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Tuesday, October 23, 2012

प्रेगनेंसी में यह फल न खाएं

गर्भावस्था में सेहतमंद रहने के लिए उचित आहार लेना बेहद जरूरी होता है। सही आहार से महिला का स्वास्थ्य तो अच्छा रहता ही है साथ ही साथ गर्भस्थ्य शिशु का भी शारीरिक और मानसिक विकास सही तरीके से होता है। गर्भावस्था में क्या खाए जाए से जरूरी यह जानना है कि क्या न खाया जाए। घर-परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यह राय देती रहती हैं। चलिए जानते हैं कि गर्भावस्था में कौन सी सब्जियों और फलों से परहेज करना चाहिए।

आइये जानें, गर्भवस्था के दौरान कौन-कौन से फल और सब्जिया ना खाएं-

गर्भावस्था के दौरान इन फलों के सेवन बचें-

पपीता खाने से बचें :   कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान पपीता ना खाए। पपीता खाने से प्रसव जल्दी होने की संभावना बनती है। पपीता, विशेष रूप से अपरिपक्व और अर्द्ध परिपक्व लेटेक्स जो गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए जाना जाता है को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था के तीसरे और अंतिम तिमाही के दौरान पका हुआ पपीता खाना अच्छा होता हैं। पके हुए पपीते में विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों की प्रचुरता होती है, जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों जैसे कब्ज को रोकने में मदद करता है। शहद और दूध के साथ मिश्रित पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए और विशेष रूप से स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक होता है।

अनानस से बचें :

गर्भावस्था के दौरान अनानस खाना गर्भवति महिला के स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। अनानास में प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो गर्भाशय ग्रीवा की नरमी का कारण बन सकती हैं, जिसके कारण जल्दी प्रसव होने की सभावना बढ़ जाती है। हालाकि, एक गर्भवती महिला अगर दस्त होने पर थोड़ी मात्रा में अनानास का रस पीती है तो इससे उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वैसे पहली तिमाही के दौरान इसका सेवन ना करना ही सही रहेगा, इससे किसी भी प्रकार के गर्भाशय के अप्रत्याशित घटना से बचा जा सकता है।

अंगूर से बचें : डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को उसके गर्भवस्था के अंतिम तिमाही में अंगूर खाने से मना करते है। क्योंकि इसकी तासिर गरम होती है। इसलिए बहुत ज्यादा अंगूर खाने से असमय प्रसव हो सकता हैं। कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान अंगूर ना खाए।

गर्भावस्था के दौरान इन सब्जियों से बचें : गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह ये होती है कि वो कच्चा या पाश्चरीकृत नहीं की हुई सब्जी और फल ना खाए। साथ? ही ये भी महत्वपूर्ण है कि आप जो भी खाए वो अच्छे से धुला हुआ और साफ हो। ये गर्भावस्था के दौरान आपको संक्त्रमण से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

फलों और सब्जियों को गर्भावस्था आहार का एक अभिन्न अंग माना जाता है। इसलिए जम कर खाए लेकिन साथ ही इन कुछ बातों का ध्यान भी जरूर रखें, और बचे रहे गर्भावस्था के जटिलओं से।

Monday, October 22, 2012

गर्भावस्था में घातक है सेलफोन

मोटापा कम करने की बेरियैट्रिक सर्जरी अब मधुमेह के बाद बांझपन का इलाज भी साबित हुई है। प्रजनन केंद्रों में बांझपन का इलाज कराने आई महिलाओं को अब मां बनने के पहले छरहरी बनने के लिए बेरियैट्रिक सर्जरी की सलाह भी दी जाने लगी है। बेरियैट्रिक सर्जरी से बांझपन दूर तो हो रहा है लेकिन सर्जरी के बाद कम से कम 2 साल इंतजार करना पड़ता है। 

