- स्तनपान कराने के लिए कोइ शांत सी जगह चुनें । शांत जगह पर आपको भी आराम मिलेगा और शिशु भी आराम से अपना पेट भर सकेगा ।
- अपने पास कोई किताब रख ले , लेकिन स्तनपान के दौरान किताब पढ़ते समय बीच - बीच में शिशु पर भी नजर डालें ।
- शिशु को आरामदायक तरीके से उठने के लिए गोद में तकिया रख ले बिना सहारे न उठाने से बाजुओं में एंठन या दर्द हो सकता है । यदी हो सके तो टाँगे bhee ऊंची रखें ।
- शिशु का मुह अपने निप्पल की ओर करके लिटाएं । उसका पूरा शरीर आपकी ओर होना चाहिए ।सही पोजीशन होने से आप भी स्तनपान से जुडी कई तकलीफों से बच जाएँगी ।
- पहले कुछ सप्ताहों में स्तनपान की दो पोजीशन उचित बताई जाती है । पहली है - 'क्रासओवर होल्ड '
एक हाथ से शिशु के सिर को सहारा दे व दूसरे हाथ से उसका पूरा शरीर संभाले । फिर पूरा शरीर संभालने के बाद उसी हाथ से अपना निप्पल उसके मुह में डालें । स्तन को हलके से दबाएँ ताकि उसके भार से शिशु का नाक न दबे । - दूसरी पोजीशन 'फुटबाल होल्ड ' कहलाती है । इसे 'क्लच होल्ड ' भी कहते है । सी - सैक्शन के बाद यह काफी फायेमंद होती है , क्योंकी इससे पेट पर फालतू दबाव नहीं पड़ता । अगर आपकी चेस्ट बड़ी है या शिशु प्रीमेचोर है या आप जुडवा को दूध पिला रही है तो शिशु को अधलेटी मुद्रा में लिताएं । उसके हाथ - पैर आपकी बाजू के नीचे हों । एक हाथ से स्तन संभाले । जब आपको अच्छी तरह स्तनपान करना आ जाएगा ।
- निप्पल को शिशु के नाक के पास से निचले होंठ तक ले जाएं ताकि वह चौड़ा मुह खोल सके । इस तरह स्तनपान के दैरान उसका निचला होंठ नहीं दबेगा । यदि वह अपना सिर घुमा ले तो उसे प्यार से वापस लौटा लाएं ।
- जब शिशु मुंह खोल ले तो स्तन को आगे की ओर लाने की बजाए उसके मुह को स्तन के पास लाएं । जब माँ स्तन को जबरन शिशु के मुह में देती है तो कई तरह की परेशानियां हो सकती है । अपनी पीठ सीधी रखते हुए शिशु को स्तन के पास लाएं ।
- शिशु को निप्पल अपने मुंह में लेने से दूध नहीं निकलेगा । उसके आसपास का कुछ हिस्सा भी शिशु के मुह में जाना चाहिए क्योंकि वही दूध ग्रंधियाँ है जिन्हें दबाने से दूध निकलता है । कई शिशु तो भूखे होने पर स्तन का कोई भी हिस्सा चूसने लगते है , चाहे दूध न निकले । इससे स्तन पर चोट पहुँच सकती है ।
- यदी स्तन से शिशु का नाक दबे तो स्तन को अंगुली से दबाएँ , शिशु को थोड़ा ऊंच उठा कर सांस लेने दें लेकिन इस प्रक्रिया में एरिओना से उसकी पकड़ ढील न पड़ने दें ।
- दिन में कम से कम 8 से 12 बार दूध पिलाएं । दूध भी पूरा बनेगा । शिशु भी प्रासन्न रहेगा । अगर चार घंटे बाद दूध पिलाएंगी तो दूध भी नहीं बन पाएगा और स्तनों में रक्त्संकुलता हो जाएगी । शिशु को सही पोजीशन में दूध पिलाएं ताकि निप्पलों में सूजन या दर्द न हो । यदि पोजीशन सही हो तो आप कितनी भी देर आराम से दूध पिला सकती है ।
- शिशु को दोनों स्तनों से दूध पिलाएं । एक स्तन खाली होने के बाद दूसरा स्तन मुंह से लगाएं । इस तरह उसकी भूख भी शांत होगी और पूरा पोषण भी मिलेगा । उसे स्तन से पूरा पोषण भी मिलेगा ।उसे एक ही स्तन से पूरा दूध पीने दें । यदि वह चाहे तो उसे दूसरा स्तन दें लेकिन जबरदस्ती न करें । याद रखें कि आपने अगली बार भरे हुए स्तन से दूध पिलाना है । यही क्रम बनाए रखें ।
- अगर शिशु का मुंह फूल रहा है तो पता चल जाएगा कि उसके मुंह में दूध की पूरी धार जा रही है ।
