Wednesday, December 26, 2012

नवजातों में पीलिया

जन्म के तुरंत बाद शिशुओं को पहले सप्ताह में सब्से अधिक होने वाली बीमारी  जान्डीस यानी पीलिया होती है । आंकड़ों के मुताबिक़ ,जन्म के कुछ समय बाद ही दो - तिहाई शिशु इस बीमारी की चपेट में  आ जाते है । कुछ बच्चों में तो यह जन्म के 24 के अंदर हो जाती है तो कुछ को 24 से 72 घंटे के अंदर । इस बीमारी में नवजात शिशु की हालत बिगड़ने लगती है । समय पर इलाज न होने पर वह मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित शिशु का समय पर इलाज न होने पर वह मानसिक और शारीरिक रूप से अपंग हो जाता है । जन्म से एक सप्ताह तक के शिशुओं की देखभाल सावधानी से करने के साथ डाक्टर की भी सलाह लें ।

लक्षण
new born babyपीलिया पीड़ित नवजात शिशु का शुरू पीला पड़ जाता है । जैसे - जैसे बीमारी बढ़ती जाती है शरीर का निचल हिस्सा पीला पड़ने लगता है , मसलन चेहारे के बाद पेट और पैर । अगर शिशु का तलाव पीला दिखने लगे तो समझ लेना चाहिए कि बीमारी गंभीर हो चुकी है । इस बीमारी में शिशु को बुखार भी आ जाता है । बुखार के बाद हाथ - पैर ढीले पड़ जाते है , बाद में कास जाते है । कानिक्टरस की आशंका बढ़ जाती है जिसे 'दिमागी पीलिया ' कहते है । इस दैरान शिशु फीडिंग करना बंद कर देता है । ऐसी स्थिती आने पर शिशु को तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए ।

रोग के कारण

जन्मजात शिशु की खून की लाइफ्साइकिल वयस्क की तुलना में कम होती है । वयस्क के खून की लाइफ साइकिल 120 दिन होती है , जबकि शिशु की 90 दिन से कम होती है । इसकी वजह से शिशु के शरीर में बिल्रूबिं ज्यादा बन्ने लगता है । शिशु का लिवर कमजोर होने के कारण बिलुरूबिन शरीर से बाहर से बाहर नहीं निकल पाता ,जो जांडिस का रूप ले लेता है । माँ का ब्लड ग्रूप आरएच निगेटिव भी शिशु में जांडिस का कारण बनता है । शिशु में एंजाइम की कमी और संक्रमण के कारण भी जांडिस हो सकता है ।

जान्डीस का सबसे कारगर इलाज फोटोथैरेपी यानी सिकाई है । इसमें शिशु को आवश्यकतानुसार रखकर इलाज किया जाता है । फोटोथैरेपी से निकलने वाली किरणे शिशु के शरीर में क्रिया कर बिलरूबिन को पेशाब में बदल देती है जो पेशाब के जरिये बाहर निकल जाता है । इसके अलावा , जंभीर रूप से बीमार शिशुओं को दवाएं भी दी जाती है ।

जांडिस में धूप नुकसानदायक

शिशुओं में जांडिस होने के बारे में लोगों की धारणा है कि धूप से बीमारी ठीक हो जाती है ,लेकिन ऐसा नहीं है । सूर्य की किरणों में अल्ट्रावायलेट और इन्फ्रारेड किरणों होती है , जो बच्चे को नुक्सान पहुंचाती है । बच्चे को ज्यादा समय तक धूप में रखने से बच्चे को हाइपरथर्मीया का शिकार हो सकता है ।

  • शिशु को जन्म के 7 दिनों तक डाक्टर की निगरानी में रखे ।

  • अगर जन्म के 24 घंटें के अंदर जांडिस होता है , तो माँ का ब्लड ग्रूप या एंजायिम की जांच कराएं ।

  • अगर माँ का ब्लड ग्रूप निगेटिव है , तो इसका इलाज करायें । कुछ दवाएं माँ को खानी पड़ सकती है ।

  • संक्रमण से बचाव के लिए माँ शिशु को सही तरीके से स्तनपान करायें ।

  • संक्रमण से बचाएं और शिशु को सामान्य तापमान में रखे ।

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