बेरियैट्रिक सर्जरी अब मधुमेह की तरह ही बांझपन का भी प्रभावी इलाज साबित हो रहा है। 2 साल पहले जिन्होंने मां बनने के लिए यह सर्जरी कराई थी, वे अब गर्भवती हो रही हैं। हम सर्जरी के बाद 2 साल रुकने की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि सर्जरी के बाद मां के शरीर में बी कॉम्प्लेक्स की थोड़ी कमी हो जाती है। पेट में आने वाले बच्चे के विकास में कोई कमी न रह जाए, इसलिए एहतियात के तौर पर 2 साल इंतजार करने की सलाह देते हैं। 
मोटापा महिलाओं के मां बनने के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा खड़ी कर रहा है। मोटी महिलाएं पहले तो बड़ी मुश्किल से गर्भवती हो पाती हैं। गर्भ ठहर भी गया तो कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि गर्भ धारण करने के बाद भी चर्बी न चढ़ जाए। मोटापा गर्भवती की जान भी ले सकता है। पेट में पल रहे बच्चे को भी हानि पहुंचाता है।

मैक्रोसोमा नामक एक स्थिति होती है जिसमें पेट में पल रहा बच्चा ही काफी मोटा हो जाता है। एक ताजा स्टडी में यह भी पाया गया है कि मोटी महिलाओं से जन्म लेने वाले 29 प्रतिशत बच्चे 4 साल की उम्र होते-होते मोटे हो जाते हैं। 

शोध अध्ययनों से यह बात साफ हो गई है कि 70 प्रतिशत से अधिक मोटी महिलाओं को गर्भ धारण करने में समस्या पैदा होती है। महिलाओं में मोटापा उन्हें बांझपन की राह पर धकेल रहा है। कई शोधों से यह बात सामने आई है कि मोटापा गर्भ धारण करने के रास्ते में बड़ा अड़चन बन रहा है।

गर्भवती महिलाओं लीजिए मछली का तेल

जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में मछली का तेल लेती हैं उनके बच्चों को एक्जिमा नहीं होता। यह बात एक ताजा अध्ययन में सामने आई है। एडिलेड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ओमेगा-3 की अतिरिक्त खुराक लेती हैं उनके बच्चों की त्वचा रूखी नहीं होती।

इसके अलावा इन बच्चों में जन्म दिन से पहले एक्जिमा को नहीं पनपने देने के लिए 50 प्रतिशत तक क्षमता ज्यादा हो जाती है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ओमेगा-3 मां से बच्चे में प्लेसेंटा के माध्यम से होता है। यह बच्चों में इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है जो एक्जिमा से बच्चों को बाद में बचाता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 706 ऐसी प्रेग्नेंट महिलाओं पर अध्ययन किया जिनका पारिवारिक इतिहास एलर्जी से युक्त था। इनमें से आधी महिलाओं को बच्चा होने तक मछली के तेल का सप्लीमेंट दिया गया जबकि आधी महिलाओं को वनस्पति तेल दिया गया।

अध्ययन में देखा गया कि जिन महिलाओं को मछली के तेल का सप्लीमेंट दिया गया उनके बच्चों में एक्जिमा नहीं था जबकि जिन्हें वनस्पति तेल दिया गया उनमें ज्यादातर बच्चों को एक्जिमा था। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी इस संबंध में और अध्ययन की जरूरत है जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान मछली के तेल लेने से बच्चे अस्थमा और हेफीवर से भी बचे रह सकते हैं।

Thursday, October 18, 2012

7 गर्भावस्था मिथकों

गर्भावस्था को लेकर समाज में लोगों के बीच कई धारानाये  प्रचलित होती है जिनका सच्चाई से दूर - दूर तक कोई नाता नहीं होता है लेकिन हर व्यक्ति इन मिथिकों  को बिना सोचे - समझे सच समझ कर अनुसरण करता है । ऐसे ही प्रचलित कुछ मिथकों की सच्चाई बता रही है - चिकित्सा हाँस्पिटल , साकेत में एमबीबीएस , एमडी डाँ. शालिनी जैन ।

 मिथक :   यह बहुप्रचलित मिथक है कि अगर गर्भवती महिला के पेट का उभार ऊपर की ओर है तो शिशु लड़का होगा ।

