसमी फल व सब्जिया विटामिस व मिनरल्स की अच्छी स्रोत हैं, जिनकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। केले में पाये जाने वाले पोषक तत्व सेब से जरा भी कम नहीं हैं। हालाकि दोनों ही फलों में पोषक तत्व अलग-अलग होते हैं।

प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोत दालें सोयाबीन, दूध, मूंगफली आदि भी महंगी कीमत वाले खाद्य पदार्थो के गुणों से किसी मायने में कम नहीं हैं। इसी तरह मिनरल्स व विटामिस को काफी हद तक सस्ती हरी सब्जियों [जैसे- पालक, लौकी, तरोई, सेम, बदगोभी, मूली, मेथी, बथुआ आदि] से प्राप्त कर सकते हैं।

अलसी का जवाब नहीं :  विश्व स्वास्थ्य सगठन ने अलसी [फ्लेक्स सीड] के गुणों के कारण इसे सर्वश्रेष्ठ पौष्टिक आहार 'सुपर फूड्स' की श्रेणी में शामिल किया है। अलसी में अनेक पोषक तत्व, जैसे- प्रोटीन, क्रोमियम, जिंक, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन सिलेनियम, विटामिन ए, विटामिन बी. आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। अलसी को हल्का भूनकर और फिर इसका चूर्ण बनाकर 5 से 10 ग्राम [एक से दो चम्मच] मात्रा में सुबह-शाम पानी या दूध के साथ सेवन करना चाहिए। अलसी महंगी भी नहींहै।

पोषक तत्वों का भडार सोयाबीन  :

सोयाबीन का प्रयोग अंकुरित बीज, दाल, दूध, दही और 'बड़ी' के रूप में किया जाता है। यह भी महंगी नहीं है और इसका प्रयोग सामान्य से लेकर खास व्यक्ति भी कर सकता है। सोयाबीन में मूलत: प्रोटीन, विटामिन ए, बी, ई और बी काप्लेक्स भी पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फास्फोरस सरीखे मिनरल्स भी पाये जाते हैं।

पोषण से सबधित मिथक  :

इस सदर्भ में व्याप्त मिथकों को तथ्यों की रोशनी में देखा जाना चाहिए। कुछ मिथ और उनसे सबधित तथ्य इस प्रकार हैं :

मिथक : भोजन करने के तुरंत बाद जमकर पानी पीना चाहिए।

तथ्य : खाने के तुरंत बाद आधा गिलास तक पानी पिया जा सकता है। खाने के तुरंत बाद जमकर यानी एक गिलास या इससे अधिक मात्रा में पानी पीने से पाचक रसों [डाइजेस्टिव एंजाइम्स] की सक्रियता कम हो जाती है। इस कारण पाचन प्रक्रिया मद पड़ जाती है। हा, खाने के 35 मिनट बाद पानी प्यास के अनुसार पिया जा सकता है।

मिथक : फलों के साथ दूध नहीं लिया जा सकता।

तथ्य : सिर्फ खट्टें फलों के साथ दूध नहीं लेना चाहिए। ऐसा करने से पाचन तत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, लेकिन शेष फलों के साथ दूध ले सकते हैं। वजन बढ़ाने के लिए केले के साथ दूध लेने का चलन पहले से ही है।

मिथक : दूध और दही को साथ नहीं ग्रहण करना चाहिए।

तथ्य : एक बार खाने के बाद जिन लोगों को हाजमे से सबधित कोई दिक्कत महसूस नहीं होती या फिर जो लोग इन दोनों को ही साथ में हजम कर सकते हैं, वे इन्हें साथ-साथ ग्रहण कर सकते हैं।