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Sunday, October 14, 2012

बच्चों की बीमारियों से ना घबराएं

बच्चे की किलकारियों से सूने घर में रौनक आ जाती है । उसकी शरारते देख कर माता - पिता का तनमन प्रफुल्लित हो उठता है । लेकिन नवजात शिशु को संभालना उतना आसन भी नहीं है क्योंकी छोटे बच्चे का अधिक ख्याल रखना पड़ता है । बच्चे को कैसे नहालाए ? बच्चे को कैसे दूध पिलाए ? वह रो क्यों रहा है ? उसे बुखार आ गया तो क्या करे ? आदि कुछ ऐसे सवाल है , जिनके लिए माता - पिता परेशान होते रहते है लेकिन यह उतना मुश्किल भी नहीं है । बस थोड़ी सी जानकारी और समझदारी की जरूरत होती है , आइए जानें की जब आपकी जिंदगी में नन्हा - मुन्ना आ जाए तो उसका ख्याल कैसे रखे -

रैशेज होना  :  बच्चे की पैटी समय - समय पर और दायपर बदलने पर भी जब मां देखती है कि बच्चे के रैशोज हो गए है या फिर त्वचा लाल होकर छाले पड़ गए है तो वह घबरा जाती है और तुरंत डाक्टर से संपर्क करती है लेकिन इन छोटी - छोटी सी बातों के लिए डाक्टर के पास जाने की कोई जरूरत नहीं है ।

baby-cryingक्या करें  : इस बात का ख़ास खायल रखे कि बच्चे को गीला ना रखे । एक दिन में कम से कम बच्चे कि 12 से 14 बार नैपी बदलनी पड़ती है ।

  • नैपी बदलने का सारा सामान एक जगह पर पहले ही रखे ले ताकी बच्चे को अकेला छोड़कर जाना ना पड़े ।

  • बच्चे को वाटरप्रूफ पैटी ना पहनाएं क्योंकी उसमे नमी रह जाती है जो बच्चे की नाजूक त्वचा के लिए ठीक नहीं रहती है ।

  • यह सब करने पर भी अगर 3 से 4 दिन में रैशेज ठीक ना हो तो डाक्टर से संपर्क करें ।

  • उसे डायपर पहनने के बदले हो सके तो काटन के कपडे से तैयार नैपी पहनाएं ।


बच्चा रोए तो डरे नहीं  :  बच्चे के बड़े होने के साथ ही उसमें बहुत से बदलाव होते है । जन्म के कुछ महीनों बाद तक शिशु सिर्फ रोकर ही अपनी बात कहता है । यही उसके कम्यू निकेशन का तरीका होता है इसलिए बच्चे की भाषा को समझने की कोशश करें ।

क्या करें : 



  • बच्चा कई बार भूखा होता है , इस वजह से रोता है इसलिए उसके दूध पीने के समय का ख्याल रखे ।

  • अगर बच्चे की पैटी गीली हो तो उसे असहज लगता है और वह जोर - जोर से रोता है ।

  • बच्चे की स्किन बहुत संवेदनशील होती है उन्हें बहुत ही जल्दी गर्मी और ठंडे लगने लगती है इसीलिए उनके कपड़ों का ध्यान रखें ।

  • अगर बीमार है तो भी वह रोता है । बच्चे का तापमान देखें और उसे डाक्टर के पास ले जाए ।

  • अगर बच्चे को नींद आ रही हो और वह नहीं सो पा रहा हो तो भी वह रोता है इसीलिए बच्चे को शांत कमरे में ले जाकर सुलाएं ।


शिशु का वजन कम हो तो डरे नहीं   :  अगर जन्म लेने के 48 घंटों के भीतर शिशु का वजन 5 से 7 प्रतिशत तक कम हो जाए तो भी माता - पिता घबरा जाते है । लेकिन यह नार्मल है और इसके कई कारण भी है । लेकिन अगर बच्चे का वजन 10 प्रतिशत से अधिक कम हो रहा है तो डाक्टर से संपर्क करें ।

क्या करें  : 



  • प्रेगनेंसी में हार्मान चेंज की वहज से शरीर में पानी बढ़ जाता है .लेकिन जब बच्चा पैदा होता है तो यह  पानी निकल जाता है

  • नवजात शिशु में पैदा  शिशु में पैदा होने के बाद भी वसा स्टोर रहती है । इस वसा को वह तीन दिन तक इस्तेमाल कर सकता है क्यों की पहले दिन माँ के दूध में वसा व् न्यूट्रीशियन्स नहीं पाए जाते है , इसीलिए बच्चा तीन दिन तक अपने भीतर एकत्र की हुई वसा का प्रयोग करता है , इससे उसका वजन कम हो जाता है ।

  • अगर बच्चे का वजन ज्यादा ही कम हो रहा है तो इसका कारण यह भी हो सकता है कि अकसर बच्चे दूध पीते वक्त बहुत सारी हवा अपने अंदर ले लेते है , जिससे उनका पेट फूल तो जाता है लेकिन भर नहीं पाता है । इसका मतलब है कि आपको बच्चे को सही ढंग से दूध पिलाना नहीं आ रहा इसलिए अपने डाक्टर से बातचीत करें और दूध पिलाने की सही विधि पूछे ।