तथ्य :   यह बात वैग्नानिक तथ्य पर आधारित नहीं है । उभार का नीचे की ओर होना बताता है कि शिशु नीचे पेडू तक पहुँच गया है ओर प्रसव के बहुत करीब है । महिला की मांसपेशी का आकार , संचना  उसका अंग - विन्यास , गर्भावस्था के पूर्व शरीर की बनावट तथा पेट के आस - पास के हिस्से में जमा चर्बी कुछ कारक गर्भवती महिला के पेट के आकर व बनावट के ma मामले में भूमिका निभाते है ।

मिथक  :  ऐसे भी बहुत ज्यादा कहा जाता है कि अगर आपका मन नमकीन खाने पर जाता है तो आपको बेटा होगा । मीठा भोजन पर मन जाना गर्भ में बेटी का होना दर्शाता है ।

 तथ्य :  जब आप गर्भ से हों तो हो सकता है कि आपका मन कई तरह के भोजन पर जाए या किसी ख़ास चीज पर मन न जाए , लेकिन इनमें से कुछ भी आपके होने वाले बच्चे  का लिंग निर्धारण नहीं करता ।

मिथक  :  एक छल्ले के अंदर एक धागा डालकर इसे गर्भस्थ पेट के ऊपर रख कर पकडे और इस प्र कार धागे की गति की दिशा के आधार पर आप बच्चे का लिंग निर्धारण कर सकते है , लड़के के मामले में इसकी दिशा आगे - पीछे होगी , जबकि लडकी के मामले में घूर्णन गति होगी ।

तथ्य :  यह सही नहीं है , मस्ती के लिए यह तरीका अपना सकती है ।

मिथक : अगर गर्भावस्था के दौरान आपकी नाक में सूजन होता है , तो आपको बेटी होगी ।

तथ्य : वास्तव में माँ की शक्ल - सूरत एवं बच्चे के लिंग का कोई संबंध नहीं होता । नाक में सूजन आने को एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्दि से जोड़ा जा सकता है , जिसकी वजह से म्यूकस मेंब्रेन में रक्त का बहाव तेज हो जाता है और यह फैल जाता है ।

bigstockphotopregnantwomanमिथक : सुबह के वक्त की कमजोरी महसूस न होना गर्भस्थ शिशु का बेटा होना दर्शाता है ।

तथ्य : लग भग आधी गर्भवती महिलाओं के मामले में किसी - न - किसी हद तक सुबह के वक्त कमजोरी देखने को मिलाती है । डाक्टरों का मानना है कि मिचली के लिए माँ के शरीर में बनने वाला रिलेक्सिन नामक हारमोन जिम्मेवार होता है ना कि पेट में पलने वाला बेटा या बेटी ।

मिथक : धीमी हदय गति का मतलब बेटा एवं तेज गति का मतलब बेटी । सामान्य स्थिति में श्रुण के हदय की धड़कन 110 व 160 प्रति मिनट के बीच होती  है , हालांकि कुछ लोग मानते है कि अगर यह अधिक तेज है तो गर्भस्थ शिशु कन्या है और कम है तो बेटा ।

तथ्य : परंतु कोई ऐसा अध्ययन निर्णयात्मक तौर पर यह नहीं दर्शाता है कि हदय गाती का बच्चे के लीग से कोई संबंध है । आपके गर्भस्थ शिशु के धडकनों की दर प्रसवपूर्ण  अलग - अलग गर्भावस्थ अंतराल पर निर्भर करती है ।डाक्टर के पास पहुँचने के वक्त श्रुणु की उम्र एवं गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है ।

मिथक : गर्भावस्थ के दौरान सीन में जलन का अर्थ यह है कि जन्म के वक्त आपके बच्चे के सिर में बहुत बाल होगें । तथ्य : इस अवस्था में सीन में जलन एक आम समस्या है और इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता कि बच्चे के सिर में निश्चत तौर पर ढेर सारे बाल होंगे । कई बार ऐसी समस्या से ग्रस्त महिलाओं ने गंजें का इस दुनिया में स्वागत किया है ।

