छोटे बच्चों में अक्सर नाक , कान संबंधी छोटी - छोटी परेश्हनियाँ हो जाते है । वैसे तो ब च्चों के शरीर के सभी भाग बहुत नाजुक होते है , लेकिन कान काफी संवेदनशील भाग है ,जिन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है । बहुत छोटे होने के चलते आपके बच्चे अपनी परेशानी आपको बात नहीं कर पाते और तकलीफ से रोते रहते है इसलिए अपने बच्चों में यदी नीचे दिए लक्षण दिखाई दे तो तुरंत उनके नाजूक कानों की और ध्यान दे और हुई तकलीफ का इलाज कराएं ।
कान : बच्चों में कान का संक्रमण होना आम है , क्योंकी उन?आ की यूस्टेशियन टयूब संकरी होती है . जिनसे द्रेनिज पूरी तरह से नहीं होती है और वे आसानी से ब्लैक हो जाते है , जिससे मध्य कर्ण या मिडिल ईयर में इफेकशन फैल जाता है |
कानों में मैल : बाहरी कानg में ग्रंथियों द्वारा मैल बनता है , जो कानों को धूल व् संक्रमण से बचता है । बच्चों में सर्दी होने पर कानों में अधिक मैल जमा होता है , जो सूख कर सख्त हो जाता है , जिससे श्रावण शक्ति को भी नुकसान पहुँच सकता है ।
लक्षण : मैल के सख्त हो जाने पर कम सुनाई पड़ता है और सिर में रिगिंग जैसी आवाज भी आती है । बाहरी कान भरा हुआ लगता है , परीक्षण करने पर मैल दिखाई देता है ।
उपचार : बच्चे के कानों को साफ करने के लिए ईयर ड्राप प्रभावशाली इलाज है , जो मैल को मुलायम बनाकर रात भर में बाहर निकाल देता है ।
क्या न करे : इसके अलावा बच्चे के कान में कुछ भी न डाले , काटन बड भी नहीं । ऐसा करने पर मैल अंदर की ओर सरक जता है और की लाइनिंग को नुकसान पहुंचा सकता है ।
बाहरी कान के संक्रमण : अत्यधिक सफाई या खरोचने से ईयर फ्लैप ड्रम तक का पैसेज संक्रमित हो जाता है ।
लक्षण : बच्चा कान में दर्द की शिकायत करता है और उसकी ईयर फलैप व् बाहरी ईयर पैसेज लाल हो जाती है । कान से मवाद निकलने लगता है । baby care tips in hindi यदि बच्चे को तेज दर्द होता है तो कान की कंनाल में बायल बनने की संभावना होती है ।
उपचार : ईयर फ्लैप साफ करके पैरासिटामोल सिरप दे ।एंटीबायोटिक्स भी दी जा सकती है ।
मिडल ईयर इंफेक्शन : ओंटाइस मीडिया या मिडिल ईयर इंफेक्शन बच्चों में काफी आम है । यूस्टेशियान ट्यूब के जरिए नाक व् गले से होकर बैक्टीरिया मिडिल ईयर में प्रवेश कर जाते है । baby care tips in hindi मिडिल ईयर इंफेक्षण का इलाज तुरंत नहीं करने पर सुनने की क्षमता स्थाई रूप से समाप्त हो सकती है ।
लक्षण : कान में तेज दर्द उठता है भूख कम हो जाती है । baby care tips in hindi बच्चों को बुखार आता है और कान से मवाद लगता है । बच्चा बेहद तकलीफ से कराहने लगता है ।
उपचार : सामान्यतया एन्टीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं का संयोजन राहत देता है । बच्चे को दवा के साथ काफी मात्रा में ठंडक पहुँचने वाले पेय देने चाहिए । बच्चे के काने में पानी नहीं जाने देना चाहिए । baby care tips in hindi अगर आप इन बातों को ध्यान में रखती है तो आपका बच्चा बिना किसी परेशानी के आपकी बातों को सुन और समझ सकेगा । साथ ही हंसते हुए आपका भी मन बहलाता रहेगा ।
कान : बच्चों में कान का संक्रमण होना आम है , क्योंकी उन?आ की यूस्टेशियन टयूब संकरी होती है . जिनसे द्रेनिज पूरी तरह से नहीं होती है और वे आसानी से ब्लैक हो जाते है , जिससे मध्य कर्ण या मिडिल ईयर में इफेकशन फैल जाता है |
कानों में मैल : बाहरी कानg में ग्रंथियों द्वारा मैल बनता है , जो कानों को धूल व् संक्रमण से बचता है । बच्चों में सर्दी होने पर कानों में अधिक मैल जमा होता है , जो सूख कर सख्त हो जाता है , जिससे श्रावण शक्ति को भी नुकसान पहुँच सकता है ।
लक्षण : मैल के सख्त हो जाने पर कम सुनाई पड़ता है और सिर में रिगिंग जैसी आवाज भी आती है । बाहरी कान भरा हुआ लगता है , परीक्षण करने पर मैल दिखाई देता है ।
उपचार : बच्चे के कानों को साफ करने के लिए ईयर ड्राप प्रभावशाली इलाज है , जो मैल को मुलायम बनाकर रात भर में बाहर निकाल देता है ।
क्या न करे : इसके अलावा बच्चे के कान में कुछ भी न डाले , काटन बड भी नहीं । ऐसा करने पर मैल अंदर की ओर सरक जता है और की लाइनिंग को नुकसान पहुंचा सकता है ।
बाहरी कान के संक्रमण : अत्यधिक सफाई या खरोचने से ईयर फ्लैप ड्रम तक का पैसेज संक्रमित हो जाता है ।
लक्षण : बच्चा कान में दर्द की शिकायत करता है और उसकी ईयर फलैप व् बाहरी ईयर पैसेज लाल हो जाती है । कान से मवाद निकलने लगता है । baby care tips in hindi यदि बच्चे को तेज दर्द होता है तो कान की कंनाल में बायल बनने की संभावना होती है ।
उपचार : ईयर फ्लैप साफ करके पैरासिटामोल सिरप दे ।एंटीबायोटिक्स भी दी जा सकती है ।
मिडल ईयर इंफेक्शन : ओंटाइस मीडिया या मिडिल ईयर इंफेक्शन बच्चों में काफी आम है । यूस्टेशियान ट्यूब के जरिए नाक व् गले से होकर बैक्टीरिया मिडिल ईयर में प्रवेश कर जाते है । baby care tips in hindi मिडिल ईयर इंफेक्षण का इलाज तुरंत नहीं करने पर सुनने की क्षमता स्थाई रूप से समाप्त हो सकती है ।
लक्षण : कान में तेज दर्द उठता है भूख कम हो जाती है । baby care tips in hindi बच्चों को बुखार आता है और कान से मवाद लगता है । बच्चा बेहद तकलीफ से कराहने लगता है ।
उपचार : सामान्यतया एन्टीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं का संयोजन राहत देता है । बच्चे को दवा के साथ काफी मात्रा में ठंडक पहुँचने वाले पेय देने चाहिए । बच्चे के काने में पानी नहीं जाने देना चाहिए । baby care tips in hindi अगर आप इन बातों को ध्यान में रखती है तो आपका बच्चा बिना किसी परेशानी के आपकी बातों को सुन और समझ सकेगा । साथ ही हंसते हुए आपका भी मन बहलाता रहेगा ।

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