- यदि वह दूध पीना पसंद करने के बाद भी स्तन न छोड़े तो अचानक खींचने से निप्पल में दर्द हो सकता है । शिशु के मुंह के एक कोने में अंगुली डाल कइर थोड़ी हवा निकलने दें , फिर धीरे से निप्पल बाहर निकालें ।
- बर्थिग रूम में ही इसकी शुरूआत करें । अगर शिशु व आपको पहले - पहल स्तनपान का मौका न मिले तो निराश न हों । इसका मतलब यह नहीं कि आप इसकी शुरूआत नहीं कर पाएंगी । आप दोनों को ही इस बारे में काफी कुछ सीखना है ।
- शिशु के भूख लगने पर स्वयं को तैयार रखें । कही एसा न हो कि वह भूख से रोए और आपकी आंखों नींद से बोझिल हो रही हों ।
- जितना हो सके दूसरों की मदद लें । यदि यह सुविधा न हो तो अनुभवी नर्स या डाक्टर से मदद लें । वे आपको उपयोगी टिप्स दे सकते है ।
- शुभ्चिंताकों की भीड़ से बचे । मुलाकाती आपकी व शिशू की इस प्रक्रिया में बाधा दे सकते है ,आपको एक आरामदायक माहौल बनाना है । पूरी एकाग्रता के साथ शिशु को स्तनपान करना है ताकि दिनों ओर से भरपूर संतुष्टि मिल सके ।
- यदी शिशु की शुरुआत धीमी हो तो निराश न हो । हो सकता है कि उसे भी डिलीवरी की थकान हो । नवजात शुशु को नींद भी बहुत आती है । उनके पास पहले से कुछ दिन का पोषण होता है इसलिए खुलकर भूख लगने पर उनके पास पर्याप्त मात्रा में दूध पीने की की ताकत भी आ जाएगी ।
- शिशु को बोतल के दूध से बचाएं । कही ऐसा न हो कि वह स्तनपान करने से पहले फार्मूला दूध से ही अपना पेट भर ले , बोतल के दूध से उसकी भूख भी शांत नहीं होगी और उसे उपयोगी कोलोस्टम भी रही है तो उसे स्तनपान के आसपास न दें , उसे बोतल का चस्का पद गया तो मुश्किल होगी क्योंकि उससे दूध पीने में कम मेहनत लगती है । हो सकता है कि स्तनपान में उसकी रूचि ही खत्म हो जाए ।
Showing posts with label feeding types. Show all posts
Showing posts with label feeding types. Show all posts
Wednesday, October 17, 2012
सबसे अच्छा करने के लिए अपने बच्चे को खिलाने के तरीके
शिशु को स्तनपान करना एक स्वाभाविक - सी प्रक्रिया है , लेकिन फिर भी माएं इसे सही तरीके से नहीं करा पाती । अक्सर आपने बहुत सी माओं को देखा होगा कि जब वे अपने शिशु को स्तनपान करती है तो यह भूल जाती है कि वह बच्चे को सही तरीके से स्तनपान करवा रही है या नहीं । डाक्टरों का मानना है कि स्तनपान करने का अपना भी एक तरीका होता है । इस हुनर को सीखना ही पड़ता है । कई बार कुछ , शारीरक तकलीफों की वजह से यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती , क्योंकि दोनों ओर से तजुर्बे की कमी होती है । मां को दूध पिलाना नहीं आता और शिशु को दूध पीना नहीं आता । सही मुद्रा में बैठने व् बच्चे को सही तरीके से पकड़ने पर स्तनों में दूध भी अपने - आप उतर आता है लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि स्तन का निप्पल शिशु के मुह में कैसे दिया जाए । आइए जाने स्तनपान कराने का सही तरीका क्या है ।
कैसे कराएं स्तनपान :
Labels:
advantages of natural feeding in hindi,
clutch hold feeding,
crossover hold feeding,
feeding tips in hindi,
feeding types,
football hold feeding,
How to Make Breastfeeding,
natural breast feeding,
natural breast feeding in hindi,
tips for feeding,
बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुझावों,
स्वास्थ्य सुझावों
Subscribe to:
Posts (Atom)