 

 

Wednesday, October 17, 2012

गर्भावस्था आप सुंदर बनाता है

कहा जाता है घर में नये मेहमान का आगमन क्षण सबसे अधिक उस मां के चेहरे पर झलकती है , जो उसे जन्म देती है । प्रेगनेंसी के दौरान वजन का , बढना व हांर्मोंन्स परिवर्तन स्वाभाविक है । इन सब का प्रभाव गर्भवती स्त्री की त्वचा व बालों आदि पर पड़ता है । ऐसे में एक महिला के लिए जरूरी है अपनी सेहत व शरीर आदी का पूरा ख्याल रखें , ताकि वो उन दिनों में फिट ही नहीं बल्कि खुबसूरत व जवां भी दिखें । कैसे करें देखभाल प्रेगनेंसी के दिनों में , पेश है ख़ास टिप्स |

बालों की देखभाल : प्रेगनेंसी के दौरान अनेक स्त्रियों के बाल गिरने व झड़ने प्रारंभ हो जाते है । ऐसा अक्सर अनुवांशिक कारण से भी होता है और कभी - कभी तनाव के कारण भी । हेयर केयर के लिए ध्यान रखें -

  • बालों को सप्ताह में कम से कम दो या तीन बार किसी भी ब्रांडेड शैम्पू से धोये ।

  • बाल धोने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तमाल करें ।

  • रात को सोने से पहले हल्के हाथों से बालों में नारियल तेल लगायें ।

  • बाल यदि लंबे है और देखबाल करने में तकलीफ है । तो डिलीवरी पीरियड तक बालों को स्टाइलिस्ट व शंट कट करवाकर अपने लुक में बदलाव ला सकती है ।

  • रेगुलर पार्लर जाने वाली महिलायें बालों को डीप कंडीशनिंग , स्पा ट्रीटमेंट व आयलिंग आदि भी करा सकती है ।


त्वचा के देखभाल : 

डां.सी . चटर्जी बताती है कि 'जर्भावती महिला में हाई ब्लड प्रेशर , बार - बार यूरिन , ब्लड का रूक जाना आदि कारणों की वजह से उनकी त्वचा डीहाइड्रेड हो जाती है । इसलिये ऐसी महिलाओं को अपनी त्वचा का खास ख्याल रखना चाहिए ।

  • ऐसे समय में रोजाना  खूब पानी पीयें ताकि त्वचा खिली - खिली रहे और शरीर में पानी की कमी ना हो ।

  • गर्मी के दिनों में जब भी बाहर निकालें तो सन प्रोटेक्शन क्रीम ,छाता , सिर कवर करके निकालें साथ में पानी की बोतल अपने साथ आवश्यक रखे ।

  • प्यास लगने पर नींबू पानी पीए ताकि विटामिन - सी की कमी न हो ।

  • स्किन को डीहाड्रीशन से बचाने के लिए हमेशा ब्रांडेड विटामिन - ई युक्त माइस्चराइजर का इस्तमाल करें ।

  • चेहरे पर चमक के लिये फेशियल करा सकती है , इससे त्वचा में निखार दिखेगा और आप रिलेक्स भी फील करेंगी ।

  • ग्लिसरीन युक्त क्लींजर तथा सनस्क्रीन लोशन का इस्तमाल करे ।

  • बीती ट्रीटमेंट के साथ प्रमुख है समय पर डायट लेना । नाश्ता व दोपहर का भोजन समय पर लें ।

  • डायट में प्रोटीन , विटमिन , बीन्स , हरी सब्जी , दही शामिल होने चाहिए ।

  • फ्रेश जूस अनार व सेब फ्रूट ले सकती है फलों में पपीता ,अनार , सेब , तरबूज आदि ताजे फल रोजाना लेने चाहिए । इससे आपके चेहरे में ताजगी तथा त्वचा की रंगत हमेशा खिली - खिली नजर आयेगी ।


इन्हें ना अपनायें :

  •  ब्लीचिंग आदि को एवाइड करना चाहिए ।

  • एस वैक्सिंग व बाडी मूवमेंट होता है जोकि प्रेगनेंसी में मां व बच्चा दोनों के लिए नुकसान होता है ।

  • मसाज के दौरान बाडी का मूवमेंट का असर बच्चे पर पड़ता है ।

Tuesday, October 16, 2012

प्रेगनेंसी में करें सेफ ड्राइविंग

रोज्मारी के बाहरी कामों को करने के लिए ड्राइव करना आज जरूरत बन गया है । अगर गर्भवती स्त्री भी ड्राइविंग करते समय कुछ बातों पर ध्यान दे , तो वो बिना किसी परेशानी के सफर का पूरा लुत्फ उठा सकती है ।

बदलते समय के साथ महिलाओं में आजादी के मायने भी बदल रहे है । आज वो पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और अपने अनुसार जिंदागी को जीने के लिए स्वतंत्र है । यही वजह है कि आज से कुछ समय पहले तक ड्राइविंग से दूर रहने वाली महिलाएं भी इस मैदान में अपनी धाक जमा रही है । वैसे तो ड्राइव करना आम हो गया है , लेकिन जब बात प्रेग्नेंट वुमन के ड्राइव करने की हो तो फोर्ड के मृताबिक कुछ बातों का ख़ास ख्याल रखना चाहिए ।

  1. pregnantanddrivingभारी कपड़ों को पहनकर ड्राइव करने से बचें । अगर आप ज्यादा भारी भरकम कपडे पहनेंगी तो सीट बेल्ट को कास कर नहीं बाँध पाएंगी ।

  2. सीट को अपने मुताबिक़ एडजेस्ट करें । आपके पैर पूरे पैडल तक जाने चाहिए स्टीरिंग  व्हील्प और आपके पैरों के बीच सही जगह होनी चाहिए ।

  3. बेल्ट को अपनी जांघों के बीच में से ले जाकर बांधे । कंधे पर से बेल्ट को लेकर जाते हुए दोनों ब्रेस्ट के बीच में से बेल्ट को बांधे ।

  4. ध्यान रखें कि बेल्ट आपके बाजू के नीचे न हो साथ ही बेल्ट आपकी पीठ के पीछे  भी नहीं होनी चाहिए । इससे आप और आपके बेबी को नुकसान हो सकता है ।

  5. ऐसी कार में ड्राइव करें जिसमें एयरबैग लगा हो , जिससे आप खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें ।

  6. ऐसी कार को पसंद करें जो किसी तरह के फोन और ब्लूट्यूब से लिंक हो , जिससे आप अपने दोस्तों से बिना किसी परेशानी के बात कर सकें ।

  7. ढेर सारा पानी पीएं । दर असल प्रेग्नेंट महिला को पसीना ज्यादा आता है , ऐसे में पानी की कमी से बचने के लिए हमेशा गाडी में अपने साथ पानी की कमी से बचाएगा ।

  8. ऐसी सड़कों पर ड्राइविंग करने से बचें जो टूटी और उड़ब - खाबड़ हो ।ऐसी सडकों पर गाडी चलाना बिल्कुल भी पड़े तो उसकी स्पीड बहुत कम करके ही चलाएं ।

Saturday, October 13, 2012

गर्भावस्था के बाद वजन नियंत्रण

प्रसव के बाद भी साबुत अनाज युक्त आहार लेना जारी रखे क्योंकि स्तनपान करने वाली माता को अपने बच्चे को आवश्यक पोषण तत्व प्रदान करने के लिए यह जरूरी है ।आप गर्भावस्था में बढ़ा हुआ  आतिरिक्त वजन को भी जल्द कम करने की कोशिश करें । इसमें कुछ समय लगेगा - याद रखे , बच्चा होने में 10 महीने लगते है ।फिलहाल आपको ऊर्जा और ताकत देने वाले खाद्य पदार्थों की जरूरत है । अपने भोजन को सदा और ऐसा रखे जो जल्दी पक जाए लेकिन इस बात का भी ध्यान रखे कि जब तक आप बच्चे का पालन - पोषण कर रही है , डाइटिंग की शुरूआत न करे । तरल पदार्थ का अधिक सेवन करे क्योंकी ऐसा माना जाता है कि इससे दूध में वृद्दि होती है  ।

गर्भावस्था के बाद वजन नियंत्रण  :

Woman struggling with her weightई महिलाओं का बिना डाइटिंग किए गर्भावस्था में वजन स्वत : ही कम हो जाता है । लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिनका वजन कम नहीं हो पाता । अगर आप चाहती है कि आपका वजन पहले जैसा ही हो जाए तो डाइटिंग करने  की बजाय व्यायाम करने पर ध्यान दे । इंटरनेशनल सेंटर फार रोबोटिक सर्जरी की निदेशक व  रोबोटिक गैनोकोलान्जिस्ट डा. नीना सिंह का कहना है कि व्यायाम से आप अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य के लिए शरीर के वजन पर काबू रख सकती है , जो न बहुत ज्यादा हो और न ही बहुत कम । बच्चा होने के बाद व्यायाम के जरिए अतिरिक्त वजन को घटाया जा सकता है ।

हालाकिं हमारी सलाह यही है  कि स्तनपान कराने के दिनों में भोजन में कैलोरीज की मात्रा को कम न करें । गर्भावस्था का मतलब यह भी नहीं होता कि आप बेडौल हो जाएं । व्यायाम से शरीर में अतिरिक्त एडिपोस टिश्यूज को जमने से रोका जा सकता है । अधिक वजन वाली एवं मोटी महिलाओं में कैलौरी का अतिरिक्त भंडार होता है , इसलिए जैसे ही आपका बच्चा बढ़ता है , इसे बहनाए रखने या शुरू में वजन में कमी ठीक नहीं है ,क्योंकि आप जान - बूझ कर कैलोरी में कमी कर रहे है ।जिससे पोषक  तत्व सीमित मात्रा में आपके शरीर में पहुँचते है । इसलिए भरपेट भोजन करें लेकिन तले हुए भोजन , मिठाई और शीतल पेय से परहेज करें ।

नियमित व्यायाम करने और सक्रीय रहने से आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी । बच्चे को जन्म देने का पूरी तरह से आनंद तभी लिए जा सकता है जब प्रसव के बाद माता और बच्चा दोनों का स्वास्थ्य अच्छा हो । खाने की खराब आदतों को छोड़ना और अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी है लेकिन ऐसा खुद पर अधिक सख्ती बरते बगैर ही करें । गर्भावस्था से पहले , गर्भावस्था के दैरान और प्रसव के बाद सही और पौष्टिक आहार ले , सही और प्रसव के बाद सही और पौष्टिक आहार आपको और आपके बच्चे को लंबे समय तक स्वस्थ रखेगा ।

गर्भावस्ता में कैसे हो खानपान

माँ  बनने की खुशी स्त्री के लिए एक अलग ही तरह का अनुभव होता है और यह अनुभव तब और हसीन बन जाता है जब गर्भवती स्त्री अपने खानपान पर ध्यान दे । इस बारे में डा गगन दीप चाद्दा का कहना है कि यह वह समय होता है । और यह अनुभव तब और हसीन बन जाता है जब गर्भवती स्त्री अपने खानपान पर ध्यान दे । इस बारे में डा गगन दीप चाद्दा का कहना है की यह vah समय होता है , जब स्त्री apne स्वास्थ्य व् अपने अन्दर पल रहे बच्चे को लेकर अधिक चिंतित रहती है । इसलिए इस समय गर्भवती स्त्री को चाहिए कि वह पौष्टिकता से भरपूर भोजन ग्रहण करे , जिससे माँ और बछा दोनों स्वस्थ रहे ।

किस तरह का हो खानपान  :  गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था व् प्रसव के बाद किस तरह का खानपान अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए आइए जाने ।

youngpregnantwomanchoosesahealthynaturalfoodगर्भधारण करने से पहले    : आजकल की बहुत सारी महिलाएं फिट रहना चाहती है और इसी चाहता को पूरा करने के लिए वो डायटिंग भी करती है लेकिनं यह बात बहुत कम ही महिला ओं को पता होगी कि गर्भावस्था के पहले की गई डाइटिंग का असर गर्भवस्था के दोरान महिला के स्वास्त्य और उसके गर्भ धारण पर भी पड़ता है ।गर्भधारण करने से पहले महिला को पोव्ष्टिक भोजन लेना चाहिए लेकिन उसे नियमित व्यायाम से अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए ।जब आप गर्भधारण करने की योजना बना रही हो तो आपके चिकित्सक आपको स्वास्त्य संबंधित सलाह दे सकते है ।

इस अवस्था में प्रसव के पहले फोलिक एसिड सप्लीमेंट और फोलेट युक्त खाद्द पदार्थों को लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये पोषक तत्व बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हद्दी के सही विकास के लिए जरूरी है और ये न्यूरल ट्यूब में विकृति आने से रोकते है । पार्थ्फाइंडर हेल्थ इंडिया की विशेषज्ञ डा . गगनदीप सिंह चद्दा का कहना है कि पौष्टिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां , फल , साबुत गेहू और कम वसा युक्त दुग्ध उत्पाद शामिल है , जो आपको गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद इन खाध्य पदार्थों का आदि बना देगा ।

गर्भधारण करने के बाद  :  गर्भधारण करने के बाद आपको अपने खानपान की आदतों को लेकर अधिक सतर्क होना चाहिए और इन सभी आवश्यक पोषक तत्वों के साथ अपने आहार को लेकर एक योजना बनानी चाहिए ।यह सामान्य भ्रांति है कि गर्भावस्था के दौरान आपको एक की बजाय दो लोगों का खाना खाने की जरूरत होती है जबकि ऐसा सोचना गलत है , जितनी भूख लगे उतना ही खाए ।

गर्भावस्था डाइटिंग करने का समय नहीं है , बल्कि आपको अपने बढ़ते हुए शरीर और विकसित होने वाले शिशु की मांगों को पूरा करने के लिए कुछ अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है ।आहार में प्रोटीन , कैल्शियम ,मिनरल्स , विटामिन और वसा काफी मात्रा में द्रव शामिल होने चाहिए । इस दौरान बच्चे के लिए आपको सिर्फ कुछ सौ अधिक कैलौरी लेने की जरूरत है । भोजन की मात्रा को दोगुना करने की बजाय इडली , उपमा , वसा रहित दूध , नट्स , अंकुरित अनाज और साबुत अनाज जैसे स्वास्थ्यवर्द्दक आहार ले । थोड़ी - थोड़ी मात्रा में लेकिन बार - बार भोजन करें । इससे आपको एसिडिटी और पाचन संबंधित अन्य समस्याएं नहीं होगी ।

विटामिन , खनिज पथार्थ और प्रोटीन सहित अच्छा पोषण बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है । चुकंदर ,संतरा और पौष्टिक अनाजों के सेवनको बढ़ा दे । पानी को अपना सबसे पसंदीदा पेय बनाये और रोजाना कम से कम 8 - 10 गिलास पानी पीने का नियम   बना ले ।प्राकृतिक पेय और अधिक फाइबर वाले  आहार आपको गर्भावस्था से संबंधित कब्ज से निजात दिलाने में मदद कर सकते है । आप पानी के अलवा , नीम्बू पानी , नारियल पानी ,और छाछ से अपनी प्यास बुझा सकती है ।

कामकाजी महिलाओं के लिए , गर्भावस्था और प्रसव के बाद का समय चुनौतीपूर्ण   हो सकता है , इसलिए उनकेलिए सही भोजन करना अत्यंत जरूरी है । आपको अपने और अपने बच्चे के स्वास्त्य को प्राथमिकता देनी होगी । काम पर जाते समय रोजाना फल ,नट्स और दही जैसे स्वास्थ्य वर्धक काने पदार्थ अपने साथ रखे ।वहा समय पर खाने और टहलने का समय निर्धारित कर ले ।